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बाबर ने नहीं तोड़ा राम मंदिर, अयोध्या रीविजिटेड के लेखक कुणाल किशोर का दावा

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 10/17/2019 5:37:07 PM
बाबर ने नहीं तोड़ा राम मंदिर, अयोध्या रीविजिटेड के लेखक कुणाल किशोर का दावा

रिपब्लिक हिंदी डेस्क: जिनकी पुस्तक में दिये गये नक्शे को लेकर राष्ट्रव्यापी चर्चा छिड़ी है वह गुजरात कैडर के 1972 बैच के पूर्व आईपीएस अधिकारी किशोर कुणाल हैं. उनकी पुस्तक अयोध्या रीविजिटेड में दावा किया गया है कि अयोध्या के मंदिरों को मुगल वंश के संस्थापक बाबर ने नहीं तोड़ा था. बाबर तो अपने जीवनकाल में कभी अयोध्या आया ही नहीं. बाबर के वंशधर मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिरों को तोड़वाया था. इस पुस्तक में बाबरी मस्जिद के अस्तित्व से ही इनकार किया है. आचार्य किशोर कुणाल के अनुसार ब्रिटिश काल की पुरानी फाइलों, कुछ प्राचीन संस्कृत सामग्री, खुदाई की समीक्षाओं एवं विदेशी पर्यटकों की मानें तो अयोध्या में रामजन्मभूमि मंदिर मौजूद था, जिसे तोड़कर बाद में मस्जिद बनाई गई.

कुणाल का कहना है कि आम धारणा यह है कि बाबर ने रामजन्मभूमि मंदिर तोड़ा था यह गलत है. बाबर के नाम से जो मस्जिद कही जाती है, वह कभी बनी ही नहीं. मंदिर को तोड़े जाने की घटना 1528 ईसवीं में बाबर के शासनकाल में नहीं हुई थी, बल्कि यह घटना 1660 ई. में हुई जब फिदाई खान अयोध्या में औरंगजेब का गवर्नर था. बाबर कभी अयोध्या आया ही नहीं, इसलिए यह दावा अवास्तविक है कि अवध के गवर्नर मीर बाकी ने 1528 में बाबरी मस्जिद बनवाई थी. पुस्तक में यह भी कहा गया है कि बाबर से लेकर शाहजहां तक सभी मुगल शासक उदार थे उनमें कट्टरता नहीं थी.

गौरतलब है कि आचार्य किशोर कुणाल सेवानिवृत भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी तथा संस्कृत अध्येता हैं. वे बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष हैं. वे पटना के महावीर मन्दिर न्यास के सचिव भी हैं. पटना के ज्ञान निकेतन नामक प्रसिद्ध विद्यालय के संस्थापक भी हैं. उनका मानना है कि अयोध्या में राम मंदिर बाबर के शासनकाल के दौरान नहीं, बल्कि औरंगजेब के शासनकाल में तोड़ा गया था.

उन्होंने बताया कि संस्कृत, अंग्रेजी और फ्रेंच विद्वानों ने भी अपनी पुस्तक में लिखा है कि अयोध्या में विवादित स्थल पर मंदिर मौजूद था. 1767 में भारत आए आस्ट्रिया के फादर जोसेफ टीफेंथेलर ने भी उल्लेख किया है कि उन्हें बताया गया कि औरंगजेब ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई थी. 1801 में भारत आए अंग्रेज पर्यटक सी मेंटल ने भी औरंगजेब द्वारा मस्जिद तोड़े जाने की बात लिखी है. 1841 में बने एक गजेटियर में भी औरंगजेब द्वारा मंदिर तोड़ने जाने का जिक्र है. 1631 में हिंदुस्तान आए इटली के पर्यटक डीलेट ने जिक्र किया है कि उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर देखा है. इसी प्रकार 1634 में भारत में आए इंग्लैंड यात्री हर्बट ने जिक्र किया है कि अयोध्या में बहुत प्राचीन इमारतें हैं लेकिन उन सब में सबसे महत्वपूर्ण वह है जिसे रामजी ने बनवाया था.

मुस्लिम शासक दाराशिकोह को सपने में दो दिव्य पुरूष दिखे, जिसमें एक थे वशिष्ठ और दूसरे थे राम. राम ने दाराशिकोह के सिर पर हाथ रखकर आर्शीवाद दिया. यह बात जब दारा ने औरंगजेब को बताई तो वह नाराज हो गया चूंकि वह कट्टर था इसलिए हिंदू धर्म पर हमला करना शुरू कर दिया और हिंदू मंदिरों को तोड़वाया.
कुणाल द्वारा लिखित पुस्तक अयोध्या रीविजिटेड में राम मंदिर को लेकर कई नई बातों का उल्लेख किया गया है. लेखक ने कई पुख्ता प्रमाण भी दिए हैं. इस किताब की प्रस्तावना पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट जीबी पटनायक द्वारा लिखी गई हैं, जिसमें उन्होंने कहा है कि यह पुस्तक हिंदू हित की धरोहर होगी.
 

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