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मोदी-शाह को क्लीन चिट का विरोध पड़ा महंगा, चुनाव आयुक्त लवासा पर कसा शिकंजा

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 11/5/2019 12:28:14 PM
मोदी-शाह को क्लीन चिट का विरोध पड़ा महंगा, चुनाव आयुक्त लवासा पर कसा शिकंजा

रिपब्लिक हिंदी डेस्क: सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के 11 कंपनियों में इस बात की जांच करा रही है कि बिजली मंत्रालय में अपनी तैनाती के दौरान चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने अपने पद का दुरुपयोग कर कुछ कंपनियों को फायदा तो नहीं पहुंचाया. सरकार ने चुनाव आयुक्त अशोक लवासा पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. पत्नी और बहन को भेजे गए आयकर नोटिस के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है.

सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की 11 कंपनियों से यह पता लगाने को कहा है कि बिजली मंत्रालय में तैनाती के दौरान लवासा ने पद का दुरुपयोग तो नहीं किया था. अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक यह गोपनीय पत्र 29 अगस्त को लिखा गया है. बिजली सचिव की इजाजत से सार्वजनिक क्षेत्र की इन कंपनियों के मुख्य सतर्कता अधिकारियों (सीवीओ) को यह पत्र लिखा गया है.

गौरतलब है कि चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने 4 मई को मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को लिखी एक चिट्ठी लिखी थी, जिसमें उन्होंने लिखा था कि उन्हें फुल कमीशन की बैठक से दूर रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है क्योंकि अल्पमत के फ़ैसले रिकॉर्ड नहीं किए जा रहे हैं. सरकार के पत्र में लिखा गया है कि आरोप है कि आईएएस अधिकारी अशोक लवासा ने सितंबर 2009 से दिसंबर 2013 तक बिजली मंत्रालय में संयुक्त सचिव, अतिरिक्त सचिव और विशेष सचिव के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान कुछ कंपनियों या उनकी सहयोगी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया.

अपने पत्र के साथ बिजली मंत्रालय ने ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में काम कर रही 14 कंपनियों की एक सूची दी है. इन कपंनियों में लवासा की पत्नी नॉवेल लवासा निदेशक के रूप में काम कर रही थीं. इसके अलावा पत्र के साथ ए2जेड ग्रुप की 135 परियोनाओं की एक सूची भी दी गई है. इन्हें सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और राज्य सरकारों से फायदा हुआ. इसमें नॉवेल लवासा को किए गए 45.8 लाख रुपये के भुगतान का भी विवरण दिया गया है.

इस पत्र के साथ उन 13 बड़ी परियोजनाओं का भी जिक्र है, जिन्हें विभिन्न राज्य सरकारों ने ए2जेड वेस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड को 2009 से 2011 के बीच दिया. इस दौरान अशोक लवासा बिजली मंत्रालय में तैनात थे.सभी सीवीओ से कहा गया है कि वो अपने रिकॉर्ड की पड़ताल कर यह पता लगाएं कि अशोक लवासा ने इन कंपनियों या उनकी सहयोगी कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए अपने पद का फायदा तो नहीं उठाया. सीवीओ को यह भी पता लगाने के लिए कहा गया है कि क्या इन कपंनियों या उनकी सहयोगी कंपनियों को ठेके दिलवाने या उनके हक में फैसले करवाने में लवासा ने अपने पद का दुरुपयोग तो नहीं किया. यह भी पता लगाने के लिए कहा गया है कि लवासा ने इन कंपनियों को आपूर्ति का ठेका दिलवानों या व्यावसायिक आर्डर दिलवाने में मदद तो नहीं की.

सार्वजनिक क्षेत्र की जिन कंपनियों को यह पत्र मिला है, उनमें एनटीपीसी, एनएचपीसी, आरईसी और पीएफसी के नाम शामिल हैं. इस पत्र के सवाल पर चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने 'इंडियन एक्सप्रेस' से कहा, ' मुझे इस बारे में कुछ नहीं कहना है और इसके बारे में मैं कुछ नहीं जानता हूं.' लोकसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता के उल्लंघन के पांच मामलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को क्लीन चिट दिए जाने पर लवासा ने आपत्ति जताई थी. लवासा ने बाद में चुनाव आचार संहिता पर हुई आयोग की बैठकों से खुद को अलग कर लिया था.

चुनाव आयोग के तीन आयुक्तों में लवासा वरिष्ठता के मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा के बाद दूसरे नंबर पर हैं. इस साल सितंबर में आयकर विभाग ने लवासा परिवार के तीन सदस्यों को नोटिस भेजकर कुछ सफाई मांगी थी. इनमें अशोक लवासा की पत्नी नॉवेल लवासा, उनके बेटे अबीर लवासा की कंपनी नौरिश ऑर्गेनिक और उनकी बहन शकुंतला लवासा के नाम शामिल हैं. इन मामलों की सुनवाई जारी है.
 

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