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भारत की आयरन लेडी ने आकाश से पाताल तक मनवाया था लोहा

By Republichindi desk | Publish Date: 11/19/2018 7:54:21 AM
भारत की आयरन लेडी ने आकाश से पाताल तक मनवाया था लोहा

सत्येंद्र प्रताप सिंह : दुनिया में इंदिरा गांधी अकेली वह महिला हैं, जिन्होंने न केवल अपने देश में बल्कि विदेश में भी अपनी मजबूती और इरादों के डंके बजवाए हैं. चाहे परमाणु परीक्षण के दौरान बुद्धा स्माइलिंग की बात हो या फिर पाकिस्तान के अत्याचार से जूझ रहे बांग्लादेश को आजाद कराने की या फिर आपातकाल और अंतरिक्ष में अमेरिका को अपनी मजबूती दिखाने की, हर जगह इंदिरा गांधी का डंका बजा है. दरअसल, वह इंदिरा गांधी ही थीं, जिनके बुलंद हौसलों के आगे पूरी दुनिया ने घुटने टेके थे. यह उनके बुलंद हौसले ही थे जिसकी बदौलत बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आया. यही नहीं उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी देशों के मुकाबले में खुद को अग्रणी बनाए रखने के लिए कई ऐसी पहल की जिसने दुनिया में भारत को नंबर एक बनाने की ओर पहला कदम बढ़ाया.

 
दुनिया यूं ही नहीं याद रखती है
 
अंतरिक्ष में अपना झंडा स्क्वाड्रन लीडर राकेश शर्मा के रूप में फहरवाने वाली इंदिरा गांधी ही थीं. जब राकेश शर्मा से वो बात करते हुए पूछी  कि अंतरिक्ष से भारत कैसा लग रहा है तो उन्होंने कहा था 'सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा.' वह इंदिरा गांधी ही थीं, जिन्होंने सत्ता से बाहर फेंके जाने के डर के बाद भी पंजाब में फैले उग्रवाद को उखाड़ फेंकने के लिए कड़े फैसले लिए और ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया और स्वर्ण मंदिर तक सेना भेजी. 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच जंग और इंदिरा गांधी के साहसिक फैसले को दुनिया यूं ही नहीं याद रखती है. 1971 की लड़ाई के बाद दुनिया के नक्शे पर बांग्लादेश का उदय हुआ. तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान को पश्चिमी पाकिस्तान के शासक अपना हिस्सा नहीं मानते थे, बल्कि उपनिवेश के तौर पर देखते थे. 
 
चुप्पी का मतलब ही नहीं 
 
पाकिस्तान की सेना अपने ही नागरिकों पर जुल्म ढा रही थी. इन सब हालात में पूर्वी पाकिस्तान के लोगों और नेताओं ने भारत से मदद मांगी. इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार ने मदद देने का फैसला किया. इंदिरा गांधी ने तथ्यों का हवाला देकर बताया कि भारत सरकार का फैसला तर्कसंगत था. उनका कहना था कि उस समय चुप्पी का मतलब ही नहीं था.
 
शक्ति को देख दुनिया चौंक गई
 
दिन 18 मई 1974 था जब भारत परमाणु शक्ति बना. गरीब और सपेरों का देश कहे जाना वाले भारत की शक्ति को देख दुनिया चौंक गई. भारत अब परमाणु शक्ति से संपन्न राष्ट्र था. भारत जिस समय तरक्की की नई इबारत लिख रहा था उस वक्त अमेरिका, वियतनाम जैसे शक्तिशाली देश युद्ध में उलझे हुए थे. लिहाजा भारत के परमाणु परीक्षण की तरफ उसका ध्यान उस वक्त गया, जब भारत ने खुद को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित किया. अमेरिका इस बात से परेशान था कि उसकी खुफिया एजेंसियां कैसे यह बात पता लगाने में पिछड़ गईं. फिर उसने अपनी शक्ति का दबदबा बनाए रखने के लिए भारत पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए जिसे इंदिरा गांधी ने न केवल स्वीकार किया बल्कि उसे चुनौती के आगे भी निकलीं. 
 
जो बाद में मौत का कारण भी बना
 
वो इंदिरा ही थीं जिसने पंजाब में फैले उग्रवाद को समाप्त करने के लिए ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया और 1984 में स्वर्ण मंदिर पर कब्जा किए उग्रवादियों को निकाल फेंकने के लिए कड़े फैंसले लिए. उन्होंने पवित्र स्थल से उग्रवादियों को बाहर निकाला, जो बाद में उनकी मौत का कारण भी बना. स्वर्ण मंदिर परिसर पर जरनैल सिंह भिंडरावाला, कोर्ट मार्शल किए गए मेजर जनरल सुभेग सिंह और सिख सटूडेंट्स फेडरेशन ने चारों तरफ मोर्चाबंदी कर ली थी. उन्होंने भारी मात्रा में आधुनिक हथियार और गोला-बारूद भी जमा कर लिया था. इंदिरा आम चुनाव से पहले पंजाब में शांति चाहती थीं, लेकिन ऑपरेशन ब्लू स्टार से सिक्खों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं. इंदिरा ने पंजाब आने-जाने वाली सभी यातायात सेवाओं पर रोक लगाई. फोन कोट दिए गए, पूरी तैयारी के बाद विदेशी मीडिया को राज्य के बाहर किया गया. और फिर 3 जून को भारतीय सेना की एक टुकड़ी ने स्वर्ण मंदिर परिसर को घेरा और पूरे शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया. चूंकि पूरे मंदिर में खालिस्तानी आंतकियों का बोलबाला था इसलिए पूरे मंदिर में असलहों का अंदाजा लगाने के लिए मंदिर परिसर में जमकर भारतीय सेना ने गोलीबारी की.

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