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बंगाल में लोहे से लोहा काटने की बीजेपी की रणनीति

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 3/6/2019 12:09:45 PM
बंगाल में लोहे से लोहा काटने की बीजेपी की रणनीति

कोलकाता: बंगाल में आधी लोकसभा सीटों पर जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही बीजेपी लोहा से लोहा काटने की रणनीति बनाकर आगे बढ़ रहा है. पश्चिम बंगाल की राजनीति में नेताओं के साथ कार्यकर्ताओं का हृदय परिवर्तन भी होता रहता है. चुनावी बयार का रुख भांप कर बंगाल के नेता-कार्यकर्ता भी अपनी दशा सुधारने के लिए दिशा बदलने में देर नहीं करते. पुलवामा अटैक और सर्जिकल स्ट्राइक-2 के बाद बंगाल की बयार भी बीजेपीमुखी होने का संकेत दे रही है. ऐसे में सत्ताधारी पार्टी टीएमसी के पाले से खिसकने की मुहिम शुरू होनेवाली है. बीजेपी सूत्रों के अनुसार टीएमसी के कई सांसद बीजेपी के पाले में जाने का मन बना चुके हैं. चुनाव की घोषणा होते ही पाला बदलने का खेल शुरू होगा.

बीजेपी भी लोहा से लोहा काटने की रणनीति के तहत टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल होनेवाले नेताओं पर दांव लगानेवाली है. टीएमसी छोड़कर बीजेपी का दामन थामनेवाले मुकुल रॉय को पार्टी में अहमियत देना इसी रणनीति को दर्शाता है. बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की करीबी रही पूर्व आईपीएस भारती घोष को भी बीजेपी में महत्वपूर्ण भूमिका दी जानेवाली है.

बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार भारती घोष की काफी अहमियत है. वह ममता बनर्जी की काफी करीबी रही हैं. चुनाव में उनके जरिए ममता पर निशाना साधा जा सकता है. ममता सरकार की माओवादियों पर कार्रवाई के दौरान भारती घोष काफी अहम जिम्मेतदारी पर थीं. ममता से करीबी के चलते पार्टी में भी उनकी चलती थी. यहीं कारण था कि 2014 के लोकसभा और 2016 के विधानसभा चुनावों के दौरान विपक्ष ने चुनाव आयोग से भारती घोष की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से करीबी की शिकायत की थी. इसके बाद उनका तबादला भी किया गया था. भारती घोष टीएमसी की अंदरूनी कार्यप्रणाली को जानती हैं. वह जानती हैं कि टीएमसी किस तरह से चुनावों के दौरान पुलिस का उपयोग कर साइंटिफिक रिगिंग करती है.

2016 के विधानसभा चुनावों के दौरान बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कोलकाता पुलिस कमिश्नदर राजीव कुमार पर जासूसी का आरोप लगाया था. उन्होंने राजीव कुमार को 'कोलकाता का जासूस पुलिसवाला' बताया था. शाह का आरोप था कि राजीव कुमार विपक्षी नेताओं की अवैध रूप से निगरानी रखते हैं और उनकी बातें रिकॉर्ड करते हैं. बीजेपी ने कई चुनावों के दौरान आरोप लगाया कि टीएमसी चुनावों को प्रभावित करने के लिए पुलिस का उपयोग करती है. दिलचस्प बात है कि जब बंगाल में वामपंथी सरकार थी तब ममता बनर्जी आरोप लगाया करती थी कि वाममोर्चा सरकार साइंटिफिक रिगिंग से चुनाव जीतती है.

गत दिनों टीएमसी से विष्णुपुर लोकसभा सीट से सांसद सौमित्र खान ने बीजेपी की सदस्यता ली. पिछले दिनों बंगाल से फिल्म अभिनेत्री मौसमी चटर्जी भी बीजेपी में शामिल हुईं थी. सौमित्र खान पहले कांग्रेस में थे. वह बांकुड़ा जिले में विधायक थे. 2014 चुनाव से पहले टीएमसी से जुड़ गए. टीएमसी के टिकट पर उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत भी गये. सांसद अनुपम हाजरा भी बीजेपी में शामिल होनेवाले हैं. यहीं कारण है कि टीएमसी ने उनको पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. उनके अलावा टीएमसी के कई नेता और जनप्रतिनिधि बीजेपी में शामिल होने की राह देख रहे हैं. मुकुल रॉय के अनुसार टीएमसी के नेता फर्जी मुकदमे के डर से चुप बैठे हैं. उचित समय पर वे भी बीजेपी के साथ आयेंगे. कई नेता बीजेपी के संपर्क में हैं. हालांकि अभी भी बंगाल के निचले स्तर के नेताओं का बीजेपी में शामिल होना जारी है.

राजनीतिक जानकारों के अनुसार बंगाल में चुनाव जीतने के लिए पुलिस की मदद जरूरी है. वाममोर्चा सरकार की हार में पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से टीएमसी की मदद की थी. चुनाव के दिन भी पुलिस की भूमिका काफी अहम होती है. अर्धसैनिक बल होते तो हैं लेकिन ताकत राज्या पुलिस के पास ही अधिक रहती है. पूर्व आइपीएस भारती घोष को ममता बनर्जी का बेहद करीबी पुलिस अधिकारी माना जाता था. भारती घोष टीएमसी सुप्रीमो को मां कहा करती थीं. अब वह बीजेपी के साथ हैं और टीएमसी को हराने में ममता बनर्जी की रणनीति को उन्हीं की पार्टी के खिलाफ उपयोग करेंगी.
 

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