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महाराष्ट्र कहीं भाजपा की डूबते नैया की शुरुआत तो नहीं

By Republichindi desk | Publish Date: 11/27/2019 1:41:39 PM
महाराष्ट्र कहीं भाजपा की डूबते नैया की शुरुआत तो नहीं

रिपब्लिक डेस्कः महाराष्ट्र में रातों-रात राष्ट्रपति शासन हटवाकर बनी भाजपा की सरकार को मंगलवार संविधान दिवस के मौके पर मैदान छोड़ कर भागना पड़ा. जब डिप्टी सीएम पद से अजित पवार ने इस्तीफा दिया जिसके कुछ ही देर बाद देवेन्द्र फडणवीस ने भी सीएम पद से इस्तीफा दे दिया. ऐसे में भाजपा की स्थिति को देखकर ये साफ हो रहा है कि महाराष्ट्र में उनकी दाल नहीं गलने वाली है. वहीं एक बात और सामने आती है जब हम आंकड़ों की ओर गौर करते हैं तो पता चलता है कि भाजपा का चढता रंग पहले के मुकाबले अब फीका होता दिख रहा है. जब हम 2017 के आंकड़ों पर गौर करते हैं तो देश की 72% आबादी वाले क्षेत्र पर एनडीए शासन था. लेकिन 2019 में 41% पर ही इसका राज बचा है. 11 महीने में एनडीए ने 4 बड़े राज्यों में सत्ता गंवाई है. ऐसे में महाराष्ट्र में भाजपा की ऐसी शर्मनाक हार काफी कुछ कहती दिख रही है.

जब 2019 के लोकसभा चुनाव में जिस भाजपा को कई गठबंधन पार्टियां मिलकर हिला नहीं पायी, वो भाजपा महाराष्ट्र में मुंह के बल गिर गई. महराष्ट्र में चल रही मौजूदा राजनीति को देखकर ये साफ हो गया है कि वहां भाजपा की दबंगई नहीं चलने वाली. वही इस पूरे मुद्दे में सबसे बुर्जुग राजनीतिक खिलाड़ी शरद पवार एक कुशल चाणक्य बनकर उभरे हैं. हालांकि 2014 से ही भाजपा की केन्द्र में सत्ता आने के बाद अमित शाह राजनीति चाणक्य के रुप में नजर आ रहे थे, लेकिन महाराष्ट्र में शरद पवार की एक हुंकार ने अमित शाह की राजनीति को मात देते हुए फिर से शरद को कुशल चाणक्य के रुप में उभार दिया है.

78 घंटे की भाजपा की सरकार ने राजनीतिक का असली रुप सबके सामने लाकर रख दिया. हालांकि शनिवार को जब सुबह भाजपा नेता देवेन्द्र फडणवीस सीएम पद और अजित पवार डिप्टी सीएम पद की शपथ ले रहे थे. तब हर कोई आश्चर्यचकित था कि आखिरकार हो क्या रहा है, लेकिन उस वक्त शरद पवार ने हार नहीं मानी. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की मदद ली. वहीं, जब सुप्रीम कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट की बात कही, भाजपा नेताओं में फिर से उथल-पुथल मच गई थी. जिसके बाद शरद पवार ने अपने भतीजे अजित पवार से टेलीफोनिक बातचीत कर उन्हें मामले को लेकर समझाया ही नहीं बल्कि भविष्य के लिए चेताया भी. जिसके बाद अजित ने अपना इस्तीफा दे दिया. वहीं, अजित पवार का साथ छूटने के बाद देवेन्द्र फडणवीस ने भी सीएम पद से इस्तीफा दे दिया. वहीं, दोनों नेताओं के त्यागपत्र के बाद भाजपा का सोशल मीडिया में काफी मखौल भी उड़ा, लेकिन अजित फिर से अपने घर आकर घर की बोली बोलने लगे. अजीत पवार ने बुधवार को मीडिया से मुखातिब हो कहा कि वो एनसीपी में हैं और आगे भी एनसीपी के साथ ही रहेंगे. इन सभी बातों से ये जरूर साफ होता है कि भले ही शरद पवार एक बुजुर्ग नेता रहे हों लेकिन जब वो खुद पे आ जायें तो केन्द्रीय सत्ताधारी पार्टी को भी मात दे सकते है.

खैर! इन सब के बाद जब हम आंकड़ों की ओर गौर करें तो मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में सत्ता जाने से भाजपा 41% आबादी तक सीमित हो गई है. हालांकि, मिजोरम और सिक्किम एनडीए के खाते में आए. अब 17 राज्यों में एनडीए सरकार है। 13 में भाजपा और 4 में सहयोगी दलों के सीएम हैं. ऐसी परिस्थिति में ये साफ हो गया है कि शायद ये शुरुआत हो भाजपा के नैया के डूबने की.
 

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