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पूजा स्पेशल: बढ़ गयी है एशिया के सबसे बड़े रेडलाइट एरिया सोनागाछी की रौनक

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 10/6/2019 12:09:27 PM
पूजा स्पेशल: बढ़ गयी है एशिया के सबसे बड़े रेडलाइट एरिया सोनागाछी की रौनक

रिपब्लिक हिंदी डेस्क: सोनागाछी भारत ही नहीं, एशिया का सबसे बड़ा रेडलाइट एरिया है. सोनागाछी के तहत रामबगान, सेठबगान, अविनाश कविराज स्ट्रीट और रवींद्र सरणी का एक हिस्सा आता है. दुर्गा पूजा में सोनागाछी की रौनक बढ़ जाती है. सोनागाछी में हजारों यौनकर्मी हैं. इनको कर्मी कहना ही उचित है क्योंकि ये शौकिया यह काम नहीं करतीं. पैसे के लिए, पेट पालने के लिए और अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पेट के निचले हिस्से को परोसतीं हैं. उत्तर कोलकाता के अविनाश कविराज स्ट्रीट से लेकर सीआर एवेंयू तक आसपास के हर कॉर्नर पर शाम होते ही सजी-धजी होंठों पर लिपिस्टिक के साथ सेक्सी मुस्कान लपेटे किशोर उम्र से लेकर यौनावस्था की ढलान तक पहुंच चुकीं महिलाएं, लड़कियां, किशोरी और युवतियां नुमाया होने और नुमाया करने लगती हैं.

यहां के बारे में तरह-तरह की सुनी-सुनायी बातें लोगों तक पहुंचती है. सच्चाई को सेक्स और सौन्दर्य के झूठ की चासनी में लपेट कर जो बातें लोगों तक पहुंचती है, उनमें यथार्थ एक फीसदी ही होता है. सेक्स वर्करों के लिए कार्यरत दुर्बार महिला समन्वय समिति के पदाधिकारी भी जो बातें पत्रकारों को बताते हैं, वहीं मीडिया में प्रकाशित होती हैं. गूगल सर्च में भी जो खबरे सोनागाछी की आपको मिलेंगी वह सफेद झूठ के अलावा कुछ भी नहीं. ऐसे में सोनागाछी के तिलस्म को समझने के लिए वहां के अनुभवी सेक्स वर्करों और बाबुओं (सेक्स वर्कर के संरक्षक) से मिली जानकारी ही ऑथेंटिक है. 

कमरों में मेकअप करती महिलाएं, गलियों में खेलते हुए बच्चे और कमरों में इंतजार करती औरतें, सोनागाछी की गलियों का आम नजारा है. यहां कई बहुमंजिली इमारतों में भी वेश्यालय हैं. कितनी यौनकर्मी यहां हैं. इसे लेकर भी अलग-अलग दावे किये जाते हैं. फिर भी कोलकाता के सोनागाछी में सात हजार सेक्स वर्कर हैं, ऐसा सेक्स वर्करों के संगठन दुर्बार महिला समन्वय समिति का मानना है. यहां दुर्गा पूजा का आयोजन भी किया जाता है. इस समय सोनागाछी भी दुर्गोत्सव के रंग में रंगा हुआ है. चलताऊ जुबान में लोग सेक्स वर्कर को जिंदा ठाकुर भी कहने से परहेज नहीं करते. इस दौरान दूसरे राज्यों से पूजा भ्रमण करने आये लोग भी एक बार इस इलाके को देखने का लोभ संवरण नहीं कर पाते. इलाके के एक बाबू ने बताया कि पूजा के दौरान यहां व्यस्तता बढ़ जाती है. कारोबार भी बढ़ जाता है. साथ ही खतरे भी बढ़ जाते हैं. कई क्रिमिनल प्रवृत्ति के लोग भी आते हैं, अतः पैनी नजर रखनी पड़ती है.

सेक्स वर्कर की पूजा

यहां की सेक्स वर्कर भी दुर्गा की आराधना करती हैं. दुर्बार महिला समन्वय समिति के तत्वावधान में दुर्बार दुर्गोत्सव कमेटी सात वर्षों से सोनागाछी के मस्जिद बाड़ी स्ट्रीट में दुर्गापूजा का आयोजन कर रही है, जिसमें यहां की 7,000 सेक्स वर्कर शामिल होती हैं. दुर्गापूजा के आयोजन से लेकर विसर्जन तक की सारी जिम्मेदारियां सेक्स वर्कर ही संभालती हैं. पूजा कमेटी में भी 25 सेक्स वर्कर शामिल हैं. पूजा कमेटी की संयोजक बिशाखा लश्कर ने बताया कि पूजा पंडाल का उद्घाटन भी सोनागाछी की एक सेक्स वर्कर के हाथों हुआ. पूजा के दिनों में शंखनाद व धुनुची नृत्य प्रतियोगिताओं के अलावा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है. 

सोशल मीडिया का असर

इलाके के एक ब्रोकर ने बताया कि सोशल मीडिया के युग में यहां भी परिवर्तन आया है. अब व्हाट्सअप पर लड़कियों के फोटो दिखाकर भी ग्राहकों को सेट किया जाता है. कॉलेज गर्ल से लेकर इंग्लिश स्पीकिंग लड़कियां भी यहां पर उपलब्ध हैं. उनकी कीमत हाई है. ग्राहक देख कर पांच हजार से पचास हजार तक का रेट लिया जाता है. वैसी लड़कियां गलियों में खड़ी नहीं होतीं. गलियों में खड़ी होनेवाली से सड़क पर ही दाम तय कर लोग जाते हैं. ये भी पांच सौ से लेकर हजारों रुपये तक लेती हैं.

नियामक बोर्ड की निगरानी

दुर्बार समिति के लोग सोनागाछी समेत पश्चिम बंगाल के विभिन्न रेडलाइट एरिया में लाई जाने वाली लड़कियों पर नजर भी रखते हैं. ये काम भी यौनकर्मी ही करती हैं. दुरबार महिला समन्वय समिति के तत्वावधान में नियामक बोर्ड गठित किए गए हैं. दुरबार की पदाधिकारी काजल बोस ने बताया कि बंगाल के 30 से अधिक रेडलाइट एरिया में ऐसे बोर्ड गठित किए जा चुके हैं. बोर्ड का काम पेशे में आने वाली लड़कियों के बारे में पता लगाना है कि वे अपनी मर्जी से इस पेशे से जुड़ रही हैं या उन्हें जबरन धकेला जा रहा है. उनकी उम्र की भी जांच की जाती है. इस बाबत हड्डियों का एक्स-रे कराया जाता है. जिन्हें झांसा देकर या अन्य तरीकों से लाया गया है, उन्हें उत्तर कोलकाता के बीडन स्ट्रीट के पास स्थित दुरबार के होम में लाकर रखा जाता है. फिर वापस उनके घर भेजने की व्यवस्था की जाती है.

हालांकि ये सब कहने भर की बातें हैं, सच्चाई तो यह है कि आजकल यहां टीनएजर लड़कियां भी परोसी जाती हैं. समिति की ओर से अपनी मर्जी से इस पेशे से जुड़ी महिलाओं को इस पेशे की बारीकियों के बारे में समझाया जाता है. यौन रोगों से प्रतिरोध, सेफ सेक्स, कम कष्ट झेलकर ग्राहक को संतुष्ट करने के तरीके के बारे में भी बताया जाता है.
 

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