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बीजेपी को रोकने के लिए विपक्ष की आखिरी रणनीति

By Republichindi desk | Publish Date: 5/8/2019 11:48:19 AM
बीजेपी को रोकने के लिए विपक्ष की आखिरी रणनीति

रिपब्लिक डेस्क. विपक्षी दलों को लग रहा है कि 23 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद बीजेपी सिंगल लार्जेस्ट पार्टी हो सकती है. ऐसे में खण्डित जनादेश मिलने पर राष्ट्रपति सबसे बड़े दल यानी सिंगल लार्जेस्ट पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं. इसे रोकने के लिए विपक्ष ने एक रणनीति तय की है कि विपक्षी पार्टियां लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद राष्ट्रपति से मिलेगा और उन्हें इस बात के लिए राजी करने की कोशिश करेगा कि अगर खण्डित जनादेश मिलता है तो वे सबसे बड़े दल यानी सिंगल लार्जेस्ट पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित न करें.

राष्ट्रपति से मिलकर विपक्ष एक साझा समर्थन पत्र सौंपेगा. 1996 के फॉर्मूले से देश को नया प्रधानमंत्री देने की कोशिश हो रही है. तेलंगाना के सीएम केसीआर यह रणनीति बना रहे हैं. केंद्र में बीजेपी की सरकार का विरोध कर रहे 21 राजनीतिक दल एक समर्थन पत्र पर हस्ताक्षर करने की योजना बना रहे हैं. उनका कहना है कि लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद वे वैकल्पिक सरकार के गठन के लिए राष्ट्रपति को विपक्षी पार्टियों के समर्थन की पत्र देने को तैयार रहेंगे. दरअसल, इस असामान्य कदम का कारण यह सुनिश्चित करना है, ताकि राष्ट्रपति चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी किसी पार्टी को को क्षेत्रीय दलों और गठबंधन को तोड़ने या तोड़ने का प्रयास करने का मौका न दें. यह कदम क्षेत्रीय दलों में फूट पड़ने से रोकने के लिए है.

1998 में तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायण ने सरकार बनाने से पहले और सदन में विश्वास मत हासिल करने से पहले अटल बिहारी वाजपेयी को समर्थन पत्र प्रस्तुत करने के लिए कहा था. उस वक्त बीजेपी ने 178 सीटें जीतीं थीं और गठबंधन के पास 252 सदस्य थे. बाहरी समर्थन से किसी तरह अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बन गई थी, मगर 13 महीने बाद सरकार गिर गई, जब वह एक मत से विश्वास मत हार गई. बहरहाल, पिछले पांच वर्षों में मणिपुर, गोवा जैसे राज्यों में सरकार गठन पर बहुत विवाद हुआ है और हाल ही में कर्नाटक में ऐसा नजारा देखने को मिला था. कर्नाटक में बीजेपी ने तब विरोध किया था, जब चुनाव के बाद कांग्रेस ने एचडी कुमारस्वामी की जनता दल सेक्युलर के साथ गठबंधन किया था. अंतिम समय तक राज्य बीजेपी प्रमुख बीएस येदियुरप्पा ने जोर देकर कहा था कि उनकी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाना चाहिए और यह विधानसभा के फर्श पर बहुमत साबित करेगी. मगर बाद में बीजेपी द्वारा विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों के बीच पहल को रोक दिया गया.

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