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भारत:ओल्ड मैन वाला भाईजान का स्टाइल है सुपरहिट

By Republichindi desk | Publish Date: 6/6/2019 3:36:18 PM
भारत:ओल्ड मैन वाला भाईजान का स्टाइल है सुपरहिट

रिपब्लिक डेस्क : इमोशन से भरपूर भारत  में निर्देंशक अली अब्बास जफर और सलमान खान की जुगलबंदी हिट साबित हुई है. सुलतान और टाइगर जिंदा है जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद एक बार फिर से यह जोड़ी दिल जीतने में कामयाब होती दिख रही है. अली अब्बास जफर सलमान खान के साथ मिलकर इमोशन और पारिवारिक मूल्यों से सजी भारत लाए हैं. फिल्म बेशक थोड़ी लंबी और 80 के दशक के नुस्खों से बुनी हुई महसूस होती है, मगर भाईजान के चाहनेवाले नौजवानी से लेकर 70 साल के बूढ़े के रूप में उनकी हर अदा पर फिदा होंगे. हो भी क्यों ना भाईजान का स्टाइल है ही सबसे अलग.

फिल्म फ्लैशबैक से शुरू होती है, जहां 70 साल का भारत (सलमान खान) अपने खुशनुमा परिवार के साथ अपना अटूट बंधन बांधे हुए है. परिवार के साथ अपने जन्मदिन को मनाने के दौरान कहानी फ्लैशबैक में जाती है. यह 1947 के विभाजन की त्रासदी का दौर है और उस आग में भारत अपने स्टेशन मास्टर पिता (जैकी श्रॉफ) और बहन से बिछड़ चुका है, मगर बिछड़ने से पहले भारत ने अपने पिता को वचन दिया था कि जब तक उसके पिता वापस नहीं लौटते, वह अपनी मां (सोनाली कुलकर्णी)  अपनी छोटी बहन और छोटे भाई का खयाल रखेगा. उसके बाद 1947 से लेकर 2010 तक अपने परिवार की जरूरतों के लिए वह हर तरह के काम करता है. उसे नौकरी दिलाने वाली बोल्ड एंड ब्यूटीफुल मैडम सर जी (कटरीना कैफ) उससे प्यार का इजहार कर शादी की पेशकश करती है, मगर परिवार के फर्ज में बंधा भारत उसे जता देता है कि वह शादी नहीं कर सकता. भारत की जिंदगी के इस लंबे सफर में विलायती खान (सुनील ग्रोवर) बचपन से लेकर बुढ़ापे तक उसके सुख-दुख का साथी बनता है.


इसे निर्देशक अली अब्बास जफर की समझदारी कहनी होगी कि उन्होंने सालों से बनी हुई भाई की परिवार प्रेमी और हीरोइक इमेज के साथ छेड़-छाड़ करने की कोशिश नहीं की. फिल्म कुछ हिस्सों में बहुत ज्यादा मजेदार है, मगर कई चरित्र और ट्रैक्स होने के कारण बीच-बीच में अपनी पकड़ खो देती है. फिल्म में वर्तमान और अतीत के कई टाइम लीप हैं, जो कहानी के प्रवाह को रोकते हैं, इसके बावजूद इमोशंस की पकड़ छूटने नहीं पाती. फिल्म की लंबाई कम होती तो अच्छा था, मगर जाहिर है 65-70 साल के लंबे दौर को दिखाने के लिए निर्देशक को इतना समय लेना पड़ा है. एडिटिंग और शार्प और कसी हुई हो सकती थी. मार्सिन लास्काविस की सिनेमटोग्राफी कमाल की है.

ये तो सभी जानते हैं कि सलमान अपने परिवार से बहुत प्यार करते हैं और उनकी निजी जिंदगी का यह पहलू परदे पर उन्हें भारत के किरदार को पुख्ता करने में बहुत ही मददगार साबित हुआ है. 20 साल के युवा से लेकर 70 साल के बूढ़े के रूप में वे किरदार के हर रंग को जी गए हैं, हां 70 साल के बुजुर्ग के रूप में उनका बॉडी लैंग्वेज उतना ढीला-ढाला नहीं है, मगर भाईजान की इस अदा को स्टाइल समझकर नजरअंदाज किया जा सकता है. सलमान ने इमोशन, कॉमिडी और हलके-फुलके एक्शन से अपने किरदार को दर्शनीय बनाया है. मैडम सर जी के रूप में कटरीना की परफॉर्मेंस काबिले तारिफ है. वे जितनी खूबसूरत लगी हैं, उतना ही उन्होंने अपने रोल को विश्वसनीय बनाया है.

अभिनय के मामले में विलायती के रूप में सुनील ग्रोवर की जितनी भी तारीफ की जाये कम है. सुनील ने जता दिया कि वे हर तरह के इमोशंस को खेलने में माहिर हैं. पर्दें पर उनकी और सलमान की केमेस्ट्री फिल्म का प्लस प्वाइंट है. अन्य किरदारों में सोनाली कुलकर्णी, जैकी श्रॉफ, सतीश कौशिक, आसिफ शेख का अभिनय याद रह जाता है. कुमुद मिश्रा, दिशा पाटनी और शशांक अरोड़ा को वेस्ट कर दिया गया है. क्लाइमेक्स में तब्बू की एंट्री दमदार है.

विशाल-शेखर के संगीत में फिल्म का गाना स्लो मोशन रेडियो मिर्ची के टॉप ट्वेंटी चार्ट में नंबर वन के पायदान पर है. इसी फिल्म का गाना चाशनी नंबर आठ पर अपनी जगह बनाने में कामयाब रहा है. आईएमडीबी पर फिल्म की रेटिंग 7.1 है.
निर्देंशक : अली अब्बास जफर कलाकार : सलमान खान, कटरीना कैफ, सुनील ग्रोवर, जैकी श्रॉफ, सोनाली कुलकर्णी, दिशा पाटनी, कुमुद मिश्रा, सतीश कौशिक,शशांक अरोड़ा. 
 

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