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सवर्ण आरक्षण मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

By Republichindi desk | Publish Date: 1/11/2019 11:54:42 AM
सवर्ण आरक्षण मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली: सवर्णों में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सरकार द्वारा 10 फीसदी आरक्षण देने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. एनजीओ द्वारा बिल पर आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. यूथ फॉर इक्वालिटी नाम के एनजीओ ने याचिका में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण की सीमा 50 फीसदी तय की गई है. उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से आरक्षण देना गलत है और ये सिर्फ सामान्य श्रेणी के लोगों को नहीं दिया जा सकता. एनजीओ ने याचिका में संशोधित बिल को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि ये संशोधन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है.

बता दें कि मोदी सरकार की ओर से देश भर के गरीब सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने वाला ऐतिहासिक विधेयक बुधवार को काफी जद्दोजहद के बाद राज्यसभा में पास हुआ . दोनों सदनों से इस बिल के पास होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे सामाजिक न्याय की जीत बताते हुए कहा कि यह देश की युवा शुक्ति को अपना कौशल दिखाने के लिए व्यापक मौका सुनिश्चित करेगा तथा देश में एक बड़ा बदलाव लाने में सहायक होगा. पीएम मोदी ने कई ट्वीट में लिखा कि खुशी है कि संविधान (124वां संशोधन) विधेयक पारित हो गया है जो सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा एवं रोजगार में 10 प्रतिशत आरक्षण मुहैया कराने के लिए संविधान में संशोधन करता है. मुझे देखकर प्रसन्नता हुई कि इसे इतना व्यापक समर्थन मिला.

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2011 में बिहार में हुआ था सवर्ण आयोग का गठन

गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण के फैसले को केंद्र की मोदी सरकार अपने कार्यकाल में किये जाने वाले कामों में सबसे बेहतर उपलब्धि मान रही है.वहीं राजद को छोड़कर ज्यादातर पार्टियां इस उपलब्धि को भुनाने में जुटी हैं. बीजेपी की सहयोगी जदयू तो दो कदम आगे बढ़कर खुद को सवर्ण आरक्षण का जनक ही घोषित करने में लगी है. बिहार में सवर्ण जातियों के शैक्षणिक व आर्थिक हालात का जायजा लेने के लिए 2011 में सवर्ण आयोग का गठन किया गया था.

सवर्ण आरक्षण के नाम पर लड़ा गया था 2010 का विधानसभा चुनाव

बता दें कि 2010 का विधानसभा चुनाव ही सवर्ण आरक्षण के नाम पर लड़ा गया था.लालू यादव ने सवर्ण आरक्षण का मुद्दा उठाया था तो बदले में नीतीश कुमार ने भी सुर में सुर मिला दिया. नीतीश दोबारा सत्ता में आए और 2011 में सवर्ण आयोग का गठन किया गया. 27 जनवरी 2011 को कैबिनेट ने सवर्ण आयोग बनाने को मंजूरी दे दी.इसके साथ ही सवर्ण आयोग बनाने वाला बिहार अकेला राज्य बन गया था.मंडल आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद से ही लगभग सभी पार्टियां ऊंची जाति के गरीबों की हिमायत करती रही हैं. वे कहती रही हैं कि ऊंची जाति में जो गरीब लोग हैं,उन्हें सरकारी योजनाओं का फायदा मिलना चाहिए.

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