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पिता ने मृत्यु से पहले वसीयत नही की है तो क्या है नियम

By Republichindi desk | Publish Date: 5/18/2019 8:50:54 AM
पिता ने मृत्यु से पहले वसीयत नही की है तो क्या है नियम

रिपब्लिक डेस्क. पिता की मौत यदि वसीयत बनाये बगैर हो जाती है तो भी बेटी को उनके पैतृक संपत्ति में बराबर का अधिकार है. हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 में साल 2005 में ही संशोधन कर बेटियों को पिता के पैतृक संपत्ति में बराबर हिस्सा पाने का कानूनी अधिकार दिया गया. इस कानून में संशोधन होने से बेटियां अपने पिता की पैतृक संपत्ति में हक ले सकती हैं. और पिता, भाई या दूसरे रिश्तेदार इसको देने से मना नहीं कर सकते हैं.

हिंदू उत्तराधिकार कानून में उत्तराधिकारियों को चार श्रेणियों में बांटा गया है. इसके तहत पिता की मौत होने पर बेटा, बेटी, विधवा और अन्य लोग आते हैं. यानी बेटी को भी पिता के मौत होने पर बेटे जैसा समान अधिकार मिलता है. हालांकि आमतौर पर हिन्दू परिवार में पिता की संपत्ति पर सिर्फ बेटे का पूरा अधिकार माना जाता है. लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है, पिता की संपत्ति पर बेटी का भी बेटा जैसा बराबर का हक है.
 
हिन्दू उत्तराधिकार कानून में संपत्ति को दो श्रेणियों में बांटा गया है. पैतृक और खुद से अर्जित संपत्ति. पैतृक संपत्ति के तहत चार पीढ़ी पहले से अर्जित प्रॉपर्टी आती हैं, जिनका बटवारा नहीं हुआ है. इस तरह की प्रॉपर्टी में बेटी का जन्मसिद्ध अधिकार है. वह प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी लेने का दावा कर सकती है. जबकि साल 2005 से पहले इस तरह की संपत्ति में सिर्फ बेटों को अधिकार मिलता था. लेकिन काननू में संशोधन होन से अब समान अधिकार बेटियों को भी मिल रहा है. इस तरह की प्रॉपर्टी में हिस्सा देने से पिता भी अपनी बेटी को मना नहीं कर सकते हैं. हालांकि पिता द्वारा खुद की कमाई से अर्जित संपत्ति को लेकर बेटियों का पक्ष कमजोर है. यह पिता की मर्जी पर निर्भर करेगा कि वह अपनी बेटियों को हिस्सेदारी दे या नहीं. यदि वह हिस्सेदारी देना नहीं चाहता है तो बेटी कुछ नहीं कर सकती है. उसके पास कानूनी रूप से उस प्रॉपर्टी में हिस्सा लेने का अधिकार नही है.
 
बहरहाल, 2005 से पहले हिंदू उत्तराधिकार कानून में बेटियों को शादी से पहले तक ही हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) का हिस्सा माना जाता था. लेकिन 2005 में संशोधन के बाद बेटी की शादी होने के बाद भी संपत्ति में समान उत्तराधिकारी माना गया है. यानी बेटी की शादी होने के बाद भी वह पिता की संपत्ति में अपना दावा कर सकती है और हिस्सा ले सकती है. गौरतलब है कि किसी भी पुरुष को अपने पिता, दादा या परदादा से उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति, पैतृक संपत्ति कहलाती है.

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