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जाने अयोध्या जमीन विवाद की पूरी कहानी

By Republichindi desk | Publish Date: 11/8/2019 6:05:59 PM
जाने अयोध्या जमीन विवाद की पूरी कहानी

न्यूज डेस्कः अयोध्या में विवादित स्थल पर मालिकाना हक से जुड़े केस में सुप्रीम कोर्ट में 16 अक्टूबर को सुनवाई पूरी हो चुकी है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने इस ऐतिहासिक मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है. सीजेआई 17 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं और उम्मीद है कि उससे पहले अयोध्या विवाद पर फैसला आ जाएगा.

इसी क्रम में फैसले से पहले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह और मुख्य सचिव राजेंद्र तिवारी को तलब किया है. माना जा रहा है कि तैयारियों का जायजा लेने के लिए यह बैठक बुलाई गई है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी प्रशासिनक बैठक करके सुरक्षा की समीछा की है.

अयोध्या जमीन विवाद मामला देश के सबसे लंबे चलने वाले केस में से एक है. अयोध्या में विवाद की नींव करीब 400 साल पहले पड़ी थी, जब वहां मस्जिद का निर्माण हुआ. आइए आपको बताते हैं कि अयोध्या में विवाद कब से शुरू हुई और कब-कब क्या हुआ.

साल 1528: मुगल बादशाह बाबर ने (विवादित जगह पर) मस्जिद का निर्माण कराया. इसे लेकर हिंदुओं को दावा है कि यह जगह भगवान राम की जन्मभूमि है और यहां पहले एक मंदिर था.

साल 1853-1949 तक: 1853 में इस जगह के आसपास पहली बार दंगे हुए. 1859 में अंग्रेजी प्रशासन ने विवादित जगह के आसपास बाड़ लगा दी. मुसलमानों को ढांचे के अंदर और हिंदुओं को बाहर चबूतरे पर पूजा करने की इजाजत दी गई.

साल 1949: असली विवाद शुरू हुआ 23 दिसंबर 1949 को, जब भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद में पाई गईं. हिंदुओं का कहना था कि भगवान राम प्रकट हुए हैं, जबकि मुसलमानों ने आरोप लगाया कि किसी ने रात में चुपचाप मूर्तियां वहां रख दीं. यूपी सरकार ने मूर्तियां हटाने का आदेश दिया, लेकिन जिला मैजिस्ट्रेट के. के. नायर ने दंगों और हिंदुओं की भावनाओं के भड़कने के डर से इस आदेश को पूरा करने में असमर्थता जताई. सरकार ने इसे विवादित ढांचा मानकर ताला लगवा दिया.

साल 1950: फैजाबाद सिविल कोर्ट में दो अर्जी दाखिल की गई. इसमें एक में राम लला की पूजा की इजाजत और दूसरे में विवादित ढांचे में भगवान राम की मूर्ति रखे रहने की इजाजत मांगी गई. 1959 में निर्मोही अखाड़ा ने तीसरी अर्जी दाखिल की.

साल 1961: यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अर्जी दाखिल कर विवादित जगह के पजेशन और मूर्तियां हटाने की मांग की.

साल 1984: विवादित ढांचे की जगह मंदिर बनाने के लिए 1984 में विश्व हिंदू परिषद ने एक कमिटी गठित की.

साल 1986: यू. सी. पांडे की याचिका पर फैजाबाद के जिला जज के. एम. पांडे ने 1 फरवरी 1986 को हिंदुओं को पूजा करने की इजाजत देते हुए ढांचे पर से ताला हटाने का आदेश दिया.

6 दिसंबर 1992: बीजेपी, वीएचपी और शिवसेना समेत दूसरे हिंदू संगठनों के लाखों कार्यकर्ताओं ने विवादित ढांचे को गिरा दिया। देश भर में हिंदू-मुसलमानों के बीच दंगे भड़के गए, जिनमें 2 हजार से ज्यादा लोग मारे गए.

साल 2010: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित स्थल को सुन्नी वक्फ बोर्ड, रामलला विराजमान और निर्मोही अखाड़ा के बीच 3 बराबर-बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया.

साल 2011: सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाई.

साल 2017: सुप्रीम कोर्ट ने आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट का आह्वान किया। बीजेपी के शीर्ष नेताओं पर आपराधिक साजिश के आरोप फिर से बहाल किए.

8 मार्च 2019: सुप्रीम कोर्ट ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा। पैनल को 8 सप्ताह के अंदर कार्यवाही खत्म करने को कहा.

1 अगस्त 2019: मध्यस्थता पैनल ने रिपोर्ट प्रस्तुत की.

2 अगस्त 2019: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता पैनल मामले का समाधान निकालने में विफल रहा.

6 अगस्त 2019: सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की रोजाना सुनवाई शुरू हुई.

16 अक्टूबर 2019: अयोध्या मामले की सुनवाई पूरी. सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा.
 

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