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जानिये रिजर्व बैंक के पास कितना है भंडार, कितना है सरप्लस, राहुल क्यों उठा रहे सवाल

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 8/27/2019 1:26:02 PM
जानिये रिजर्व बैंक के पास कितना है भंडार, कितना है सरप्लस, राहुल क्यों उठा रहे सवाल

रिपब्लिक डेस्क: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपने खजाने से सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये की राशि देने का निर्णय लिया है.  इसमें से 1.23 लाख करोड़ रुपये वित्त वर्ष 2018-19 के सरप्लस (अधिशेष) के रूप में और 52,637 करोड़ रुपये रिजर्व से दिए जाएंगे. आरबीआई की ओर से सरकार को दी गई यह अब तक की सबसे बड़ी राशि होगी. पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अगुआई वाली कमेटी की सिफारिशों को आरबीआई की बोर्ड मीटिंग में स्वीकार कर लिया गया.
ऐसे में आम लोगों का सवाल है कि रिजर्व बैंक के पास कितना धन या खजाना है और उसमें से कितना रिजर्व में होना चाहिए और कितना सरप्लस या अतितरिक्त होता है जिस वह दे सकता है.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के वर्ष 2017-18 के आंकड़ों के अनुसार, उसके बहीखाते में 36.2 लाख करोड़ रुपये की रकम है. हालांकि रिजर्व बैंक का बहीखाता किसी कंपनी की तरह पूरी तरह मुनाफे का नहीं होता. वह जितना करेंसी नोट छापता है उसका आधा से ज्यादा हिस्सा लायबिलिटी यानी देनदारी के रूप में होता है. खजाने का 26 फीसदी हिस्सा रिजर्व बैंक का सरप्लस रिजर्व होता है. यह सरप्लस असल में विदेशी या भारत सरकार की प्रतिभूतियों और गोल्ड में निवेश के रूप में होता है. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, रिजर्व बैंक के पास करीब 566 टन सोना है. कुल खजाने का करीब 77 फीसदी हिस्सा विदेशी एसेट और रिजर्व के रूप में है. इसको लेकर रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय मं1 मतभेद भी रहा है कि उसके पास कितना रिजर्व होना चाहिए.

कितना है रिजर्व फंड

रिजर्व बैंक के पास दो तरह के रिजर्व होते हैं करेंसी ऐंड गोल्ड रीवैल्यूएशन अकाउंट (CGRA) और कॉन्टि जेंसी फंड यानी आपात निधि. रिजर्व में सबसे बड़ा हिस्सा CGRA का होता है. वर्ष 2017-18 में इसके तहत कुल 6.9 लाख करोड़ रुपये थे. यह उस गोल्ड और विदेशी करेंसी की वैल्यू है जो भारत की तरफ से रिजर्व बैंक के पास रहता है. बाजार के हिसाब से इस वैल्यू में उतार-चढ़ाव होता रहता है. कॉन्टिकजेंसी फंड या आपात निधि रिजर्व बैंक के पास मौजूद ऐसी राशि होती है, मौद्रिक नीति या एक्सचेंज रेट में बदलाव के समय जिसकी जरूरत पड़ सकती है. वर्ष 2017-18 में रिजर्व बैंक के कॉन्टिंजेंसी फंड में 2.32 लाख करोड़ रुपये थे.

रिजर्व बैंक की सरप्लस राशि

रिजर्व बैंक का सरप्लस या अधिशेष राशि वह होती है जो वह सरकार को दे सकता है. रिजर्व बैंक को अपनी आय में किसी तरह का इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता. इसलिए अपनी जरूरतें पूरी करने, जरूरी प्रावधान और जरूरी निवेश के बाद जो राशि बचती है वह सरप्लस फंड होती है जिसे उसे सरकार को देना होता है. रिजर्व बैंक को आय मुख्यत: सिक्यूरिटीज यानी प्रतिभूतियों में निवेश पर मिलने वाली ब्याज से होता है. रिजर्व बैंक ने वर्ष 2017-18 में 14,200 करोड़ रुपये कॉन्टिजेंसी फंड के लिए तय किए थे. जितना ज्यादा इस फंड के लिए प्रोविजनिंग की जाती है, रिजर्व बैंक का सरप्लस उतना ही कम हो जाता है. वर्ष 2018-19 में रिजर्व बैंक ने 1,23,414 करोड़ रुपये का सरप्लस सरकार को देना तय किया है.

सरकार के इस कदम पर कांग्रेस ने सवाल उठाये हैं. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा है कि केंद्र सरकार के पास आर्थिक संकट से निकलने का समाधान ही नहीं है.

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