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यूपी व बिहार से प्रधानमंत्री के नए दावेदारों से सियासत गरमाई

By Republichindi desk | Publish Date: 5/10/2019 1:02:05 PM
यूपी व बिहार से प्रधानमंत्री के नए दावेदारों से सियासत गरमाई

रिपब्लिक डेस्क. ज्यों ज्यों मतगणना की तिथि 23 मई नजदीक आ रही है त्यों त्यों सरकार गठन को लेकर बेचैनी देखने को मिल रही है. सत्ता पक्ष यानी एनडीए के सहयोगी दल जदयू के महासचिव का बयान ने एनडीए में खलबली मचा दिया है. वहीं दूसरी तरफ सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव द्वारा मायावती को प्रधानमंत्री पद के लिए नाम लिए जाने के बाद, अन्य विपक्षी दल के नेता सकते में हैं. ऐसे में पूरी संभावना है कि यह सियासी तापमान 23 मई तक बना रहेगा.

जदयू के राष्ट्रीय महासचिव गुलाम रसूल बलियावी ने यह कहकर बिहार में राजनीति गरमा दी है कि एनडीए को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने जा रहा. नीतीश कुमार को पीएम चेहरा बनाने पर ही एनडीए की केन्द्र में सरकार बनेगी. उनके इस बयान के बाद बीजेपी ने उन्हें आड़े हाथों लिया है. वहीं विपक्षी दल हम ने भी इसको लेकर जदयू-बीजेपी पर निशाना साधा है. हालांकि प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने सफाई देते हुए कहा कि जदयू नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने के लिए चुनाव लड़ रहा है. गौरतलब है कि जदयू के राष्ट्रीय महासचिव गुलाम रसूल बलियावी ने पटना में एक निजी चैनल से बातचीत में कहा कि देश में एनडीए को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने जा रहा. नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री चेहरा बनाने पर ही एनडीए की केन्द्र में सरकार बनेगी.

यूपी से भी प्रधानमंत्री पद के लिए बिसात बिछाए जाने का सिलसिला जोर पकड़ने लगा है. बसपा प्रमुख मायावती को आगे करने की रणनीति बनाई जाने लगी है. सपा-बसपा गठबंधन इसके लिए पूरी जोर-आजमाइश में जुटा है. गठबंधन के नेताओं के बयानों से साफ है कि उन्हें भरोसा हो चला है कि नतीजों के बाद वह ताकतवर गठजोड़ के रूप में उभर सकते हैं. अखिलेश यादव ने अब सपा-बसपा गठबंधन के राज खोलते हुए इच्छा जाहिर की है कि वह मायावती को प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते हैं. दोनों दलों में इस मुद्दे पर सहमति भी है. हाल के सियासी बयानों और कुछ फैसलों पर नजर डालें तो प्रधानमंत्री पद को लेकर सियासी कवायद साफ नजर आने लगी है. मायावती ने भी अंबेडकरनगर में हुई चुनावी सभा में यह बयान देकर सभी को चौंका दिया था कि वह अंबेडकरनगर से उपचुनाव भी लड़ सकती हैं. उनका यह इशारा चुनाव के बाद होने वाले घटनाक्रम पर था. बहरहाल, एक और रणनीतिक कदम उठाते हुए मायावती ने रायबरेली और अमेठी में बसपा समर्थकों से कांग्रेस को वोट करने की घोषणा कर दी. इसे भी चुनाव बाद कांग्रेस से तालमेल की राह साफ करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है.

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