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कांग्रेस की नाव में छेद कर जहाज पर सवार होने की तैयारी में नेता

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 10/4/2019 11:40:10 PM
कांग्रेस की नाव में छेद कर जहाज पर सवार होने की तैयारी में नेता

रिपब्लिक हिंदी डेस्क: कहा जाता है कि जब तक राजनीतिक स्वार्थ सिद्धि होती रहती है तभी तक नेता अपनी पार्टी के लॉयल (विश्वस्त) बने रहते हैं, जहां उनके स्वार्थ पर आंच आयी कि राष्ट्र भक्ति की दुहाई देकर या कोई माकूल बहाना बना कर दूसरे मलाईदार खेमे में जाने की जुगत बिठा लेते हैं. ये बातें हर राजनीतिक पार्टी पर फिट बैठती है लेकिन आजकल कांग्रेस में इसका अनुसरण ज्यादा हो रहा है. लोकसभा चुनावों के पहले छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान विधानसभा चुनावों में मिली जीत से कांग्रेस को थोड़ा ऑक्सीजन मिला था. दूसरे राज्यों के कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भी जोश जगा था लेकिन लोकसभा चुनावों में मिली करारी शिकस्त से कांग्रेसी पस्त हो गये दिख रहे हैं. कांग्रेस के शीर्ष नेता अपनी ही पार्टी रूपी नाव में छेद कर जहाज पर सवार होने की तैयारी में जुट गये हैं.

हरियाणा और महाराष्ट्र में कांग्रेस के टिकटों के लिए घमासान और आरोप-प्रत्यारोप के बीच अन्य राज्यों में भी कांग्रेस के नेता दूसरी पार्टियों में छलांग लगाने के अवसर की ताक में दिख रहे हैं. हरियाणा में पार्टी के पूर्व प्रमुख अशोक तंवर ने चुनाव समितियों के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है. मुंबई कांग्रेस में भी बगावत के सुर तेज हो गए हैं. मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रह चुके संजय निरुपम ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा है कि पार्टी के अंदर सिस्टमैटिक फॉल्ट हो गया है. अगर ऐसे ही चलता रहा तो कांग्रेस तबाह हो जाएगी. बता दें कि मुंबई में टिकट बंटवारे को लेकर संजय निरुपम नाराज चल रहे हैं. उन्होंने चुनाव प्रचार न करने का भी फैसला किया है.

अदिति सिंह और राज बब्बर नहीं आये प्रियंका के साथ

हरियाणा और मुंबई के बाद यूपी कांग्रेस में भी नेताओं के बगावती तेवर दिखने लगे हैं. गांधी जयंती के मौके पर यूपी विधानसभा के विशेष सत्र में कांग्रेस के बहिष्कार के बावजूद भी विधायक अदिति सिंह ने इसमें शामिल होकर सबको हैरान कर दिया था. इसके एक दिन बाद उन्हें Y+ सुरक्षा मिलते ही उनके पार्टी छोड़ने की चर्चा भी तेज हो गई है. वहीं यूपी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर और यूपी कांग्रेस की वरिष्ठ नेता अनु टंडन के भी पैदल मार्च में भी शामिल न होने से सवाल उठ रहे हैं. जिस दिन यूपी का विशेष विधानसभा सत्र आयोजित किया गया, उसी दिन लखनऊ में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी योगी सरकार के खिलाफ पैदल मार्च कर रही थीं. अदिति सिंह पैदल मार्च से नदारद रहीं और विधानसभा सत्र में शामिल होकर विकास के मुद्दे पर बात कही. यही नहीं उन्होंने योगी सरकार की कुछ योजनाओं की भी तारीफ की.

योगी से मिलीं अदिति सिंह

सीएम योगी आदित्यनाथ से अदिति सिंह ने उनके कमरे में जाकर मुलाकात की. इससे उनके बीजेपी में जाने की चर्चा और तेज हो गई. अदिति सिंह को वाई प्लस सुरक्षा भी मिल गई है. यह पहली बार नहीं है जब अदिति ने पार्टी लाइन से अलग जाकर कदम उठाया हो. इससे पहले भी उन्होंने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 के अधिकतर प्रावधान खत्म किए जाने पर केंद्र सरकार के फैसले का समर्थन किया था. अदिति के अलावा कांग्रेस की पैदल यात्रा से यूपी कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर की अनुपस्थिति ने भी लोगों का ध्यान खींचा. सत्ता के गलियारे में भी तरह-तरह की कयासबाजी शुरू होने लगी. हालांकि यूपी कांग्रेस के प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने स्पष्ट किया है कि राज बब्बर के 2 अक्टूबर के दिन विदेश में होने की वजह से वह इस यात्रा में शामिल नहीं हो सके. वहीं अनु टंडन भी अपने क्षेत्र के कार्यक्रम में व्यस्त थीं. इस वजह से वह इस पदयात्रा में शामिल नहीं हो सकीं.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की दावेदारी

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए भी नेताओं में लामबंदी हो रही है. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही हैं. नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश भी शुरू हो गई है. इसके लिए कांग्रेस विधायक अजय कुमार लल्लू और पूर्व सांसद जितिन प्रसाद के नाम सामने आ रहे हैं. खास बात यह है कि यही दोनों नेता कांग्रेस की पैदल यात्रा के दौरान संघर्ष करते नजर आए थे. दोनों ही नेता अध्यक्ष पद के दावेदार माने जा रहे हैं. सोनभद्र नरसंहार के बाद प्रियंका गांधी के दौरे के पीछे कुशीनगर से विधायक अजय कुमार लल्लू की बड़ी भूमिका मानी जाती है. पिछले दिनों अजय कुमार लल्लू का नाम अध्यक्ष पद के लिए बिल्कुल तय माना जा रहा था लेकिन ऐन मौके पर पार्टी के हाई कमान ने फैसले पर रोक लगा दी थी. इस दौरान जितिन प्रसाद का नाम भी सामने आने लगा. उनके नाम का प्रदेश अध्यक्ष पद की दावेदारी में पहले भी चल चुका है. वह पार्टी का ब्राह्मण चेहरा भी माने जाते हैं.

हालांकि कांग्रेस में गुटबाजी कोई नयी बात नहीं है. हर प्रदेश में कांग्रेस कई गुटों में विभक्त है. टिकटों के बंटवारे और प्रदेश अध्यक्ष तथा पदाधिकारियों के चयन के समय गुटबाजी उजागर हो जाती है. राजस्थान और मध्य प्रदेश में तो शीर्ष नेतृत्व ही अलग-अलग गुटों को नेतृत्व देते हैं. गाहे-बगाहे गुटबाजी की खबरें मीडिया की सुर्खियां भी बनती हैं. अब देखना है कि हरियाणा, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की गुटबाजी क्या गुल खिलाती है.
 

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