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केसीआर व स्टालिन घंटा भर साथ रहे लेकिन एक दूसरे को नही समझा पाए

By Republichindi desk | Publish Date: 5/14/2019 8:34:46 AM
केसीआर व स्टालिन घंटा भर साथ रहे लेकिन एक दूसरे को नही समझा पाए

रिपब्लिक डेस्क. टीआरएस सुप्रीमो के चंद्रशेखर राव और डीएमके सुप्रीमो एमके स्टालिन के मध्य एक घंटे से अधिक समय तक बातचीत हुई. हालांकि ऐसा लगता है कि गैर-बीजेपी व गैर-कांग्रेस गठबंधन सरकार के विचार पर स्टालिन ने कोई विशेष रुचि नहीं दिखाई. यही वजह रही कि स्टालिन से मिलने के तत्काल बाद केसीआर मीडिया से बिना बात किए निकल गए. बाद में डीएमके ने बयान जारी कर दोनों नेताओं की मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया. गौरतलब है कि केसीआर, स्टालिन से मिलने उनके आवास पर गए थे.

खबर है कि स्टालिन ने केसीआर से कांग्रेस को समर्थन का अनुरोध किया है. बातचीत के दौरान स्टालिन ने राव को इस बात से भी अवगत करा दिया कि उनकी पार्टी का कांग्रेस के साथ चुनाव पूर्व समझौता है. साथ ही वे प्रधानमंत्री पद के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नाम का समर्थन कर चुके हैं. स्टालिन ने केसीआर से अनुरोध भी किया कि वह केंद्र में कांग्रेस नीत सरकार का समर्थन करें. राष्ट्रीय दलों के समर्थन से केंद्र में क्षेत्रीय दलों की सरकार और वाम पार्टियों के शामिल होने संबंधी केसीआर की दलील पर स्टालिन ने कहा कि ऐसी स्थिति में सिर्फ कांग्रेस के नेतृत्व में बनी सरकार ही स्थिरता दे सकती है. डीएमके ने यह भी कहा कि विभिन्न राज्यों की राजनीतिक स्थिति को देखते हुए क्षेत्रीय दलों द्वारा केंद्र में सरकार गठन का विचार दूर तक नहीं चल सकता है. इस मुलाकात के दौरान डीएमके नेता दुरईमुरुगन और पूर्व केंद्रीय मंत्री टीआर बालू भी मौजूद थे.

मुलाकात के दौरान स्टालिन ने जब केसीआर से कांग्रेस को समर्थन देने के बारे में कहा तो सूत्रों का दावा है कि इस पर केसीआर ने बहुत नकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी. बताया जाता है कि केसीआर ने स्टालिन से कहा है कि अगर कांग्रेस सबसे बड़ी या दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनती है तो वह उसको समर्थन देने के बारे में विचार कर सकते हैं. गौरतलब है कि यूपीए-1 में केसीआर, मनमोहन सिंह के मंत्रिमंडल में मंत्री थे. दरअसल, कांग्रेस ने आंध्र प्रदेश के विभाजन को यह सोचकर मंजूरी दी थी कि केसीआर अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर देंगे. बाद में केसीआर ने अपनी पार्टी बरकरार रखी और राज्य की सत्ता पर काबिज हो गए. तब से दोनों पार्टियों के बीच संबंधों में खटास आ गई. यह खटास तब और बढ़ी जब विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के 19 विधायकों में से 10 को केसीआर ने अपनी पार्टी में शामिल कर लिया.

तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केएस अलागिरी ने दोनों नेताओं के बीच बैठक को महत्वहीन करार देते हुए कहा कि देश में न तो तीसरा मोर्चा संभव है और न ही यह विचार व्यावहारिक है. कश्मीर से कन्याकुमारी तक की सभी क्षेत्रीय पार्टियां इससे अच्छी तरह वाकिफ हैं. दूसरी तरफ तमिलनाडु प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष तमिलसाई सुंदरराजन ने दोनों नेताओं की बैठक पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि आखिर केसीआर के साथ अपनी मुलाकात में स्टालिन यह बताने में क्यों हिचकिचा रहे हैं कि वह केवल राहुल गांधी का समर्थन करेंगे. उन्होंने कहा कि स्टालिन ने इसी तरह की हिचकिचाहट तब दिखाई थी कि जब वह ममता बनर्जी की रैली में भाग लेने कोलकाता गए थे.

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