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बीजेपी उम्मीदवार रवि किशन की फर्श से अर्श तक की कहानी

By Republichindi desk | Publish Date: 5/9/2019 4:23:20 PM
बीजेपी उम्मीदवार रवि किशन की फर्श से अर्श तक की कहानी

रिपब्लिक डेस्क. उत्तर प्रदेश की गोरखपुर सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने भोजपुरी सुपरस्टार रवि किशन को लड़ाई में उतारा है. सीट मिलने के बाद रवि किशन लगातार चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं और अपनी जीत को लेकर आश्ववस्त नजर आ रहे हैं. लेकिन एक समय था जब वह पैसों की तंगी से जूझ रहे थे और फिल्मों में रोल के लिए दर-दर भटक रहे थे. रवि किशन ने अपनी जिंदगी के बुरे वक्त के बारे में बताया कि हम लोग बहुत गरीब थे. भोजपुरी सुपरस्टार कहते हैं कि एक वक्त ऐसा था कि जब दीवाली पर मां के लिए एक नई साड़ी भी नहीं खरीद सकते थे.

रवि किशन का जन्म मुंबई में सांताक्रूज़ की एक चॉल में हुआ था. जब उनकी उम्र 10 साल की थी, तब उनका परिवार डेयरी कारोबार विवाद के कारण मुंबई से उत्तर प्रदेश के जौनपुर में स्थानांतरित हो गया. 17 वर्ष की उम्र में उनकी मां ने उन्हें 500 रुपए दिए थे, जिसे लेकर वह उत्तर प्रदेश से मुंबई आ गए. वह रामलीला में भी कार्य करते थे, जहां वह सीता की भूमिका निभाते थे. उनकी डेब्यू फिल्म पीताम्बर एक बी ग्रेड फिल्म थी, जिसके लिए उन्हें 5000 रुपए मिले थे. वह सलमान खान की फिल्म तेरे नाम में दिखे. जिसमें उन्होंने रामेश्वर नामक पुजारी की भूमिका अदा की थी. 2006 में, बिग बॉस 1 में वह फाइनल प्रतियोगी भी थे. वर्ष 2012 में उन्होंने 'झलक दिखला जा- 5' कार्यक्रम में भाग भी लिया था.

वर्ष 2007 में, उन्होंने स्पाइडर-मैन फिल्म के अभिनेता पीटर पार्कर की आवाज को भोजपुरी में डब किया. रवि किशन ने बताया कि उन्हें बॉलीवुड में रोल नहीं मिल रहे थे. तब उन्हें एक भोजपुरी फिल्म मिली. इसके लिए उन्होंने अपनी मां से पूछा तो उन्होंने कहा कि अपने गांव के लोगों के लिए तुम यह काम करो. इस तरह भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में उनकी एंट्री हुई जिसके बाद उनकी जिंदगी ही बदल गई. बता दें कि 51 साल के भोजपुरी स्टार रवि किशन शुक्ला उर्फ रवीन्द्र श्याम नारायण शुक्ला लग्जरी गाड़ियों के शौकीन हैं. गोरखपुर सदर सीट से नामांकन के दौरान उन्होंने अपनी और पत्नी के नाम कुल चल-अचल संपत्ति करीब 21 करोड़ बताई है. अब ये देखना दिलचस्प होगा कि लाखों की तादाद में फैन फॉलोइंग रखने वाले रवि किशन उसे वोट में कैसे बदल पाते हैं. वहीं बीजेपी की सबसे सुरक्षित सीटों की बात की जाए तो उनमें से गोरखपुर एक है. इस सीट पर अब तक 18 बार लोकसभा चुनाव हुए हैं, जिसमें से 8 बार गोरक्षपीठ का ही कब्जा रहा है.

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