20 जुलाई 2018, शुक्रवार | समय 12:41:54 Hrs
Republic Hindi Logo
Advertisement

तमिलनाडु: क्या निर्मला सीतारमण हो पायेंगी जयललिता का विकल्प

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 6/15/2018 11:05:07 AM
तमिलनाडु: क्या निर्मला सीतारमण हो पायेंगी जयललिता का विकल्प

चेन्नई: लोकसभा सीटों के हिसाब से देश के पांचवें सबसे बड़े राज्य तमिलनाडु में बीजेपी ने जयललिता के विकल्प के रूप में रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण को पेश करने की योजना बनायी है. निर्मला ही तमिलनाडु बीजेपी का चेहरा होंगी. साथ ही बीजेपी छोटे दलों को साथ लाने की रणनीति पर भी काम कर रही है. हालांकि आरक्षण के मुद्दे पर हुए बवाल से दलित व आदिवासी बीजेपी से नाराज हैं. इस वर्ग को नजरअंदाज इसलिए नहीं किया जा सकता कि दलित व आदिवासी आबादी यहां 22 फीसदी है, जो अल्पसंख्यकों की आबादी का लगभग दोगुना है.

फिलहाल राज्य की 39 लोकसभा में एआईएडीएमके के पास 37, बीजेपी के पास एक, पीएमके के पास एक, डीएमके और कांग्रेस के पास भी एक भी सीट नहीं है. इस राज्य में कावेरी जल विवाद, किसानों की दयनीय स्थिति और आंदोलन, तूतीकोरिन हिंसा में 13 लोगों की मौत ताजा राजनीतिक मुद्दे हैं.

रजनीकांत और कमल हसन फैक्टर

यहां लोग अभिनेता से नेता बनी ऐसी बड़ी शख्सियतों को वोट देने में जरा भी सोच-विचार नहीं करते, हालांकि अब ऐसा नहीं है. इसलिए दिक्कतें कमल हसन और रजनीकांत के लिए भी होंगी. रजनीकांत का झुकाव भी बीजेपी की ओर है. कमल हसन भी मक्कल निधि मय्यम नाम की पार्टी, झंडे और एक ऐप के साथ मैदान में हैं.

क्षेत्रीय दल मुख्य ध्रुव

दक्षिण में धर्म काफी कुछ तय करता है, लेकिन तमिलनाडु में जाति ज्यादा अहमियत रखती है. खासकर राज्य के मध्य तथा दक्षिणी हिस्से में. हालांकि यहां के लोगों में  क्षेत्रीय दलों के प्रति जनता का लगाव एक बहुत बड़ा फैक्टर है. लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस-बीजेपी को इन्हीं के कंधों पर सवार होकर मैदान में उतरना पड़ता है. जे जयललिता का एआईएडीएमके और एम करुणानिधि का डीएमके ही हर चुनाव में मुख्य ध्रुव होते हैं.

डीएमके को एआईएडीएमके में गुटबाजी से उम्मीद

डीएमके के नेताओं को 2019 के लोकसभा चुनाव में 2016 के विधानसभा चुनाव के बराबर वोट हासिल कर लेने का भरोसा है. तब पार्टी ने 31.6% वोट हासिल किए थे. इन्हें एआईएडीएमके से नाराज ‌वोटर्स के डीएमके के साथ आने की उम्मीद है. जया के निधन के बाद एआईएडीएमके में जिस तरह की गुटबाजी दिखाई दी है,  उससे पार्टी पर जनता का भरोसा कम हुआ है. 2016 के विधानसभा चुनावों में एआईएडीएमके का वोटशेयर 40.88% था.

राहुल गांधी भी तत्पर

कावेरी विवाद पर निष्क्रियता के कारण एआईएडीएमके के प्रति जनता की नाराजगी है. लोग इसे केंद्र का बीजेपी सरकार से जोड़कर देख रहे हैं. कावेरी जल बंटवारे से जुड़े विवाद के बाद गो बैक मोदी कैम्पेन भी चला था. कर्नाटक में सत्ता बरकरार रखकर उत्साहित राहुल गांधी भी तमिलनाडु के दौरे कर रहे हैं. बीजेपी की नाराजगी को भुनाने के लिए राहुल तत्पर हैं. वह तूतीकोरिन की घटना के लिए बीजेपी और आरएसएस को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.
 

Copyright © 2018 Shailputri Media Private Limited. All Rights Reserved.

Designed by: 4C Plus