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बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में सीएम योगी और संत समाज के बीच नहीं बन पाई बात, नारज हो लौटे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

By Republichindi desk | Publish Date: 5/20/2018 1:51:37 PM
बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में सीएम योगी और संत समाज के बीच नहीं बन पाई बात, नारज हो लौटे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

वाराणसी : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार की शाम दो दिवसीय प्रवास पर काशी पहुंचे तो सबसे पहले उन्होंने संत धर्म का निर्वहन करते हुए श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर कॉरीडोर (गंगा पाथवे) को लेकर उपजी स्थिति की चिंता की. संतों से अलग-अलग वार्ता करते हुए भरोसा दिलाया कि इस मामले में जनता के बीच जो भी भ्रम की स्थिति बनी है उसे दूर किया जाएगा. स्पष्ट किया कि बनारस का विकास तीर्थ स्थल के तौर पर ही किया जाएगा. वहीं मुख्यमंत्री ने वार्ता के लिए मंदिर बचाओ आंदोलन का नेतृत्व कर रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ प्रतिनिधि मंडल को बुलवाया था. पैदल आ रहे इस दल को संख्याबल अधिक होने का हवाला देते हुए पुलिस ने मलदहिया पर रोक दिया. इससे नाराज होकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद लौट गए. उधर आंदोलन पक्ष से जुड़े लोगों ने इसे अपमान करार देते हुए आंदोलन जारी रखने की बात कही है.

सर्किट हाउस में की इन लोगों से मुलाकात

सर्किट हाउस में सीएम ने एक-एक कर संकटमोचन के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र, सतुआ बाबा आश्रम के पीठाधीश्वर बाबा संतोष दास, गंगा महासभा के स्वामी जितेंद्रानंद, बाबा बालकदास, महंत ईश्वरदास, महंत सर्वेश्वरशरण दास, महंत अवधबिहारी दास, महंत रामलोचन दास, महंत श्रवणदास, पद्मपति शर्मा व अम्बरीश सिंह भोला से मुलाकात की.

किसी मंदिर या विग्रह को नहीं पहुंचाया जायेगा नुकसान
 
संकटमोचन के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र ने सीएम योगी से कहा कि काशी को अमेरिकन शब्द हेरिटेज के तौर पर न देखते हुए लिविंग हेरिटेज के नजरिए से देखा जाए. सरकार गंगा पाथवे की समग्र योजना को लेकर जनता के बीच स्थिति स्पष्ट करे. सीएम ने भरोसा दिलाया कि काशी में किसी मंदिर या विग्रह को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा. यदि कहीं कोई विग्रह खंडित हैं तो उन्हें गंगा में शास्त्रीय विधान से विसर्जित किया जाएगा. अन्य जमीन में धंसे या जीर्णशीर्ण मंदिरों को प्रतिष्ठित व सुंदरीकरण किया जाएगा. 
 
वाराणसी में देर रात सारनाथ के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का किया निरीक्षण, देखी विकास कार्यो की गति 
 
इस दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आधी रात को शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचकर विकास कार्यों का निरीक्षण किया और कार्य निर्धारित मियाद में पूरा करने का निर्देश दिया. इस क्रम में सीएम ने निर्माणाधीन वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, सीवेज पंपिंग स्टेशन, कैंसर अस्पताल, ईएसआई अस्पताल का निरीक्षण किया. सीएम के साथ मंत्री नंद गोपाल नंदी, राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार अनिल राजभर और राज्यमंत्री डा. नीलकंठ तिवारी मौजूद रहे.
 
रोके गए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
 
श्रीकाशी विश्वनाथ परिक्षेत्र से गंगा तट तक बनने वाले कॉरीडोर निर्माण को लेकर शनिवार को बनारस आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वार्ता के लिए जा रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को पुलिस ने रोक दिया. लोहटिया चौराहे पर कुछ देर खड़ा रहने के बाद स्वामी ने लौट जाना ही उचित समझा. कहना था कि मान-सम्मान छोड़ कर काशी तीर्थ में तोड़े जा रहे मंदिरों को बचाने के लिए मुलाकात करने जा रहा था. इसके लिए मुख्यमंत्री ने ही जिलाधिकारी से निमंत्रण भेजा था. स्वामी ने कहा कि मुख्यमंत्री जनता का सामाना नहीं करना चाह रहे हैं. उनको एहसास है कि कॉरीडोर के नाम पर मंदिर तोड़ा जाना गलत है. इसलिए आंदोलन करने वालों से वार्ता करने का मन बनाया लेकिन स्थानीय जिला व पुलिस प्रशासन ने रास्ते में ही रोक दिया. 
 
मुख्यमंत्री का संदेश आया था मिलने के लिये
 
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि 16 मई से काशी में पुराणोक्त मंदिर के दर्शन पूजन की यात्रा पर हूं. चौथे दिन यानी शनिवार को लक्ष्मीकुंड के काली मठ में यात्रा रुकी है. इसी बीच मुख्यमंत्री का संदेश आया कि वह आज काशी आ रहे हैं और स्वामी से बात करना चाहते हैं. स्वामी ने यात्रा का जिक्र करते हुए मठ के करीब ही कहीं वार्ता करने की मंशा जताई. कहा कि नंगे पांव दूर तक चलना मुश्किल होता है लेकिन जिलाधिकारी ने सुरक्षा का हवाला देते हुए सर्किट हाउस में ही वार्ता करने के लिए अनुरोध किया. जनहित व मंदिरों को बचाने के लिए स्वामी ने कष्टकारी यात्रा कर वार्ता के लिए सर्किट हाउस जाने को तैयार हो गए. इसी वचन अनुबंध के तहत वे अपने लोगों के साथ पैदल ही सर्किट हाउस के लिए निकल लिए. रास्ते में लोहटिया के पास उनको रोक दिया गया और अफसरों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने जिनको बुलाया है वही आगे जा सकेंगे. उनके लिए वाहन का इंतजाम किया गया है. हालांकि स्वामी ने संकल्प यात्रा का हवाला देते हुए समर्थकों के साथ पैदल ही जाने की बात कही. अफसरों ने उनको रोकते हुए जिलाधिकारी से बात करने का अनुरोध किया. हालांकि अफसरों की बात डीएम से नहीं हो सकी तो बहुत देर से सड़क पर खड़े स्वामी ने मठ में जाने का निर्णय लिया. करीब दो किलोमीटर लौट जाने के बाद जिलाधिकारी ने फोन कर सर्किट हाउस में आने का अनुरोध किया लेकिन उन्होंने अस्वीकार कर दिया.
 

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