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प्रतिमा विर्सजन से प्रदूषित हो रही मां गंगा पर भी हो विचार

By Republichindi desk | Publish Date: 10/9/2019 12:54:43 PM
प्रतिमा विर्सजन से प्रदूषित हो रही मां गंगा पर भी हो विचार

रिपब्लिक डेस्कः कोलकाता व संलग्न उपनगरीय इलाकों में दुर्गोत्सव के बाद प्रतिमा विसर्जन के दृश्य इतने मनोरम और आकर्षक होते हैं कि इसे देखने को भारी संख्या में लोगबाग हुगली तट व सड़क किनारे एकत्र हो पारंपरिक लोक गीत के साथ ही देवी दुर्गा को अगले वर्ष आने को आमंत्रण देते हैं. 

मां की विदाई का वो पल सच में रोंगटे खड़े कर देने वाला होता है. लेकिन हम उस वक्त ये भूल जाते हैं कि एक मां को विदा करते वक्त हम दूसरी मां को उस वक्त गंदा कर रहे है. दरअसल, प्रतिमा को रंगने को जिन रंगों का इस्तेमाल किया जाता है, उसमें शीशा और अन्य रासायनिक कणों की प्रचुरता के कारण विसर्जन के उपरांत गंगा नदी की ऊपरी सतह पर तैलीय परत के जमाव से पानी प्रदूषित होता है. ऐसे में चर्म रोग होने की संभावना बढ़ जाती है. साथ ही प्रदूषण भी फैलता है.

ऐसे में कई गंगा की सफाई को लेकर जागृत गंगा समग्र के प्रमुख ने गंगा को प्रदूषित होने से बचाने को लेकर संगठन की ओर से महानगर कोलकाता समेत राज्य भर में पूजा आयोजकों से उक्त विषय पर विस्तार से चर्चा की गई, ताकि नदी की निर्मल प्रवाह पर विसर्जन के बाद रासायनिक रंगों से बचा जा सके. हालांकि बातचीत के बाद उन्होंने कहा कि फिलहाल हम काफी हद तक सफल हुए हैं.

हमने गंगा सफाई सहित मूर्तियों को लेकर लोगों से जब बातें की और उन्हें समझाया तो उन लोगों में से कईयों ने तो पहले धर्म का हवाला देते हुए हमारी बातों को मानने से इंकार कर दिया. लेकिन कई लोगों को हमारी बातें समझ में आई और उन्होंने हमारी बात को मानते हुए विसर्जन की रश्म अदा करने के बाद गंगा में मूर्तियों को न प्रवाहित करते हुए मूर्तियों को कुम्हार को निःशुल्क दे दिया. ताकि कुम्हार को भी फायदा हो और हमारी संस्कृति का भी मान रह जाये. साथ ही गंगा मां भी पवित्र रहे.
 

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