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क्या है स्क्रब टाइफस, कोलकाता में क्यों फैला है आतंक

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 11/30/2019 4:09:36 PM
क्या है स्क्रब टाइफस, कोलकाता में क्यों फैला है आतंक

रिपब्लिक हिंदी डेस्क: कोलकाता में इन दिनों डेंगू के साथ-साथ एक और बीमारी के नाम से आतंक फैला हुआ है. डेंगू के प्रकोप से कोलकाता में 25 से अधिक लोगों की मौत हो गयी है. वहीं स्क्रब टाइफस नामक एक बीमारी ने भी कोलकाता सहित आसपास के जिलों में आतंक फैला रखा है. स्क्रब टाइफस से भी 40 से अधिक लोग पीड़ित पाये गये हैं. पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग ने तो इन रोगों के लिए विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के लिए गाइड लाइंस भी जारी किये हैं.

इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ (आईसीएच) के विशेषज्ञों के अनुसार स्क्रब टाइफस के लक्षण डेंगू से मिलते-जुलते हैं. शरीर पर लाल चकत्ते बनते हैं. डेंगू की तरह स्क्रब टाइफस से पीड़ित मरीज के रक्त में प्लेटलेट काउंट कम हो सकता है. एक हफ्ते के भीतर यदि बीमारी का पता लग जाये तो उसका इलाज किया जा सकता है. वरना समस्या बढ़ सकती हैं. इससे शरीर के अंग विकल हो सकते हैं. यदि मरीज का बुखार नहीं उतर रहा है तो ब्लड का सैंपल माइक्रोबायोलॉजी लैब में टेस्ट करवाना चाहिए. गत वर्ष भी कोलकाता सहित अन्य जिलों में स्क्रब टाइफस के मामले देखे गये थे.

पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू से हुई मौतों के मद्देनजर सभी अस्पतालों को पांच दिन से बुखार से पीड़ित किसी व्यक्ति की डेंगू और 'स्क्रब टाइफस' की जांच कराने की सलाह दी है. बंगाल सरकार ने सरकारी और निजी अस्पतालों को विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा-निर्देशों पर आधारित चिकित्सा नियमों का सख्ती से पालन करने के लिये कहा गया है. स्क्रब टाइफस की मौजूदा स्थिति की समीक्षा व जिलेवार फैलते संक्रमण को देखते हुए राज्य स्वास्थ्य विभाग ने विशेषज्ञों व विभागीय अधिकारियों संग बैठक भी करनेवाली है.

हालांकि चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि यह रोग लाइलाज नहीं है. घबराने की जरूरत नहीं. इस संक्रमण से भयभीत होने की कोई जरूरत नहीं है. महज स्वच्छता पर ध्यान देने मात्र से ही इस संक्रमण से निपटा जा सकता है. कोलकाता में भी इस संक्रमण से पीड़ित मरीजों की पुष्टि हुई है. स्क्रब टाइफस एक आम संक्रमण है और इसका ईलाज भी है. राज्य के स्वास्थ्य अधिकारी अजय कुमार चक्रवर्ती से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि स्क्रब टाइफस की स्थिति की जांच की जा रही है.

यह है लक्षण

विशेषज्ञों के अनुसार बंगाल के ग्रामीण क्षेत्रों में स्क्रब टाइफस का ज्यादा प्रभाव है. पालतू जानवरों के संपर्क में आने से इस बीमारी के होने की ज्यादा संभावना रहती है. आम तौर देखा गया है कि बच्चे ही स्क्रब टाइफस की चपेट में आते हैं. पशुओं में पाये जाने वाले इस बैक्टीरिया को पिस्सू या माइट कहते हैं. यह पिस्सू जब किसी आदमी को काटता है तो बॉडी पर लाल लाल चकत्ते जैसे निकल आते हैं. स्क्रब टाइफस की शुरुआत सिरदर्द, ठंड और हल्के बुखार से होती है. समय पर इलाज न मिलने पर तेज बुखार के साथ सिरदर्द भी बढ़ने लगता है.

कोलकाता नगर निगम के चिकित्सकों के अनुसार  कीट (पिस्सू) चूहों के शरीर पर भी पाया जाता है. पालतू पशुओं को इस बैक्टीरिया से दूर रखने के लिए इंजेक्शन और स्प्रे का उपयोग किया जाता है. इस बीमारी का समय से इलाज किये जाने पर मरीज एक डेढ़ हफ्ते में ठीक हो सकता है. चूहे भी इस बीमारी के वाहक हो सकते हैं. जिन इलाकों में चूहों की संख्या अधिक है, वहां स्क्रब टाइफस के फैलने की संभावना बनी रहती है. यह खटमल से भी छोटा बैक्टीरिया है, जहां भी काटता है, वहां निशान बन जाता है. यह बैक्टीरिया पार्क की घास और झाड़ियों में भी पाया जा सकता है.
 

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