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फिल्मी है आंध्र के जगनमोहन रेड्डी की जीत की कहानी

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 5/25/2019 1:19:14 PM
फिल्मी है आंध्र के जगनमोहन रेड्डी की जीत की कहानी

रिपब्लिक डेस्क: लोकसभा चुनाव 2019 में जगनमोहन रेड्डी की पार्टी ने राज्य1 की 25 सीटों में से 22 पर कब्जा  जमा लिया है. जबकि तीन सीटों पर टीडीपी ने जीत दर्ज की है. विधानसभा चुनाव में भी रेड्डी की पार्टी को ही जनाधार मिला है. वाईएसआर कांग्रेस की जीत और जगनमोहन रेड्डी के उत्थान की कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है. जगन रेड्डी का कांग्रेस पार्टी में तिरस्कार, जेल जाना,  मां-बहन का अपमान, जेल से छुटकर हजारों किमी पदयात्रा और बीजेपी की लहर के बावजूद अपनी पार्टी को जीत दिलाने की कहानी सचमुच फिल्मी है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बयार में बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. 17वीं लोकसभा चुनाव में BJP को प्रचंड बहुमतमिला है. मुख्यद विरोधी दल कांग्रेस के पास विपक्ष में बैठने लायक सीटें भी नहीं हैं. कई राज्यु तो ऐसे हैं जहां कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला है. आंध्र प्रदेश में भी कांग्रेस का खाता नहीं खुल पाया है. यहां पर वाईएसआर की लहर में कांग्रेस बह गई है.

सितंबर 2009 में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में वाई एस राजशेखर रेड्डी की मृत्यु हो गई और कांग्रेस ने दिवंगत मुख्यमंत्री के उत्तराधिकारी के तौर पर के रोसैया को चुना. जबकि रोसैया का कोई जनाधार नहीं था. कांग्रेस हाईकमान ने जगनमोहन रेड्डी को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया था. उस समय पार्टी में बगावती सुर भी उठने लगे थे. विरोध ज्या दा बढ़ने पर कांग्रेस ने किरण कुमार रेड्डी को प्रदेश का सीएम बना दिया.

बेटे जगनमोहन रेड्डी को न तो वाईएसआर का उत्तमराधिकार दिया गया और न ही कांग्रेस पार्टी में कोई पद दिया गया. इसके बाद रेड्डी ने 2011 में कांग्रेस का साथ छोड़ दिया. उनकी मां वाई विजयलक्ष्मी ने भी पुलिवेंदुला विधायक पद से इस्तीफा दे दिया. YSRCP संस्थापक ने 2011 के उपचुनाव में कडप्पा से पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ा और रिकॉर्ड 5.45 लाख बहुमत के साथ जीत हासिल की.

उस समय रेड्डी एक सफल बिजनेसमैन थे. लेकिन, उनपर कानूनी शिकंजा कसा जाने लगा. उनपर आय से अधिक संपत्ति के मामले दर्ज होने लगे. इस मामले में वे 18 महीने तक जेल में भी रहे. फिर उन्हें  जमानत मिली. जेल से निकलने के बाद रेड्डी ने जनाधार जुटाने के लिए खास रणनीति पर काम करना शुरू किया. उन्होंलने राज्यन में 3,600 किलोमीटर की पदयात्रा की और उन्हेंि जनता का अच्छाम खासा समर्थन हासिल हुआ.

वाईएसआर की मौत के साथ ही कांग्रेस पार्टी ने उनके परिवार से दूरी बना ली. बताया जाता है कि वर्ष 2010 के मध्यस में जगनमोहन रेड्डी की मां विजयलक्ष्मीा (विजयम्मा ) अपनी बेटी शर्मिला रेड्डी के साथ सोनिया गांधी से मिलने के लिए 10 जनपथ गयीं. वाईएसआर और दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बीच काफी घनिष्ठे संबंध थे, जिससे विजयलक्ष्मीय को उम्मी द थी कि सोनिया गांधी उनके साथ भी काफी गर्मजोशी से मिलेंगी, लेकिन कांग्रेस की तत्काकलीन अध्य क्ष से मिलने के लिए जब उन्हें  कुछ समय तक इंतजार करना पड़ा तो उनकी सारी उम्मीतद चकनाचूर हो गई. जब सोनिया गांधी उनके पास आईं तो उनका व्यजवहार सामान्यक नहीं लगा.

उस समय वाईएसआर की मौत के वियोग में कई लोगों ने आत्मीहत्यादएं कर ली थीं और जगनमोहन रेड्डी आत्मसहत्यािएं करने वाले लोगों के घर पहुंच रहे थे और उनके परिजनों से मिल रहे थे. रेड्डी ने इस यात्रा को 'ओदारपू' नाम दिया था. सोनिया गांधी ने विजयम्मास से मिलने के बाद रेड्डी को यह यात्रा रोकने के लिए कहा. सोनिया चाहती थीं कि जगनमोहन ये यात्रा तुरंत रोक दें. हालांकि विजयम्माो ने उन्हें  समझाने की कोशिश की लेकिन सोनिया अपनी कुर्सी से उठी और यात्रा रोकने के लिए कहा.

मां और बहन के इस अपमान का बदला लेने के लिए जगनमोहन रेड्डी ने कसम खा ली. इसके बाद उन्हों ने अपने परिजनों और करीबियों को यह संकेत दिया कि वे जल्दे ही नई पार्टी का गठन करेंगे. उन्हों ने कहा कि वे आंध्र प्रदेश से कांग्रेस का खत्मक कर देंगे. अब जगनमोहन की वह कसम पूरी होती लग रही है.

 

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