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राजनीतिक प्रतिशोध: जब जेल बन गया इन नेताओं के लिए वरदान

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 8/22/2019 3:30:11 PM
राजनीतिक प्रतिशोध: जब जेल बन गया इन नेताओं के लिए वरदान

रिपब्लिक डेस्क: पूर्व वित्तमंत्री और गृह मंत्री रहे पी चिदंबरम की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप लगाये जा रहे हैं. हमारे देश में सियासी गिरफ्तारियों पर विवाद खड़ा करने की परंपरा कोई नहीं है. कई बार तो राजनेताओं की गिरफ्तारी उनरो लिए वरदान साबित हो रही है. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, करुणानिधि, संजय गांधी से लेकर वर्तमान गृह मंत्री अमित शाह को अतीत में गिरफ्तार किया गया था लेकिन उनको इसका राजनीतिक लाभ ही मिला. इमरजेंसी के दौरान राजनारायण, जॉर्ज फर्नांडीज, लालकृष्ण आडवाणी,  शांति भूषण, अटल बिहारी बाजपेयी जैसे नेताओं को जेल में बंद कर दिया गया था. उसके बाद जब इंदिरा गांधी के नेतृत्ववाली कांग्रेस 1977 में चुनावों में हार गई तो अधिकांश नेता चाहते थे कि इंदिरा गांधी को जेल में डाला जाय.

तत्कालीन पीएम मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार के ज्यादातर मंत्री और नेता इंदिरा गांधी को जेल में देखना चाहते थे. उस समय कई केसों में सबसे अहम जो इंदिरा गांधी के खिलाफ केस था, वो था जीप स्कैम. रायबरेली के चुनाव में इंदिरा गांधी की मदद के लिए 100 जीपें खरीदी गई थीं, जिनकी कीमत उन दिनों करीबन चालीस लाख थी. राजनारायण ने आरोप लगाया कि वो जीपें कांग्रेस के पैसे से नहीं बल्कि इंडस्ट्रियलिस्ट्स और सरकारी पैसे से खरीदी गई थीं. चौधरी चरण सिंह तो 1977 मार्च में सरकार बनते ही इंदिरा को जेल भेजना चाहते थे, लेकिन मोरारजी देसाई कानून के खिलाफ कुछ भी करने को राजी नहीं थे.

इंदिरा गांधी के खिलाफ भ्रष्टाचार केसेज की जांच के लिए शाह आयोग बनाया गया. तीन अक्टूबर की सुबह सीबीआई की टीम इंदिरा गांधी के आवास पर पहुंची. वहां इंदिरा गांधी को गिरफ्तारी के लिए एक घंटे का समय दिया गया. इंदिरा गांधी बाहर आते ही बोलीं कि हथकडियां कहां है, लगाओ. सीबीआई अधिकारियों और पुलिस ने बताया कि हथकडियों के लिए मना किया गया है, लेकिन इंदिरा नहीं मानी और हथकड़ियां लगाने के लिए अड़ी रहीं. इस पर काफी हंगामा हुआ.

इंदिरा गांधी को रातभर फरीदाबाद के पास बडहल गेस्ट हाउस में रखा गया. अगले दिन जब उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया तो उसने सबूत मांगे. पुलिस के पास कोई सबूत थे नहीं. लिहाजा इंदिरा गांधी को तुरंत बरी करके रिहा कर दिया गया. जनता पार्टी की सरकार ने हार नहीं मानी. अगले साल लोकसभा में इंदिरा गांधी के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया. उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने आपातकाल के दौरान विपक्षी नेताओं के हत्या की साजिश रची थी. दिसंबर 1978 में उन्हें हफ्ते भर के लिए तिहाड़ भेज दिया गया. इस गिरफ्तारी के खिलाफ देशभर में धरना और विरोध हुआ. आखिरकार इंदिरा को 26 दिसंबर को एक हफ्ते हिरासत में रखने के बाद तिहाड़ से रिहा कर दिया गया. इंदिरा गांधी को इन दोनों गिरफ्तारियों का सियासी लाभ भी मिला.

इसी तरह 1978 में ही संजय गांधी को फिल्म किस्सा कुर्सी फिल्म का प्रिंट जलाने के मामले में गिरफ्तार करके जेल भेजा गया. ये मई 1978 का मामला है. संजय़ को जमानत भी नहीं मिली. अदालत ने उन्हें एक महीने तक न्यायिक हिरासत में रखने का आदेश दिया. संजय को तिहाड़ जेल में रखा गया. इस मामले में संजय गांधी के साथ तत्कालीन  सूचना प्रसारण मंत्री विद्या चरण को दोषी ठहराते हुए दोनों पर मुकदमा चलाया गया था. 11 महीने तक चले इस मुकद्दमे के तहत दोनों को कैद की सजा सुनाई गई थी. बाद में इसे ख़त्म कर दिया गया. उसके बाद जनता पार्टी सरकार के पतन में संजय गांधी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.

तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और द्रविण मुनैत्र कषगम के नेता करुणानिधि और एआईएडीएम की प्रमुख जयललिता के बीच सियासी दुश्मनी इस कदर थी कि दोनों में कोई भी एक दूसरे के प्रति बेहतर भावना शायद ही रखता रहा हो लेकिन तब अति हो गई जबकि वर्ष 2001 में चुनाव जीतने के बाद जयललिता जब मुख्यमंत्री बनीं तो उन्होंने जिस तरह करुणानिधि की गिरफ्तारी कराई, उसकी निंदा पूरे देश में हुई. 

करुणानिधि के खिलाफ चेन्नई के एक फ्लाईओवर के निर्माण में अनियमितता का आरोप लगाया गया. 29 जून, 2001 की रात पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. उस समय करुणानिधि घर पर सो रहे थे. पुलिस रात डेढ़ बजे उनके घर पर घुसी. ऊपर उस कमरे में पहुंची, जिसमें वो सो रहे थे. उस कमरे का दरवाजा तोड़कर उन्हें गिरफ्तार किया गया. उनके साथ धक्का मुक्की की गई. देशभर में टीवी पर लोगों ने देखा कि पुलिस उन्हें धक्का देकर पुलिस वैन तक लेकर आई.उसके बाद करुणानिधि सत्ता में मजबूत होकर लौटे.
 

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