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चीफ इंजीनियर के सामने ठेकेदार ने गोली मारकर की आत्महत्या

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 8/29/2019 6:36:02 PM
चीफ इंजीनियर के सामने ठेकेदार ने गोली मारकर की आत्महत्या

रिपब्लिक डेस्क: सरकारी ठेकेदारों को नाकों चना चबाने के लिए इंजीनियर से लेकर उच्चाधिकारी मजबूर कर देते हैं. यूपी के वाराणसी से ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां ठेकेदार ने पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर के सामने ही खुद को गोली मार ली. इंजीनियर ने आत्महत्या विषयक नोट भी लिख छोड़ा है. नोट में लिखा है कि ठेकेदार अवधेश चंद्र श्रीवास्तव अधिकारियों से कई साल से परेशान थे. उनका पांच करोड़ रुपया अधिकारियों ने कमीशनखोरी के चक्कर में रोक रखा था. योजनाओं को पूरा करने और भुगतान नहीं होने के कारण वह पत्नी के जेवर भी बेच दिये थे.

पीडब्ल्यूडी चीफ इंजीनियर के सामने गोली मारकर आत्महत्या करने वाले ठेकेदार अवधेशचंद श्रीवास्तव की घटना के बाद अन्य ठेकेदार भी लामबंद हो गये हैं. पचास से अधिक ठेकेदारों ने प्रातीय खंड के एकाउंटेंट संजय सिन्हा के कार्यालय में बैठे सहायक अभियंता एसडी मिश्रा को घेर लिया और उनके खिलाफ नारेबाजी की. इस दौरान ठेकेदारों और दूसरे पक्षों में मारपीट की नौबत आ गई. पुलिस को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा. अवधेश श्रीवास्तव के आत्महत्या करने की जानकारी मिलने के बाद पीडब्ल्यूडी ऑफिस पहुंचे कबीरचौरा के  ठेकेदार उदय वर्मा ने मुख्य अभियंता पर धमकी देने का आरोप लगाया. उनका कहना था कि प्रवासी भारतीय सम्मेलन में लालपुर स्टेडियम की मरम्मत कराई गई लेकिन उस मद में बकाये 40 लाख रुपए का अब तक भुगतान नहीं हुआ है.

तगादा करने पर मुख्य अभियंता अंबिका सिंह ने भुगतान कराने के बजाय उल्टे धमकी दी. बाद में एक पत्र भेजकर कहा कि भुगतान को लेकर बार-बार परेशान करने पर क्यों ना आपके खिलाफ कार्रवाई की जाए. उन्होंने बताया कि प्रवासी भारतीय सम्मेलन में कार्य कराने वाले ठेकेदारों का करीब तीन करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हुआ है. वे अधिकारियों के यहां लगातार चक्कर लगा रहे हैं. ठेकेदार काशीनाथ पांडेय ने भी पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों पर भुगतान के नाम पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया. उनका कहना था कि यहां कमीशन के बाद भी बिना रुपये दिए किसी बिल का भुगतान नहीं होता है.

लागत डेढ़ गुना बढ़ गया

कबीरचौरा के जिला महिला अस्पताल परिसर में जिस सौ बेड के मैटरनिटी विंग के निर्माण में कमीशनखोरी का आरोप लगाकर ठेकेदार अवधेशचंद्र श्रीवास्तव ने आत्महत्या की, उसकी डिजाइन के साथ निर्माण की अवधि और बजट की राशि भी लगातार बढ़ती गई. सन-15 में शुरू हुए काम को सन-17 में पूरा होना था मगर तीन बार समय सीमा बढ़ाई जा चुकी है. अब भी पांच फीसदी काम अधूरा है. वहीं, लगभग 20 करोड़ रुपए की शुरुआती लागत अब लगभग 30 करोड़ रुपए के आसपास पहुंच चुकी है. पीडब्ल्यूडी के अवर अभियंता मनोज सिंह के मुताबिक मैटरनिटी विंग का प्रारंभिक बजट 19 करोड़ 99 लाख 79 हजार रुपये था. इसमें 11 करोड़ 52 लाख रुपये विभाग के निर्माण खंड को खर्च करना था. बिजली व लिफ्ट संबंधी कार्य पीडब्ल्यूडी के इलेक्ट्रिकल विभाग को कराना है. वहीं नलकूप विभाग को फायर फाइटिंग का कार्य कराना था. चिकित्सा उपकरण भी इसी राशि में आने थे. साल 2015 में निर्माण शुरू हुआ. तब इसके पूरा होने की मियाद 26 माह रखी गई थी. अब तक तीन बार समय सीमा बढ़ाई जा चुकी है. इस साल 29 जून को पहुंची सूबे के स्वास्थ्यमंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने निर्माण में विलंब पर तत्कालीन एक्सईएन अरुण कुमार सिंह को फटकार भी लगाई थी.

