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मैंने मां और भैंस, दोनों का दूध पिया है: लालूप्रसाद

By Republichindi desk | Publish Date: 5/8/2019 2:57:23 PM
मैंने मां और भैंस, दोनों का दूध पिया है: लालूप्रसाद

रिपब्लिक डेस्क. बीजेपी की राजनीतिक सफलताओं का श्रेय कई बार अटल बिहारी वाजपेयी से ज्यादा लालकृष्ण आडवाणी को दिया जाता है. उसमें भी उनकी रथयात्रा को बीजेपी के कार्यकर्ता बड़े फख्र से याद करते हैं. लेकिन उतना ही याद किए जाते हैं उन्हें गिरफ्तार करने वाले लालू प्रसाद यादव. फिलहाल लालू प्रसाद यादव की आत्मकथा 'गोपालगंज टू रायसीना: माइ पॉलिटिकल जर्नी' चर्चा में है. इसमें लालू प्रसाद यादव ने कहा है कि उन्होंने आडवाणी की गिरफ्तारी में बाधा डालने वाले को गोली मारने का आदेश दिया था.

बिहार में आडवाणी को 23 अक्टूबर 1990 की सुबह ही गिरफ्तार कर लिया था. लालू अपनी आत्मकथा में लिखते हैं कि आडवाणी जी ने कहा था, ‘देखता हूं, कौन माई का दूध पिया है, जो मेरी रथयात्रा रोकेगा’. मैंने नहले पर दहला मारा, ‘मैंने मां और भैंस, दोनों का दूध पिया है. आइए बिहार में, बताता हूं' ऐसा बिहार में सांप्रदायिक सद्भाव का माहौल बनाए रखने के लिए किया गया था.

लालू लिखते हैं कि पिछली सरकारों की नाकामी से बिहार एक दंगाग्रस्त राज्य बन चुका था. आरएसएस-भाजपा के रामशिला पूजन के जुलूस की वजह से अक्टूबर, 1989 में भागलपुर में हुए दंगे में लगभग 1,500 लोगों की मौत हुई थी. रथयात्रा लालकृष्ण आडवाणी को 23 अक्टूबर 1990 को समस्तीपुर में जिस अफसर ने गिरफ्तार किया था, वह आरके सिंह अभी बीजेपी के नेता हैं. इस मामले में सिर्फ यही संयोग नहीं है. जिस आईएएस अफसर अफजल अमानुल्लाह ने आडवाणी को गिरफ्तार करने से इनकार कर दिया था, वह सैयद शहाबुद्दीन के दामाद हैं. शहाबुद्दीन उन दिनों बाबरी मस्जिद आंदोलन संयोजन समिति के संयोजक थे. अमानुल्लाह उन दिनों धनबाद के डीसी थे. वहीं आडवाणी का ‘रथ चालक’ यानी ड्राइवर एक मुस्लिम था. रथयात्रा के लिए एक मिनी बस को रथ का रूप दिया गया था. आडवाणी की गिरफ्तारी के कारण ही तब बीजेपी ने वीपी सिंह सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था.

जिससे वीपी सिंह की सरकार गिर गई थी. वीपी सरकार के मंडल अस्त्र के खिलाफ वह बीजेपी मंदिर ब्रहमास्त्र था. उस घटना ने देश की राजनीति की दिशा बदल दी थी. वीपी सरकार के पतन के बाद कांग्रेस के सहयोग से चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने थे. बाद में एक बार आडवाणी ने एक भेंटवार्ता में कहा भी था कि यदि मंडल आरक्षण नहीं लागू हुआ होता तो हमारा मंदिर आंदोलन भी नहीं होता. यदि उन्हें पता होता कि बाबरी मस्जिद ध्वस्त कर दी जाएगी तो वो सन 1992 में अयोध्या जाते ही नहीं. हालांकि मंदिर आंदोलन को गरमाने के लिए ही आडवाणी ने 25 सितंबर, 1990 को सोमनाथ से राम रथयात्रा शुरू की थी. रथयात्रा का पहला चरण 14 अक्टूबर को पूरा हुआ था. आडवाणी दिल्ली पहुंचे. प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने 18 अक्टूबर को ज्योति बसु को दिल्ली बुलाया.

बसु ने आडवाणी से बातचीत की और रथयात्रा स्थगित कर देने का आग्रह किया. पर आडवाणी ने बसु की सलाह ठुकरा दी. वो 19 अक्टूबर को धनबाद के लिए रवाना हो गए जहां से उन्होंने दूसरे चरण की शुरुआत कर दी. वो अयोध्या पहुंचकर राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण का काम 30 अक्टूबर को शुरू करना चाहते थे. बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने धनबाद के तत्कालीन उपायुक्त अफजल अमानुल्लाह को निर्देश दिया कि वो आडवाणी को वहीं गिरफ्तार कर लें. प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तारी का वारंट तैयार करके संबंधित अधिकारियों को दे दिया था लेकिन अमानुल्लाह ने ऐसा करने से इनकार कर दिया.
 

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