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पीएम को पत्र लिखना देशद्रोह कैसे हो सकता है, जवाबी खत जारी

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 10/9/2019 2:55:33 PM
पीएम को पत्र लिखना देशद्रोह कैसे हो सकता है, जवाबी खत जारी

रिपब्लिक हिंदी डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखने पर 49 हस्तियों पर मामला दर्ज होने के खिलाफ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और इतिहासकार रोमिला थापर सहित 180 प्रबुद्ध लोग सामने आये हैं. इन लोगों ने तीन महीने पहले पीएम मोदी को खत लिखा था. सोमवार को जारी हुए पत्र में इन लोगों ने सवाल किया है कि प्रधानमंत्री को खत लिखना देशद्रोह कैसे हो सकता है. खत में कहा गया है, ‘हमारे 49 सहयोगियों के खिलाफ केवल इसलिए एफआईआर दर्ज की गई है क्योंकि उन्होंने हमारे देश में मॉब लिंचिंग पर चिंता व्यक्त करके समाज के सम्मानित सदस्यों के रूप में अपना कर्तव्य पूरा किया.’ साथ ही सवाल किया गया है कि क्या नागरिकों की आवाज़ को चुप कराने के लिए अदालतों का दुरुपयोग करना ‘उत्पीड़न’ नहीं है.

लेखक अशोक वाजपेयी और जेरी पिंटो, शिक्षाविद इरा भास्कर, कवि जीत थायिल, लेखक शम्सुल इस्लाम, संगीतकार टीएम कृष्णा और फिल्म निर्माता-कार्यकर्ता सबा दीवान, अभिनेत्री अपर्णा सेन, एक्टर नसीरुद्दीन शाह और इतिहासकार रोमिला थापर के अलावा लेखिका नयनतारा सहगल, डांसर मल्लिका साराभाई और गायक टीएम कृष्णा सहित 180 हस्तियों ने ये नया खत लिखते हुए ‘लोगों की आवाज’ को चुप कराने के खिलाफ बोलने की बात कही.

खत में लिखा गया है, ‘हम सभी, भारतीय सांस्कृतिक समुदाय के सदस्यों के रूप में, अंतरात्मा के नागरिक के रूप में, इस तरह के उत्पीड़न की निंदा करते हैं. हम अपने सहयोगियों द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र के प्रत्येक शब्द का समर्थन करते हैं, और इसीलिए हम उनके पत्र को एक बार फिर यहां साझा करते हैं. सांस्कृतिक, शैक्षणिक और कानूनी समुदायों से जुड़े लोगों से भी ऐसा करने की अपील करते हैं. यही कारण है कि हम में से ज्यादात्तर हर रोज बात करेंग. मॉब लिंचिंग के खिलाफ. लोगों की आवाज दबाने के खिलाफ. नागरिकों को परेशान करने के लिए अदालतों के दुरुपयोग के खिलाफ.’

कला, साहित्य और अन्य क्षेत्रों से जुड़ी 49 हस्तियों ने 23 जुलाई को मोदी के नाम खुला पत्र लिखा था. इसमें मुस्लिम, दलित और अन्य समुदायों के खिलाफ भीड़ द्वारा की जा हिंसा (मॉब लिंचिंग) पर रोक लगाने की मांग की गई थी.पत्र में प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा गया था, “मई 2014 के बाद से जबसे आपकी सरकार सत्ता में आई, तब से अल्पसंख्यकों और दलितों के खिलाफ हमले के 90% मामले दर्ज हुए. आप संसद में मॉब लिंचिंग की घटनाओं की निंदा कर देते हैं, जो पर्याप्त नहीं है. सवाल यह है कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?” हालांकि सरकार ने चिट्ठी में लगाए आरोपों को खारिज किया था.

बिहार में मामला दर्ज

उन लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत 3 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें देशद्रोह, सार्वजनिक उपद्रव, शांति भंग करने के इरादे से धार्मिक भावनाओं को आहत करने जैसे आरोप हैं. फिल्म निर्माता मणिरत्नम, अनुराग कश्यप, श्याम बेनेगल, अभिनेता सौमित्र चटर्जी और गायक शुभा मुद्गल सहित 49 हस्तियों पर "देश की छवि धूमिल करने, प्रधानमंत्री के प्रभावशाली प्रदर्शन को कम करने और अलगाववादी प्रवृत्तियों का समर्थन करने" का आरोप लगाया गया.

हालांकि, बिहार पुलिस का कहना है कि जहां तक शिकायत की बात है, चिंता का कोई कारण नहीं है. बिहार पुलिस प्रमुख गुप्तेश्वर पांडे ने बताया था, 'हमने इस मामले का संज्ञान लिया है और जो भी एफआईआर दर्ज की गई, वह स्थानीय सीजेएम (मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट) अदालत के आदेश पर थी. मैं आपको आश्वासन दे सकता हूं कि आदेश के अनुसार एक जांच की जाएगी, और चिंता का कोई कारण नहीं है.'

जवाब में 62 लोगों ने लिखा था खुला खत

49 हस्तियों के पत्र के जवाब में कंगना रनोट, प्रसून जोशी, समेत 62 हस्तियों ने खुला खत लिखा था. उनका कहना था कि कुछ लोग चुनिंदा तरीके से सरकार के खिलाफ गुस्सा जाहिर करते हैं. इसका मकसद सिर्फ लोकतांत्रिक मूल्यों को बदनाम करना है. उन्होंने पूछा कि जब नक्सली वंचितों को निशाना बनाते हैं तब वे क्यों चुप रहते हैं?
 

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