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वायनाड से राहुल गांधी ने नामांकन भरा, किया रोड शो

By Republichindi desk | Publish Date: 4/4/2019 1:01:46 PM
वायनाड से राहुल गांधी ने नामांकन भरा, किया रोड शो

रिपब्लिक डेस्क : कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रियंका के साथ वायनाड में रोड शो किया. उन्होंने गुरुवार 4 अप्रैल को वायनाड से नामांकन भी दाखिल कर दिया. नामांकन करने के हुए रोड शो में हजारों लोग शामिल हुए. इस बीच कांग्रेस की सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के झंडे ने पार्टी के लिए नई मुश्किल खड़ी कर दी है. आईयूएमएल राज्य में यूडीएफ (यूनाइडेट डेमोक्रैटिक फ्रंट) की अगुआई कर रही कांग्रेस के बड़े सहयोगियों में से एक है.पार्टी के हरे झंडे को लेकर सोशल मीडिया पर बहुत चर्चा चल रही है.

कांग्रेस पार्टी के महासचिव केपीए मजीद ने कहा कि राहुल के वायनाड दौरे में ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है कि आईयूएमएल के झंडे या सिंबल से बचा जाए. उन्होंने कहा, पार्टी की स्थापना के पहले दिन से ही आईयूएमएल गर्व के साथ हरे झंडे का इस्तेमाल कर रही कांग्रेस पार्टी को उम्मीद है कि केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के ट्राइ जंक्शन पर बसे वायनाड से राहुल गांधी के चुनाव लड़ने से उसे तीनों ही राज्यों में फायदा होगा.

इससे पहले वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में केरल की 20 सीटों में से 16 सीटों पर कांग्रेस पार्टी ने जीत दर्ज की थी. कांग्रेस नेताओं के मुताबिक पार्टी की केरल इकाई की ओर से अनुरोध किए जाने के बाद राहुल गांधी ने वायनाड से चुनाव लड़ने का फैसला किया. राहुल गांधी ने बीजेपी के खिलाफ विपक्षी एकता को संकट में डालते हुए भी इस सीट से चुनाव लड़ने जा रहे हैं.

आपको बता दें वायनाड जिले की करीब 18 प्रतिशत आबादी अदिवासियों की है. लोकसभा सीट के तहत दो विधानसभा क्षेत्र सुल्तान बतेरी और मनानतवाडी आते हैं. वायनाड के जंगलों में रहने वाले आदिवासियों में से एक का कहना है, हमारे पास मकान या छप्पर नहीं है. कोई सड़क नहीं है, पीने का पानी नहीं है. हमें उनसे ज्यादा उम्मीद नहीं है.आदिवासी महिला का कहना है कि हाथियों से निपटना और उनके हमलों से बचना सबसे बड़ा मुद्दा है. उनका कहना है कि जंगलों के भीतर हमारे घरों में हाथियों के हमलों का डर हमेशा बना रहता है. इस बार हम वोट नहीं देंगे.इन चुनावों में हिस्सा लेने का कोई फायदा नहीं है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का कहना है कि उन्होंने केरल से भी चुनाव लड़ने का निर्णय इसलिए किया क्योंकि दक्षिण भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विद्वेष को महसूस कर रहा है. उनकी उम्मीदवारी एक संदेश देगी कि हम आपके साथ हैं, मैं आपके साथ हूं... यही संदेश है.




 

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