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बिहार में चमकी बुखार का कहर, 60 मरे, जानिये इसके लक्षण

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 6/12/2019 4:38:58 PM
बिहार में चमकी बुखार का कहर, 60 मरे, जानिये इसके लक्षण

रिपब्लिक डेस्क: उत्तर बिहार में बीते 11 दिनों में चमकी बुखार, जापानी इंसेफलाइटिस, दिमागी बुखार, एईएस या एक्टूड इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम नामक बीमारी से  मरने वालों की संख्या 60 हो गई है. वहीं, नए भर्ती बच्चों को मिलकर 154 बच्चे इस बीमारी से पीड़ित पाये गये हैं. पीड़ितों व मौत की बढ़ रही संख्या के मद्देनजर पटना मुख्यालय में उच्चस्तरीय बैठक कर समाधान खोजा रहा है. इस बीमारी के बारे में तरह-तरह की अफवाहें भी फैल रही हैं. ऐसे में इस बीमारी के बारे में जानना और इसके लक्षण पहचानना जरूरी है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग के निदेशक प्रमुख डॉ. आरडी रंजन, राज्य वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल अधिकारी डॉ. एमपी शर्मा व राज्य जेई-एईएस के नोडल समन्वयक संजय कुमार ने एसकेएमसीएच पहुंच पूरी स्थिति का जायजा लिये. मुजफ्फरपुर जिले में पिछले एक महीने में चमकी बुखार से करीब 48 मासूमों की जान जा चुकी है. रोगियों से हॉस्पिटल के पीआईसीयू यूनिट वार्ड फुल हैं. चमकी बुखार/ जापानी इंसेफलाइटिस (दिमागी बुखार) या एईएस (एक्टूड इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है.

बिहार में फैली है ये बीमारी

डॉक्टरों के मुताबिक़, उत्तरी बिहार के सीतामढ़ी, शिवहर, मोतिहारी और वैशाली के कई इलाकों में इस समय इस बीमारी का कहर देखने को मिल रहा है. इस सिलसिले में बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने कहा है कि दिमागी बुखार की वजह से इतने ज्यादा बच्चों की मौत एक गंभीर विषय है. इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के सचिव भी इस पर कड़ी निगरानी बनाए हुए हैं. उनके मुताबिक, सभी चिकित्सकों को इस मामले में अलर्ट रहने के आदेश जारी किए जा चुके हैं.

चमकी बुखार के लक्षण

जापानी इंसेफलाइटिस (दिमागी बुखार) या एईएस (एक्टूड इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) को बिहार के कई क्षेत्रों में चमकी बुखार कहा जाता है. इससे पीड़ित मरीजों को काफी तेज दर्द के साथ शरीर ऐंठने लगता है और तेज बुखार आता है. कई बार तो बुखार इतना तेज होता है कि बच्चे बेहोश तक हो जाते हैं. इससे पीड़ित मरीजों को कई बार उल्टी होती है और उनके स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाता है. लेकिन अगर इलाज में देर होने पर बीमारी बढ़ जाए तो मरीज में निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते हैं.
- इसमें रोगी का दिमाग काम करना बंद कर देता है और वो भ्रम का शिकार भी हो जाता है.
- चिड़चिड़ेपन के कारण कई बार दिमागी संतुलन बिगड़ जाता है.
- ज्यादा बीमारी बढ़ने पर कई अंग काम करना बंद कर देते हैं और शरीर को लकवा मार जाता है.
- इस बीमारी से पीड़ित लोगों को सुनने और बोलने में भी तकलीफ होने लगती है.
- कई बार मरीज गश खाकर बेहोश होकर गिर भी पड़ता है.
 

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