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BSNL और MTNL को बंद करने के पक्ष में है भारत सरकार

By Republichindi desk | Publish Date: 10/9/2019 4:44:59 PM
BSNL और MTNL को बंद करने के पक्ष में है भारत सरकार

न्यूज़ डेस्क. डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्यूनिकेशंस ने बीएसएनएल और एमटीएनएल को फिर से पुनर्जीवित करने के लिए 74,000 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव दिया था. जिस पर वित्त मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और दोनों पीएसयू कंपनियों को बंद करने की सलाह दी है. दरअसल, बीएसएनएल और एमटीएनएल को बंद करने की योजना इसलिए बनायी गई है क्योंकि अभी टेलीकॉम इंडस्ट्री में जारी आर्थिक संकट के समय में कोई कंपनी शायद ही सरकारी कंपनियों में निवेश करने पर विचार करे.

BSNL और MTNL दोनों पीएसयू कंपनियों को बंद करने की स्थिति में 95,000 करोड़ रुपए की लागत आने का अनुमान है. यह लागत बीएसएनएल और एमटीएनएल के 1.65 लाख कर्मचारियों को आकर्षक रिटायरमेंट प्लान देने के और कंपनी का कर्ज लौटाने की स्थिति में आनी है. हालांकि अब हो सकता है कि बीएसएनएल और एमटीएनएल के कर्मचारियों को आकर्षक रिटायरमेंट प्लान देने की जरुरत नहीं पड़ेगी.

दोनों कंपनियों में कर्मचारी तीन प्रकार हैं. एक प्रकार के कर्मचारी वो हैं, जो कंपनी द्वारा सीधे तौर पर नियुक्त किए गए हैं. दूसरे प्रकार के कर्मचारी वो हैं, जो दूसरी पीएसयू कंपनियों से या विभागों से बीएसएनएल और एमटीएनएल में शामिल किए गए हैं. वहीं तीसरी तरह के कर्मचारी इंडियन टेलीकम्यूनिकेशंस सर्विस के अधिकारी हैं. अब यदि कंपनियों को बंद किया जाता है तो ITS अधिकारियों को अन्य सरकारी कंपनियों में तैनाती दी जा सकती है. वहीं जो कर्मचारी बीएसएनएल और एमटीएनएल द्वारा सीधे तौर पर नियुक्त किए गए हैं, वह जूनियर स्तर के हैं और उनकी तनख्वाह भी ज्यादा नहीं है और ये पूरे स्टाफ के सिर्फ 10% हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार ऐसे कर्मचारियों को अनिवार्य रिटायरमेंट दे सकती है, जिसमें कुछ लागत जरुर आएगी.

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