ठेकेदार के मोबाइल में छुपे हैं कई राज

लोकनिर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर के चैंबर में आत्महत्या करने वाले ठेकेदार अवधेशचंद्र श्रीवास्तव का मोबाइल पुलिस ने कब्जे में ले लिया गया है. सूत्रों के अनुसार अवधेश के मोबाइल में पीडब्ल्यूडी के कई अधिकारियों का कच्चा-चिट्ठा मौजूद है. साथ ही मानकों को दरकिनार कर कराए गए कई कार्यों की भी जानकारी है. ठेकेदार ने सुसाइड नोट में भी मोबाइल में सारे तथ्य होने की बात लिखी है. इसे लेकर विभाग में हड़कम्प है. पुलिस ने ठेकेदार के मोबाइल से कॉल डिटेल निकालना शुरू कर दिया है. यह पता लगाया जाएगा कि ठेकेदार ने हाल के दिनों में कब, किससे, क्या-क्या बातचीत की है. बकाया भुगतान के लिए उसने किससे-किससे गुहार लगाई है. इस पड़ताल में जिन लोगों के नाम सामने आएंगे, उनसे पूछताछ होगी.

परिजनों को दो घंटे बाद हुई जानकारी

ठेकेदार अवधेशचंद्र श्रीवास्तव मूल रूप से गाजीपुर में पहाड़पुर के रहने वाले थे. मीरापुर-बसहीं रोड पर स्थित विश्वनाथपुरी कॉलोनी में उन्होंने कुछ वर्ष पहले मकान बनवाया था. उनका बड़ा बेटा सजल श्रीवास्तव नोएडा में पढाई कर रहा है जबकि छोटा बेटा आकाश उर्फ सृजन बीएचयू से बीए कर रहा है. बेटी श्रेयश्री इंटर की छात्रा है. पत्नी प्रतिभा श्रीवास्तव घर पर रहती हैं.  परिजनों को अवधेश के आत्महत्या कर लेने की दो घंटे तक जानकारी नहीं थी. उन्हें बताया गया कि अवधेश को गोली लगी है और उन्हें जिला अस्पताल ले जाया जा रहा है. अस्पताल पहुंचने पर पत्नी प्रतिभा, बेटे व बेटी को अवधेश की मौत की जानकारी हुई. इसके बाद उनकी चित्कार फूट पड़ी. वहीं कॉलोनी के उनके पड़ोसियों ने बताया कि अवधेश सरल स्वभाव वाले मिलनसार व्यक्ति थे, लेकिन पिछले एक साल से वह काफी तनाव में रहते थे. बातचीत के दौरान हमेशा पेमेंट न होने की बात करते थे. इस दौरान चेहरे पर गुस्सा नजर आता था.

डीएम से भी मिला था ठेकेदार

जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि कबीरचौरा में निर्माणाधीन मैटरनिटी विंग में कनेक्शन को लेकर बिजली विभाग ने एक करोड़ दो लाख का आरसी जारी किया था. इसे लेकर ठेकेदार अवधेशचंद्र परेशान था. आरसी को खत्म करने के बाबत पिछले दिनों उसने डीएम से मुलाकात की थी. बातचीत के दौरान उसकी तबीयत भी खराब हो गई थी. तब डॉक्टर बुलाकर उसे दिखाया गया था. कुछ देर में वह सही हुआ. उसके कहने पर मैंने पूर्वांचल डिस्काम के एमडी से बात भी की थी. एमडी ने बताया था कि चार्जशीट जारी हो गई है. अब पूरी राशि का भुगतान करना होगा. मैंने उसे यह समझाकर लौटाया था कि वह थोड़ा-थोड़ा धन जमा करना शुरू कर दे. डीएम ने बताया कि घटना के बाद पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से पूछताछ और अवधेशचंद्र के कराए कार्यों की पत्रावली तलब की गई थी. इसमें यह बात सामने आई कि उसे 23 जून को 64 लाख और 28 जून को 23 लाख रुपये का भुगतान किया गया था.

 

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