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ह्वाट्सअप से पत्रकारों और नेताओं की जासूसी, घेरे में सरकार

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 11/1/2019 12:04:31 PM
ह्वाट्सअप से पत्रकारों और नेताओं की जासूसी, घेरे में सरकार

रिपब्लिक हिंदी डेस्क:  इजराइली स्पाईवेयर 'पेगासस' के वैश्विक स्तर पर जासूसी की जा रही है. भारत के कुछ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता भी इस जासूसी का शिकार बने हैं. इस खुलासे के बाद भारत सरकार ने व्हाट्सऐप से मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है.भारत में जिन लोगों को निशाना बनाया गया, उनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल, पूर्व लोकसभा सांसद और पत्रकार संतोष भारतीय के नाम भी शामिल हैं. उन्होंने बताया कि कंपनी ने ऐसे 41 लोगों की पहचान की है, जिनकी जासूसी हुई। इनमें से 21 पत्रकार, वकील और कार्यकर्ता हैं. जिन लोगों की जासूसी की गई है, उनके नाम पर गौर करने पर संदेह पैदा होता है कि क्या इसमें सरकार की कोई भूमिका रही है?

कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट कर बीजेपी पर आरोप लगाया है कि भारतीय पत्रकारों, वकीलों, राजनेताओं और एक्टिविस्टों की जासूसी करवाना मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है. प्रियंका गांधी ने कहा है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा को संकट में डालने के समान है. हालांकि केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का कहना है कि भारत के नागरिकों की निजता में व्हाट्सएप पर उल्लंघन होने को लेकर सरकार चिंतित है. इस बारे में व्हाट्सएप से पूछा गया है कि वह लाखों भारतीयों की निजता की सुरक्षा को लेकर क्या कर रहे हैं.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी इस पर सवाल उठाया है.

ह्वाट्सअप ने खुलासा किया है कि भारत के करीब दो दर्जन शिक्षाविदों, वकीलों, दलित एक्टिविस्टों और पत्रकारों के मोबाइल में इंस्टाल ह्वाटसअप के जरिए जासूसी की जा रही थी. उनके फोन कॉल सुने जा रहे थे, मैसेज पढ़े जा रहे थे. ह्वाट्सअप ने इन सभी शिक्षाविदों, पत्रकारों, एक्टिविस्टों, वकीलों से खुद संपर्क कर उन्हें जानकारी दी कि मई में दो हफ्ते तक उनके फोन सर्विलांस में थे. व्हाट्सएप प्रमुख विल कैथार्थ ने बताया कि इजरायली स्पाईवेयर ने पूरी दुनिया में कम से कम 100 मानवाधिकार रक्षक, पत्रकार और सिविल सोसाइटी के अन्य सम्मानित सदस्यों को निशाना बनाया था.”

व्हाट्सएप ने बताया है कि इसी साल मई में इजरायली स्पाईवेयर पेगासस का इस्तेमाल करके भारत के कई पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की जासूसी की गई थी. यह खुलासा सैन फ्रांसिस्को में एक अमेरिकी संघीय अदालत में हुआ है, जहां एक केस की सुनवाई चल रही थी. ज्ञात हो कि मई में भारत में लोकसभा चुनाव हो रहे थे.

व्हाट्सएप ने आरोप लगाते हुए कहा कि अत्यधिक सोफिस्टिकेटेड मेलवेयर का इस्तेमाल करके सिविल सोसाइटी के वरिष्ठ सदस्यों के साथ 1400 व्हाट्सएप यूजर्स को टारगेट किया गया है. व्हाट्सएप का कहना है कि उसने मई में अपने सिस्टम के वीडियो कॉलिंग पर हुए बेहद गंभीर मैलवेयर हमले को रोका था. हमले का मकसद कई व्हाट्सएप यूजर्स के मोबाइल उपकरणों पर मिस्ड कॉल के माध्यम से मेलवेयर भेजना था.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, व्हाट्सएप ने भारत में सर्विलांस पर रखे गए लोगों की पहचान और ‘सटीक संख्या’ की जानकारी देने से इनकार कर दिया है. व्हाट्सएप के अमेरिकी-बेस्ड डायरेक्टर कार्ल वूग ने बताया है कि वॉट्सऐप उन लोगों के बारे में जानता था, जिनमें से हर एक से संपर्क किया गया.

