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‘जय श्री राम' और ‘जय महाकाली' के नारों के जरिये बंगाल की सत्ता साधेगी बीजेपी

By Republichindi desk | Publish Date: 6/4/2019 2:19:43 PM
‘जय श्री राम' और ‘जय महाकाली' के नारों के जरिये बंगाल की सत्ता साधेगी बीजेपी

न्यूज डेस्क: भारतीय जनता पार्टी लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत से जीत हासिल कर दूसरी बार केंद्र में अपनी सरकार बना पाने में सफल हुई है. भारत के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी गैर कांग्रेस पार्टी ने प्रचंड बहुमत से दूसरी बार सरकार बनायी है. पश्चिम बंगाल के इतिहास में भी पहली बार बीजेपी को इतनी बड़ी सफलता मिली है. लोकसभा चुनाव में अपनी जीत से उत्साहित बीजेपी अब विधानसभा चुनाव पर निगाहें लगाये हुए है. पार्टी ने अभी से ही चुनावी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है.

भारतीय जनता पार्टी बंगाल में राजनीति में धर्म का तड़का लगा कर अपनी नाव पार लगाना चाहती है. इसलिए बंगाल में जय श्रीराम के स्लोगन को लेकर उठे विवाद को तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल करने पर आमादा है. वहीं बीजेपी ने राज्य के लिए अपने नारों की सूची में जय श्रीराम के साथ जय महा काली के नारे को शामिल किया है. यह नारा ऐसे समय में शामिल किया है. जब टीएमसी ने बीजेपी पर बाहरी लोगों की पार्टी होने का आरोप लगाया जो बंगाल की संस्कृति नहीं समझते.

बीजेपी के पश्चिम बंगाल मामलों के प्रभारी  कैलाश विजय वर्गीय ने पार्टी की शानदार जीत के बाद बंगाल के पहले दौरे में ही यह साफ कर दिया था बंगाल में हमारे नारे ‘जय श्री राम' और ‘जय महाकाली' होंगे. बंगाल महाकाली की धरती है. हमें मां काली का आशीर्वाद चाहिए और पार्टी तब तक राज्य में प्रचार करेगी जब तक तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार को सत्ता से बाहर कर भगवा पार्टी के नेतृत्व में नयी सरकार नहीं बना लेती.

राजनीतिक जानकारों की माने तो  तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल में जनाधार खो रही है. बंगाल की जनता विश्वास इस पार्टी से धीरे-धीरे उठ रहा है. इस कारण खुद तृणमूल सूप्रीमो ममता बनर्जी की तुष्टीकरण की विचार धारा है. 2011 में ममता बनर्जी ने परिवर्तन का नारा देकर बंगाल की सत्ता पर काबिज हुई थी. लेकिन सत्ता में आने के बाद ममता बनर्जी का अल्पसंख्यक समाज के प्रति झुकाव से प्रदेश का बहुंसख्यक समाज का बड़ा हिस्सा उनसे कटता चला गया. राजनीतिज्ञों की माने तो एनआरसी का विरोध करना भी ममता बनर्जी को महंगा पड़ा.

ममता बनर्जी और उनकी पार्टी द्वारा खुलकर एनआरसी का विरोध करना और राज्य में मुसलमानों का समर्थन करने की बात से भी  पार्टी की छवि पर नकारात्मक  प्रभाव पड़ा.लोकसभा चुनाव में बीजेपी इन्हीं मुद्दों को हथियार बना कर राज्य की 42 में से 18 संसदीय क्षेत्र पर कब्जा करने में सफल हो गयी.अब अपनी हिंदूवादी छवि के साथ इन्ही मूद्दों को हथियार बना कर राज्य की सत्ता तक पहुंचने की कोशिश में जुट गयी है.

वहीं कुछ लोगों का यह भी कहना का कि केवल ‘जय श्री राम' और ‘जय महाकाली' के नारों के जरिये बंगाल की सत्ता तक पहुंच पाना बीजेपी के लिए आसान नहीं होगा है.  प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने के लिए बीजेपी को जमीनी सत्तर की राजनीति करनी होगी. विकास और प्रदेश में बंद पड़े मिल कल-कारखानों से फैले बैरोजगारी को दूर करने को मुद्दा बनाये तो प्रदेश की जनता का विश्वास जीतने में सफलता मिलेगी.

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