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विवाद : पश्चिम बंगाल के मदरसे हैं लीक से हटकर

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 7/4/2019 1:41:54 PM
विवाद : पश्चिम बंगाल के मदरसे हैं लीक से हटकर

रिपब्लिक डेस्क: पश्चिम बंगाल के मदरसे लीक से हटकर हैं. यहां न केवल मॉडर्न शिक्षा दी जाती है बल्कि कई मदरसों में हिंदू विद्यार्थी भी पढ़ते हैं. इसके बावजूद बंगाल के मदरसे को लेकर विवादित सवाल खड़े किये जा रहे हैं. केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय की ओर से यह दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल के मदरसों का आतंकियों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है. केंद्र के आरोपों के बाद राज्य के अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा मंत्री गयासुद्दीन मुल्ला ने सभी मदरसा प्रमुखों के बैकग्राउंड और मदरसों में पढ़ाए जा रहे कंटेंट के बारे में जानकारी भी मांगी है. ऐसे में क्या है बंगाल के मदरसों की सच्चाई, क्या है इनकी हकीकत, जानने के लिए पेश है एक रिपोर्ट:  

बंगाल के मुस्लिम समाज के लोगों को मदरसा की शिक्षा दिलाने के मकसद से पश्चिम बंगाल बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन (WEBME) की स्थापना 1927 में हुई थी. पश्चिम बंगाल विधानसभा ने विधेयक पारित कर इसे स्वायत्तशासी संस्था के रूप में मान्यता दी है. बर्दवान जिले के केतुग्राम स्थित अगोरडांगा हाई मदरसा में करीब 900 छात्र पढ़ते हैं जिसमें 60 फीसदी छात्र हिंदू हैं. इसके अलावा कई और मदरसे हैं जहां पर हिंदू छात्र पढ़ने के लिए जाते हैं. राज्य सरकार का कहना है कि सरकारी मदद से चलाए जा रहे मदरसों में करीब 25 फीसदी छात्र गैर-मुस्लिम हैं. यहां के मदरसों में स्मार्ट क्लास भी चलाए जाते हैं.

अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा मंत्री गयासुद्दीन मुल्ला के अनुसार, पश्चिम बंगाल के मदरसों में मॉडर्न तरीके से शिक्षा दी जाती है. यहां के मदरसों में आधुनिक विज्ञान और गणित की पढ़ाई बहुत पहले से ही शुरू की जा चुकी थी और आज 12 मदरसों में शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी हो गया है. अमेरिका और पाकिस्तान से विशेषज्ञों का दल बंगाल के मदरसों में आए इस बदलाव का अध्ययन कर चुका है. लेकिन बदलते दौर में यहां के मदरसे जब आधुनिकता के साथ चलते हुए नौनिहालों का भविष्य संवारने में लगे हैं, ऐसे में आतंकी संगठनों की ओर से मदरसों का इस्तेमाल किए जाने की बात राजनीति से प्रेरित लगती है.

गृह मंत्रालय की ओर से मदरसों का आतंकियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने के दावे के बीच राज्य के अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा मंत्री ने सभी मदरसा प्रमुखों के बैकग्राउंड और मदरसों में पढ़ाए जा रहे कंटेंट के बारे में जानकारी मांगी है. इस संबंध में 9 और 10 जुलाई को अहम बैठक होने वाली है. राज्य के अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार मदरसा शिक्षा पर सलाना 250 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं. विभाग के पास 2019-20 के वित्त वर्ष में करीब 3,000 करोड़ रुपए का बजट है.

मुल्ला के अनुसार, 12 मदरसों में अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा दी जाती है. सरकारी मदरसों के अलावा राज्य में करीब 2,000 मदरसे निजी तौर पर भी चलते हैं, लेकिन सरकार उन पर नजर बनाए रखती है. 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की साक्षरता दर 76.26 फीसदी है.

लोकसभा चुनाव के बाद से केंद्र और पश्चिम बंगाल की सरकार में विवाद के बीच मदरसों को लेकर विस्फोटक बयानबाजी की गयी है. केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से यह दावा किया गया कि पश्चिम बंगाल के मदरसों का आतंकियों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि ममता बनर्जी की सरकार की ओर से तुरंत इस पर प्रतिक्रिया दी गई कि बंगाल सरकार को गृह मंत्रालय की ओर से इस संबंध में कोई खत नहीं मिला. मंत्रालय राज्य की गलत तस्वीर पेश कर रहा है.

गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक बर्दवान और मुर्शिदाबाद स्थित मदरसों का इस्तेमाल करके जमात मुजाहिद्दीन बांग्लादेश (जेएमबी) आतंकियों की भर्ती कर रहा है. मोदी सरकार ने जेएमबी को आतंकी संगठनों की सूची में शामिल कर रखा है. गौरतलब है कि बंगाल में 614 मदरसा हैं, जो लेफ्ट सरकार के दौर से ही चल रहे हैं. पिछले कई सालों में राज्य में कोई नया मदरसा नहीं खुला है. वर्तमान राज्य सरकार ने एक भी नया मदरसा नहीं बनाया. हम उनकी किताबों इत्यादि से मदद कर रहे हैं, लेकिन जब उन्होंने इसका विरोध किया तो हमें वह भी रोकना पड़ा.

पश्चिम बंगाल बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन की वेबसाइट के अनुसार बंगाल में इस समय 614 मान्यता प्राप्त मदरसा हैं. 102 मदरसा सीनियर मदरसा एजुकेशन सिस्टम के अंडर जबकि 512 मदरसा हाई मदरसा एजुकेशन सिस्टम के तहत चलते हैं. 614 में से 400 हाई मदरसा, 112 मदरसा जूनियर हाई मदरसा जबकि शेष 102 मदरसे सीनियर मदरसा के रूप में कार्यरत हैं. 66 मदरसे को फाजिल (10+2) से अपग्रेड कर सीनियर मदरसा कर दिया गया है. 210 मदरसा को अपग्रेड कर हाई मदरसे के रूप में कर दिया गया है. इसके अलावा 183 मदरसे में स्किल डेवलपमेंट के लिए वोकेशनल कोर्स चलाए जा रहे हैं.

पश्चिम बंगाल बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन (WEBME) की वेबसाइट के अनुसार इन मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों की तुलना में छात्राओं की उपस्थिति ज्यादा है. अगस्त 2010 तक मान्यता प्राप्त मदरसों में 4,47,017 विद्यार्थी शिक्षा हासिल कर रहे थे, जिसमें 1,82,784 छात्र (कुल 40.89%) और 2,64,233 (59.11%) छात्राएं शामिल थे. राज्य में 614 मान्यता प्राप्त मदरसों में 57 छात्राओं पर आधारित मदरसे हैं जबकि 554 मदरसों को-एड (छात्र-छात्रा एक साथ शिक्षा लेते हैं) वहीं 3 मदरसों में सिर्फ लड़के ही पढ़ सकते हैं. 17 मदरसों में ही उर्दू भाषा शिक्षा का माध्यम है. 2017 के मदरसा बोर्ड परीक्षा में 2,287 हिंदू छात्रों ने परीक्षा में भाग लिया था जिसमें 930 छात्र अनुसूचित जाति (एससी) के थे.

राज्य के कुल मदरसे की बात की जाए तो इस बार (2019) पश्चिम बंगाल हाई मदरसा सेकेंडरी एग्जाम में 12 फीसदी हिंदू छात्र शामिल हुए थे और इसमें पिछले साल की तुलना में 4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी. इस साल केतुग्राम में मदरसा बोर्ड एग्जाम में 62 हिंदू छात्रों ने हिस्सा लिया था जिसमें 45 लड़कियां थीं. 10 साल पहले 2009 में राज्य में 4 मदरसे ऐसे भी थे जहां पर मुसलमानों की तुलना में हिंदू छात्रों की संख्या ज्यादा थी. इन चारों मदरसों में पढ़ने वाले 57 फीसदी से लेकर 64 फीसदी तक छात्र थे. मुस्लिम बहुल क्षेत्र पूर्वी बर्दवान के एक मदरसे में पढ़ने वाली 3 हिंदू छात्राओं (पियूपिया साहा, साथी मोढ़क और अर्पिता साहा) ने पश्चिम बंगाल मदरसा माध्यमिक स्टैंडर्ड की परीक्षा में 90 फीसदी से ज्यादा अंक हासिल किया था. इन छात्राओं ने इस्लाम परिचय या इस्लामिक इतिहास से जुड़े पेपर में भी 90 से ज्यादा अंक हासिल किए थे.
 

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