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किनारे बैठकर ताली नहीं बजाते मोदी सरकार की आलोचना करनेवाले बजाज

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 12/2/2019 2:03:29 PM
किनारे बैठकर ताली नहीं बजाते मोदी सरकार की आलोचना करनेवाले बजाज

रिपब्लिक हिंदी डेस्क: ऐसे समय में जब केंद्र सरकार के खिलाफ ट्वीट करने पर भी लोग ट्रोलरों के शिकार हो जाते हैं. एक उद्योगपति ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की उपस्थिति में सरकार की असहिष्णुता पर सवाल खड़ा कर साबित कर दिया है कि वह किनारे बैठ कर ताली बजानेवालों में से नहीं है बल्कि गहरे पानी पैठ कर आवाज उठानेवाले व्यक्ति हैं. यह उद्योगपति कोई और नहीं बल्कि राहुल बजाज हैं. उनके बेटे और बजाज ऑटो के एमडी राजीव बजाज ने उनके बारे में ये बातें कहीं.

नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना वाले बयान पर बजाज ऑटो के एमडी राजीव बजाज ने कहा कि उद्योगपति राहुल बजाज का बयान 'असाधारण और साहसिक' है. इंडस्ट्री में कोई भी उनके पिता के साथ नहीं खड़ा होना चाहता, बल्कि वे अपनी 'सुविधा के मुताबिक किनारे बैठकर ताली बजाते हैं. 

गौरतलब है कि शनिवार को एक अखबार के कार्यक्रम में राहुल बजाज ने गृह मंत्री अमित शाह से कहा था कि जब यूपीए सरकार सत्ता में थी, तो हम किसी की भी आलोचना कर सकते थे. अब हम अगर बीजेपी सरकार की खुले तौर पर आलोचना करें तो इतना विश्वास नहीं है कि आप इसे पसंद करेंगे.

उन्होंने कहा था कि कारोबारियों में 'डर का माहौल' है. उनके इस बयान के बाद से लगातार सियासी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. कांग्रेस जहां उनके समर्थन में उतर आई है, वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजाज के बयान को राष्ट्रहित पर चोट बताया है. उद्योगपति राहुल बजाज को जवाब देते हुए निर्मला सीतारमण ने लिखा कि अपनी धारणा फैलाने की जगह जवाब पाने के और भी बेहतर तरीके हैं. ऐसी बातों से राष्ट्रीय हित पर चोट लग सकती है.

असम के मंत्री हेमंत विश्वशर्मा ने भी इस पर ट्वीट किया है.

वहीं, राहुल बजाज की बातों का गृह मंत्री अमित शाह ने उसी मंच से जवाब दिया. अमित शाह ने कहा कि इस बात को खारिज किया कि देश में डर का मौहाल है. उन्होंने कहा, 'किसी को किसी के बारे में डरने की जरूरत नहीं है, मीडिया में नरेंद्र मोदी सरकार की लगातार आलोचना हो रही है, लेकिन यदि आप कह रहे हैं कि इस तरह का मौहाल पैदा हो गया है तो इसे ठीक करने के लिए हमें काम करने की जरूरत है.'

इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के अनुसार राजीव बजाज ने कहा कि सच कितना भी कड़वा क्यों न हो, उनके पिता कभी भी बोलने से हिचकते नहीं हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह इसे लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि ऐसे मंच पर उनके पिता को इस तरह का संवेदनशील मसला उठाना चाहिए था या नहीं.

राजीव ने कहा कि राहुल बजाज के लिए कोई दरबार ऐसे ही है, जैसे किसी बैल के लिए लाल कालीन. वह ऐसे मौके को छोड़ते नहीं, हालांकि व्यक्तिगत रूप से मैं इसे लेकर आश्वस्त नहीं हूं कि कॉरपोरेट एक्सीलेंस को सेलिब्रेट कर रहे किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में ऐसे संवेदनशील विषय का उठाना चाहिए या नहीं.'
राहुल बजाज ने कहा था कि वह सरकार के मंत्रियों या वरिष्ठ अधिकारियों से ज्यादा बातचीत नहीं करते. इसके पहले फरवरी 2017 में राहुल बजाज ने मोदी सरकार की नोटबंदी की आलोचना की थी जिसके बाद बजाज खुद विरोधि‍यों के निशाने पर आ गए थे.
 

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