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40 लोगों की जान बचायी फिर भी गयी जेल, लाखों जुर्माना भी, मदद में उठे हजारों हाथ

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 7/2/2019 5:50:27 PM
40 लोगों की जान बचायी फिर भी गयी जेल, लाखों जुर्माना भी, मदद में उठे हजारों हाथ

रिपब्लिक डेस्क: एक लड़की ने 40 लोगों की जान बचायी, फिर भी वह जेल में बंद है. उस पर लाखों रुपये का जुर्माना लगाया गया है. हालांकि उसकी मदद के लिए हजारों लोग आवाज उठा रहे हैं और उसकी सहायता के लिए दस करोड़ रुपये संग्रह कर लिये हैं. यह मामला जर्मनी और इटली के सीमावर्ती इलाके का है. जर्मनी की करोला राकेटे(31) जेल में बंद हैं. उसने समुद्र में 40 अप्रवासियों की जान बचाने का अपराध किया है. वे इटली में प्रवेश करना चाहते थे.

करोला का जहाज जब्त कर लिया गया है और इस पर 50 हजार यूरो (लगभग 40 लाख रुपये) का जुर्माना लगाया जा सकता है. गृह मंत्रालय का कहना है कि सी वॉच एनजीओ के जहाज सी वॉच 3 पर आए 41 प्रवासियों को खाना खिलाया गया. उन्हें आराम से रात बिताने दी गई. इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि बिना अनुमति के फिर एनजीओ को डॉक करने की जरूरत क्यों पड़ी.

सीवॉच की प्रवक्ता जॉर्जिया लिनार्डी ने कहा कि करोला को लगा कि वो अब जहाज पर आप्रवासियों को ज्यादा देर नहीं रोक सकती क्योंकि उन्होंने आत्महत्या की धमकी दी थी. इस वजह से क्रू उन पर लगातार नजर रख रहा था. उस जहाज पर सवार रहे 21 वर्षीय इसाक का कहना है कि वो सीवॉच के शु्क्रगुजार हैं. अगर वो नहीं होते तो मैं अब तक मर चुका होता.

करोला के ऊपर मानव तस्करों की मदद करने के आरोप के तहत भी जांच चल रही है. इस मामले के सामने आने के बाद इटली, फ्रांस और जर्मनी के बीच में तनाव की स्थिति बनी है. इटली की सत्ताधारी दक्षिणपंथी दा लीगा पार्टी के नेता साल्विनी ने आप्रवासियों के लिए इटली के रास्तों को बंद करने का फैसला किया है. उन्होंने दूसरे यूरोपीय देशों पर समुद्री रास्ते से आ रहे लोगों से निपटने में इटली को अकेला छोड़ देने का आरोप लगाया. साथ ही उन्होंने करोला के काम को एक आपराधिक कृत्य और एक्ट ऑफ वॉर बताया.

साल्विनी ने कहा कि वो जर्मनी के राष्ट्रपति से अपील करते हैं कि वो अपने देश के मामलों की चिंता करें. साथ ही अगर संभव हो तो अपने नागरिकों से कहें कि वो इटली में आकर नियमों का उल्लंघन ना करें. जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रांक वाल्टर स्टाइनमायर ने कहा था कि लोगों की जान बचाने वाले किसी व्यक्ति को अपराधी नहीं माना जा सकता है.

यह है घटनाक्रम

जर्मनी के एक एनजीओ के लिए काम कर रहीं करोला जहाज चलाना जानती हैं. वो एनजीओ का जहाज लेकर अफ्रीकी शरणार्थियों के समूह को बचाने पहुंची. इसी कोशिश में करीब दो हफ्ते पानी में रहने के बाद वह इटली की जलसीमा में प्रवेश कर गईं. उनके जहाज को रोकने के लिए इटली की पुलिस ने जहाज का पीछा किया लेकिन करोला जहाज को लेकर आगे बढ़ती रहीं. पुलिस के मुताबिक करोला ने जानबूझकर पुलिस की गश्ती नाव को टक्कर मारने की कोशिश की. इसके लिए उन्हें गिरफ्तार किया गया. वो इटली के लाम्पेदूसा पोर्ट पर बिना इजाजत के पहुंच गई थीं.

करोला की गिरफ्तारी पर छिड़ी बहस

करोला की गिरफ्तारी के बाद जर्मनी और इटली के बीच बहस छिड़ गई है. करोला के ऊपर 50 हजार यूरो का जुर्माना लगाए जाने के आसार हैं. इसके लिए उनके नाम पर जर्मनी में चंदा इकट्ठा किया जा रहा है. कुल मिलाकर अब तक 12 लाख यूरो यानी करीब 10 करोड़ रुपये का चंदा करोला की मदद के लिए जमा किया जा चुका है. करोला ने लीबिया के तट से 53 आप्रवासियों की जान बचाई थी. 13 लोगों को खराब स्वास्थ्य के आधार पर इटली ने अपने देश में आने की इजाजत दे दी लेकिन बाकी लोगों की जान बचाने के लिए करोला दो हफ्ते तक पानी में रही.

क्या कहना है करोला के वकील का

इटली ने समुद्र के रास्ते शरणार्थियों के अपने देश में आने पर प्रतिबंध लगा दिया है. ऐसे में बहुत सारे शरणार्थी इटली की जलसीमा वाले समुद्र में फंसे हुए हैं. करोला के वकील का कहना है कि उन्होंने पुलिस की नाव को देखते ही जहाज का इंजन बंद कर दिया. जिससे उनका जहाज सी वॉच 3 पुलिस की गश्ती नाव से नहीं टकराया. जहाज और नाव के बीच दूरी काफी कम रह गई थी. करोला के वकील का कहना है कि करोला को इस बात का बहुत दुख है कि उनकी वजह से पुलिसकर्मियों के लिए खतरनाक स्थिति बनी. वह इसके लिए क्षमाप्रार्थी हैं.
 

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