23 जुलाई 2019, मंगलवार | समय 00:48:37 Hrs
Republic Hindi Logo

उदारीकरण के जनक नरसिम्हा राव क्यों हो गये गांधी परिवार के अप्रिय

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 6/28/2019 1:36:43 PM
उदारीकरण के जनक नरसिम्हा राव क्यों हो गये गांधी परिवार के अप्रिय

रिपब्लिक डेस्क: पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव 21 जून 1991 से 16 मई 1996 तक देश के प्रधानमंत्री रहे थे. उनका जन्म 28 जून 1921 को तेलंगाना के करीमनगर में हुआ था. 2004 में उनका निधन हो गया. वर्ष 1991 में बतौर प्रधानमंत्री राव ने आर्थिक उदारीकरण को देश में लागू किया. उस समय डॉ मनमोहन सिंह देश के वित्त मंत्री थे. पूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता स्वर्गीय पीवी नरसिम्हा देश के ऐसे प्रधानमंत्री रहे हैं जिनका नाम देश में इकनोनॉमिक रिफॉर्म्स से ही नहीं बल्कि बाबरी विध्वंश से भी जोड़ा जाता है. नरसिम्हा राव कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे, राजीव गांधी की मृत्यु के बाद वह पीएम भी बने. उनका नाम सोनिया गांधी ने ही सुझाया था. फिर भी जीवन के अंतिम दिनों में राव और गांधी परिवार के संबंधों में खटास आ गयी थी.

इसके पीछे महत्वपूर्ण कारण यह भी माना जाता है कि नरसिम्हा राव के कारण कांग्रेस में बिखराव आ गया था. पार्टी कई टुकड़ों में बंट गयी थी. तिवारी कांग्रेस (एनडी तिवारी), तमिल मनीला कांग्रेस (जीके मूपनार), तृणमूल कांग्रेस (ममता बनर्जी) सहित कई राज्यों में कांग्रेस कई गुटों में बिखर गयी, जिसका खामियाजा आज भी कांग्रेस को भुगतना पड़ रहा है.

जब कारसेवकों ने अयोध्या स्थित बाबरी मस्जिद विध्वंस शुरू किया, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव पूजा के लिए बैठे हुए थे. दिवंगत समाजवादी नेता मधु लिमये ने मुझे बताया था कि इस पूजा के दौरान जब राव के एक सहयोगी ने उनके कान में कहा कि मस्जिद नेस्तनाबूद कर दी गई, तब कुछ ही सेकंडों में पूजा संपन्न कर राव उठे थे. एक किताब में ये दावा किया गया था, जो उस समय भी काफी चर्चित रहा था.

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार गांधी परिवार से नरसिंहा राव के संबंधों में आयी खटास के पीछे उनकी लोकप्रियता भी थी. आर्थिक उदारीकरण लागू करने से राव की देश-दुनिया में अलग पहचान बनी. साल 1991 में बतौर प्रधानमंत्री राव ने आर्थिक सुधारों का दरवाजा खोला और इससे उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ने लगी. अखबार से लेकर टेलीविजन तक में सुधारों के चर्चे हुए. किताबें लिखी गईं और राव को हीरो की तरह पेश किया गया, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि कांग्रेस को इन सुधारों के पीछे राव को क्रेडिट दिया जाना पसंद नहीं आया.

विनय सीतापति अपनी किताब 'द हाफ लायन' में इस बात का जिक्र करते हुए लिखते हैं, कांग्रेस के 125वें स्थापना दिवस पर सोनिया गांधी ने कहा कि 'राजीव जी अपने सपनों को साकार होते हुए देखने के लिए हमारे बीच नही हैं, लेकिन हम देख सकते हैं कि वर्ष 1991 के चुनावी घोषणा पत्र में उन्होंने जो दावे किये थे वही अगले पांच वर्षों के लिए आर्थिक नीतियों के आधार बने'

वह लिखते हैं कि राव की आलोचना के पीछे एक और वजह थी. वह है बाबरी मस्जिद कांड में उनकी कथित भूमिका. वह आगे लिखते हैं कि, 'नरसिम्हा राव के प्रशंसकों में से एक और कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में शुमार जयराम रमेश कहते हैं कि, 'कांग्रेस के 99.99 फीसद लोगों का मानना है कि बाबरी मस्जिद के गिरने के पीछे कहीं न कहीं राव की मिलीभगत थी. और उस घटना की कसौटी पर पूरी कांग्रेस पार्टी को कसा जाता है'. विनय सीतापति आगे लिखते हैं कि, राहुल गांधी ने तो सार्वजनिक तौर पर यह कहा कि 'अगर उनका परिवार वर्ष 1992 में सत्ता में होता तो शायद बाबरी मस्जिद नहीं गिरती'.

नरसिम्हा राव के मीडिया सलाहकार रह चुके के प्रसाद ने भी एक किताब लिखी थी, जिसमें कहा था कि 'मस्जिद गिराए जाने के बाद तीन पत्रकारों निखिल चक्रवर्ती, प्रभाष जोशी और आरके मिश्र ने राव से मेरी मौजूदगी में पूछा था कि 6 दिसंबर को राव ने ऐसा क्यों होने दिया. तब राव ने कहा कि क्या आप लोगों को लगता है कि मुझे राजनीति नहीं आती?'

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता स्व. अर्जुन सिंह ने अपनी आत्मकथा 'ए ग्रेन ऑफ़ सैंड इन द आर ग्लास ऑफ़ टाइम' में मस्जिद ढहाए जाने के बाद हुई कांग्रेस के प्रमुख नेताओं की बैठक का किस्सा दर्ज किया था. 'पूरी बैठक के दौरान राव हैरानी में थे. सबकी निगाहें जाफ़र शरीफ़ की तरफ इस तरह थीं कि वही कुछ कहें. शरीफ़ ने कहा था कि देश, सरकार और कांग्रेस को इस घटना की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. माखनलाल फ़ोतेदार उसी समय रोने लगे थे, लेकिन राव बुत बने चुप बैठे रहे.'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के जन्मदिन पर उनको श्रद्धांजलि दी है. प्रधानमंत्री ने कहा, 'पी.वी. नरसिम्हा राव के जन्मदिन पर उनको श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. हम उन्हें एक महान विचारक और राजनीति के अनुभवी के रूप में याद करते हैं.

Copyright © 2018 Shailputri Media Private Limited. All Rights Reserved.

Designed by: 4C Plus