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भविष्य में मानव का अभिन्न अंग होगा स्मार्ट फोन

By Republichindi desk | Publish Date: 7/11/2019 4:19:46 PM
भविष्य में मानव का अभिन्न अंग होगा स्मार्ट फोन

न्यूज डेस्कः मनुष्य की जिस प्रकार तकनीक पर निर्भरता बढ़ती जा रही है. इससे लगता है कि आने वाले कुछ सालों में स्मार्ट फोन मानव जीवन का अभिन्न अंग बन जाएगा. भविष्य में तकनीकी इतनी विकसित हो जाएगी कि उसे मानव शरीर के भीतर ही फिट कर दिया जाएगा, उसके बाद उसे सिर्फ दिमाग से सोचना भर ही होगा बाकी काम दिमाग से मिलने वाले आदेशों से होगा.  आपने दिमाग से किसी को फोन मिलाने के लिए सोचा, इतनी ही देर में शरीर में फिट मशीन उस काम को कर देगी.

यदि इस तरह की बातें आज पुराने समय के बुजुर्गों को बताई जाएं तो वो सीधे यही कहेंगे कि आज का आदमी भगवान हो गया है.  जिस तरह से तकनीकी में लगातार इजाफा होता जा रहा है. हर चीज के लिए नई तकनीकी से हम रूबरू हो रहे हैं उससे आने वाले कुछ समय में इस तरह की तकनीकी का भी विकसित हो जाना कोई बड़ा  अचंभा जैसे नहीं होगा. कई पुराने खोज करने वाले आज भी इस तरह की तकनीकी को सहज बनाने के तरीकों की तलाश करने में लगे हुए हैं.



एक भविष्यवादी के अनुसार, मानव के लिए अगली खोज उसका खुद का शरीर ही होगा. फास्ट कंपनी के यूरोपियन इनोवेशन फेस्टिवल में एक बातचीत में इतिहासकार और अंतर्राष्ट्रीय बेस्टसेलिंग लेखक, युवल नूह हारारी ने कहा कि जो दौर चल रहा है उसको देखते हुए ये कहा जा सकता है कि इन दिनों मानव शरीर तकनीकी के साथ एक क्रैश कोर्स पर है. उनका कहना है कि ये कह पाना बहुत ही मुश्किल है कि आज के समय में कम्प्यूटर कहां से शुरू हो रहा है और हम कहां पर खत्म हो रहे हैं.

उनका कहना है कि भविष्य में ऐसा होगा कि स्मार्ट फोन को आपसे दूर कर पाना किसी भी तरह से संभव नहीं होगा. ये आपके शरीर या दिमाग में कहीं फिट कर दिया जाएगा. ये ऐसा बना हुआ होगा जो आपके दिमाग का डेटा और संवेदनाओं को स्कैन करता रहेगा.  उसी हिसाब से काम होगा.

जिस तरह से तकनीकी का विकास हो रहा है और वो बढ़ रही है उसी हिसाब से इन चीजों के बारे में भी सोचा जा रहा है.अगर हम अपने पूर्वजों को आज के जीवन के बारे में बताते हैं तो उन्हें लगता है कि हम पहले से ही भगवान हैं. लेकिन सच्चाई यह है कि भले ही हमने अधिक संवेदनशील उपकरण विकसित किए हों, मगर हम अभी भी वैसे ही जानवर हैं. हालांकि, हरारी के विचार स्पष्ट हो सकते हैं लेकिन प्रौद्योगिकी के कुछ नेताओं ने पहले से ही मानव मस्तिष्क को मशीनों से जोड़ने की शुरुआत कर दी है.

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