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सोनिया के करीबी और मोदी के पसंदीदा नेता बनेंगे कांग्रेस अध्यक्ष

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 7/3/2019 12:24:16 PM
सोनिया के करीबी और मोदी के पसंदीदा नेता बनेंगे कांग्रेस अध्यक्ष

रिपब्लिक डेस्क: दशकों से गांधी परिवार के विश्वस्त और पीएम नरेंद्र मोदी से मधुर संबंध रखनेवाले सुशील कुमार ‌शिंदे को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की संभावना प्रबल है. सोनिया गांधी के करीबियों में शुमार किए जाने वाले शिंदे यूपीए शासनकाल में कई अहम पदों पर रह चुके हैं. जब महाराष्ट्र में उनके और बिलासराव देशमुख के बीच मुख्यमंत्री बनने की होड़ शुरू हुई तो पार्टी ने उन्हें आंध्र प्रदेश का राज्यपाल बना दिया, लेकिन उन्होंने एक शब्द बोले बगैर यह पद ले लिया. इसके बाद उन्हें कांग्रेस की सरकार में केंद्र प्रमुख पदों पर बुलाया गया. शिंदे को कभी अति महत्वकांक्षी होते नहीं देखा गया. उनको लेकर यह आम धारणा है कि उन्होंने पार्टी के निर्देशों के ऊपर जाकर कभी अपनी महत्कांक्षाओं को हावी नहीं होने दिया. 

यूपीए 2 की सरकार में जब सुशील कुमार शिंदे केंद्रीय गृहमंत्री थे, तब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे. पीएम नरेंद्र मोदी से भी उनके रिश्ते बेहद मधुर हैं. उस वक्त कई बार पीएम मोदी को सुशील कुमार शिंदे से बातचीत करने की जरूरत पड़ी. बताया जाता है कि उसी दौर में इन दोनों नेताओं के रिश्ते काफी अच्छे हो गए थे. इस बात का खुलासा खुद सुशील कुमार शिंदे ने किया था. उन्होंने कहा था कि बीजेपी उन पर उनके परिवार पर डोरे डाल रही है. असल में सुशील कुमार शिंदे की बेटी प्रणिती शिंदे महाराष्ट्र की सोलापुर सीट से विधायक हैं. सुशील शिंदे ने कहा था कि बीजेपी लंबे समय से प्रणिती शिंदे को बीजेपी में शामिल होने का ऑफर दे रही है. लेकिन अब बीजेपी मुझे भी यही ऑफर कर रही है. हालांकि बाद में बीजेपी नेता विनोद तावड़े ने इसे नकार दिया था.

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस आलाकमान और गांधी परिवार ने महाराष्ट्र से आने वाले दिग्गज नेता सुशील कुमार शिंदे के नाम पर मुहर लगा चुके हैं. इसके पीछे प्रमुख कारण आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव, दलित चेहरा, मुंबई से मिलने वाला पार्टी फंड और एनसीपी को फिर से कांग्रेस में विलय कराने की संभावनाओं को बताया जा रहा है. उन्हें राजनीति में लाने का श्रेय भी शरद पवार को जाता है.

अन्य प्रमुख नेताओं मसलन अशोक गहलोत, मल्लिकार्जुन खड़गे, गुलाम नबी आजाद, जनार्दन द्विवेदी, एके एंटनी को पार्टी अध्यक्ष ना बनाए जाने को लेकर भी ठोस कारण गिनाए जा रहे हैं. अशोक गहलोत को लेकर चर्चाएं सबसे ज्यादा हुईं, क्योंकि उन्होंने सोनिया-राहुल के सा‌थ कई राउंड की बैठकें कीं. लेकिन राहुल गांधी इस वक्त राजस्थान में कोई रिस्क नहीं चाहते हैं. क्योंकि राजस्थान में सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्ष बीजेपी के बीच बहुत ज्यादा अंतर नहीं है. ऐसे में अगर अनुभवी अशोक गहलोत वहां से निकल जाते हैं तो कांग्रेस के लिए खतरे बढ़ जाते हैं. राहुल गांधी ये नहीं चाहते हैं.

दूसरी ओर मल्लिकार्जुन खड़गे को लेकर यह चर्चाएं आम हो गई हैं कि उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष रहने के दौरान ही कई मौकों पर कांग्रेस आलाकमान से परामर्श किए बगैर फैसले ले लिए. यह पार्टी के लिए बड़ा संकट खड़ा कर देता है. इसी तरह गुलाम नबी आजाद को बीजेपी के आसान निशाना बनने और जनार्दन द्विवेदी के सक्रिय राजनीति से दूर रहने के चलते कांग्रेस अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी ना सौंपे जाने की खबरें तैर रही हैं.

सुशील कुमार ‌शिंदे के कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के आसार सबसे ज्यादा हैं. दशकों से वे गांधी परिवार के विश्वस्त बने हुए हैं. उन्हें राजनीति में लाने का श्रेय शरद पवार को जाता है. लेकिन बात जब कांग्रेस और अपने गुरु के बीच चुनने की आई, तो उन्होंने कांग्रेस को चुना. यही नहीं, जब वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के सबसे प्रबल दावेदार ‌थे उस वक्त उन्हें आंध्र प्रदेश का राज्यपाल बना दिया, लेकिन उन्होंने इसका रत्तीभर विरोध नहीं किया.
 

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