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रफ़ाल में क्या मिल गया क्लीन चिट

By Republichindi desk | Publish Date: 12/15/2018 5:26:01 PM
रफ़ाल में क्या मिल गया क्लीन चिट

रफ़ाल के बारे में क्या सुप्रीम कोर्ट ने ये कहा कि ऑफ़सेट करार एचएएल से लेकर अम्बानी को देना सही था ? नही. क्या सुप्रीम कोर्ट ने ये कहा कि रफ़ाल का नया दाम एकदम सही है ? नही. क्या सुप्रीम कोर्ट ने ये कहा कि भ्रष्टाचार के आरोप गलत हैं ? नही.

तीन सवाल हैं और तीनों का जवाब नहीं है. फिर रफ़ाल के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने कहा क्या ?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नए सौदे में सरकारी प्रक्रियाओं का उल्लंघन नही हुआ है. यानी फाइलों मे कोई गड़बड़ी नही है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत की देखरेख में जांच नही की जायेगी. साफ है कि सुप्रीम कोर्ट ने अदालती जांच की मांग ठुकराई है, इसे क्लीन चिट कह सकते हैं क्या ?

दरअसल, रफ़ाल पर आए सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर जहां देश का पत्रकार जगत विस्मित है, वहीं भारत में पत्रकारिता कर रहे विश्व के अन्य देशों के प्रसिद्ध मीडिया समूहों के पत्रकार हतप्रभ हैं. खु़द फ़्रांस के सबसे बड़े मीडिया समूह 'ल मोन्द' के दिल्ली में तैनात साउथ एशिया ब्यूरो चीफ़ जुलियाँ बूइसू ने ट्वीट किया कि यहां दिल्ली में भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने भले ही कहा हो कि यह मामला उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है, लेकिन फ़्रांस के नेशनल पब्लिक प्रासिक्यूटर का दफ़्तर अभी भी विचार कर रहा है कि क्या इस मामले में जांच शुरू की जाए.

दूसरी तरफ, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में बताया था कि जिस सीएजी रिपोर्ट और पीएसी द्वारा उसके अनुमोदन की बात सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में है. वह सीएजी रिपोर्ट तो पीएसी में अब तक पेश ही नहीं की गई है. संयोग ही है कि पीएसी के अध्यक्ष लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे हैं. जो प्रेस कांफ्रेंस में राहुल गांधी के बगल में दाहिनी ओर बैठे थे. खड़गे ने भी कहा कि उनके सामने ऐसी कोई रिपोर्ट आई ही नहीं.

भारत में जहां मीडिया का बड़ा हिस्सा हर मामले की तरह इस मामले में भी मोदी सरकार से भी आगे बढ़कर उसे क्लीन चिट दे रहा है. वहीं फ़्रांस में इसका उलट हो रहा है. वहीं की एक वेबसाइट मीडियापार्ट ने निवर्तमान राष्ट्राध्यक्ष ओलांद का इंटरव्यू छापा था जिसमें ओलांद ने यह दावा किया था कि नई दिल्ली ने उन पर अनिल अंबानी को जबरन थोपा था. एक दूसरी वेबसाइट ने दसॉ कंपनी के संबंधित अधिकारियों के आंतरिक पत्राचार को लीक कर बताया था कि एचएएल की जगह अंबानी को इस डील में किसने डाला था. वहीं से यह ख़बर भी यहां तक पहुंची कि इसी दौरान अनिल अंबानी की एंटरटेनमेंट कंपनी, ओलांद के एक पार्टनर को एक फ़िल्म प्रोजेक्ट में फ़ाइनेंस करने जा पहुंची.

बहरहाल, जो लोग सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले में मोदी सरकार के लिए अमृत पाने का एलान कर रहे थे. सोशल मीडिया और रेग्युलर मीडिया में जारी कोलाहल देख राय बदलने या चुप रहने पर मजबूर हो गए हैं. बहुत समय बाद लगभग अविवादित सुप्रीम कोर्ट की बेंच के फ़ैसले पर इतना बड़ा विवाद पैदा हुआ है

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