व्हाट्सएप की ऑनर कंपनी फेसबुक ने इस घटना के बाद इजरायली सर्विलांस कंपनी एनएसओ ग्रुप के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. फेसबुक ने आरोप लगाया है कि एनएसओ ग्रुप ने यूजर्स के स्मार्टफोन को हैक करने के लिए व्हाट्सएप की एक खामी का इस्तेमाल कर यूएस कंप्यूटर फ्रॉड और अब्यूज एक्ट और कानूनों का उल्लंघन किया है. यह पहली बार है जब यूजर्स पर इस प्रकार का हमला करने के लिए कंपनी ने किसी निजी संस्थान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की हो.

एनएसओ ग्रुप ने एक बयान में फेसबुक के सभी आरोपों से इनकार किया है. एनएसओ ग्रुप ने कहा है कि वह फेसबुक के खिलाफ ‘सख्ती से लड़ने के लिए’ तैयार है. कंपनी ने कहा, “एनएसओ का एकमात्र उद्देश्य लाइसेंस प्राप्त सरकारी खुफिया और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को आतंकवाद और गंभीर अपराध से लड़ने में मदद करने के उद्देश्य से उन्हें तकनीक प्रदान करना है. हमारी तकनीक मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के खिलाफ उपयोग के लिए डिजाइन या लाइसेंस नहीं है. इसने हाल के सालों में हजारों लोगों की जान बचाने में मदद की है.’’

वाट्सएप की पैरेंट कंपनी फेसबुक की ओर से इजरायल की साइबर सिक्योरिटी कंपनी एनएसओ पर आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है कि उसने वाट्सएप के सर्वर का इस्तेमाल कर 1400 वाट्सएप यूजरों को यह मॉलवेयर फैलाया है जिसकी जरिए उसने जासूरी की है. इनमें 20 देशों के पत्रकार, सरकार के उच्चाधिकारी, मानवाधिकार एक्टिविस्ट शामिल हैं. भारत में WION टीवी के पत्रकार सिद्धांत सिब्बल ने ट्वीट कर बताया है कि उनसे भी वाट्एप की ओर से संपर्क किया गया है. उन्होंने कहा है कि तकनीकी और कानूनी कदम उठाए गए हैं.

इस स्पाइवेयर जरिए वाट्सएप इस्तेमाल करने वाले शख्स के मैसेज, कॉल और पासवर्ड की डिटेल आसानी से पाई जा सकती है. कितने लोगों की जासूसी की गई है इसकी कोई निश्चित संख्या तो वाट्सएप की ओर से नहीं बताई गई है लेकिन उसकी ओर से यह जरूर कहा गया है कि उसने प्रभावित लोगों को फोन कर सूचना दे दी है. माना जा रहा है कि भारत में यह जासूसी अप्रैल के दो हफ्ते में की गई है. फेसबुक ने मई के महीने में घोषणा की थी कि उसने एक साइबर अटैक को नाकाम कर दिया है.

इस स्पाईवेयर का नाम Pegasus है. जैसी ही आपको कई वीडियो कॉल करता है तो साइबर हमला करने वाला शख्स एक कोड जारी करता है जिसके जरिए यह आपके फोन में इंस्टॉल हो जाता है. भले ही वीडियो कॉल को आपने रिसीव न किया हो. फोन में इंस्टॉल होने के बाद इसके जरिए आपके फोन, कॉल, वाइस कॉल, पासवर्ल्ड, कॉन्टेक्ट लिस्ट, कलेंडर इवेंट, माइक्रोफोन, कैमरे तक की डिटेल आसानी से पाई जा सकती है.

वहीं इजरायल कंपनी ने ऐसी किसी भी आरोप से इनकार किया है और कहा कि इसका कोर्ट में सामना किया जाएगा. उसकी ओर से कहा गया है कि उसकी तकनीकि पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ करने के लिए नहीं है. साथ में यह भी कहा कि Pegasus वैध सरकारी एजेंसियों के लिए ही लाइसेंस मिला है.
 

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