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कर्जमाफी की होड़: कांग्रेस के बाद अब बीजेपी की बारी

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 12/19/2018 11:25:38 AM
कर्जमाफी की होड़: कांग्रेस के बाद अब बीजेपी की बारी

रिपब्लिक डेस्क: चुनावी आबोहवा की धमक सुनायी देने लगी हैं. रेवड़िया भी बंटनी शुरू हो गयी है. तीन राज्यों में किला फतह कर चुकी कांग्रेस ने चुनावी वायदे को पूरा करने के लिए किसानों की कर्जमाफी की है. अब बीजेपी कहां पीछे रहनेवाली है उसने भी किसान हितैषी बनने की दौड़ में खुद को आगे करने की ठान ली है. अब लोकसभा चुनाव तक जनता के हितों के लिए राजनीतिक पार्टियां खूब काम करनेवाली हैं या यूं कहिये कि काम करने का दिखावा करनेवाली हैं.

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार द्वारा शपथ ग्रहण करने के तुरंत बाद किसानों की कर्जमाफी की फाइल पर हस्ताक्षर किया गया. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलमनाथ और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किसानों के कर्ज माफ कर दिए. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कर्ज माफी को बड़ा मुद्दा बनाने की घोषणा भी कर डाली है. उन्होंने मीडिया को बताया कि जब तक पूरे देश में किसानों का कर्जा नहीं माफ करायेंगे तब तक पीएम नरेंद्र मोदी को सोने नहीं देंगे.

बीजेपी भी चली कांग्रेस की राह

कर्जमाफी की राह पर अब बीजेपी भी चलती दिख रही है. गुजरात में सीएम विजय रूपाणी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने 6 लाख ग्रामीणों का 625 करोड़ रुपये का बकाया बिजली बिल माफ करने की घोषणा की है. असम सरकार ने भी 600 करोड़ रुपये का कृषि कर्ज माफ करने की बात कही है. मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा एक दिन पहले ही कृषि कर्ज माफी की घोषणा के एक दिन बाद गुजरात सरकार और असम सरकार ने यह कदम उठाया है.

गुजरात में 625 करोड़ माफ

गांधीनगर में गुजरात के बिजली मंत्री सौरभ पटेल ने मीडिया से कहा कि सरकार की इस योजना का लाभ उन लोगों को भी मिलेगा जिनके खिलाफ बिजली चोरी के मुकदमे दर्ज हैं और उनके बिजली कनेक्शन काट दिए गए हैं. इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग केवल 500 रुपये का भुगतान करके बिजली कनेक्शन वापस ले सकते हैं. उन्होंने कहा कि "बिजली बिलों का समय पर भुगतान नहीं करने को लेकर हमने ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 6.20 लाख लोगों के बिजली कनेक्शन काटे हैं. इन बिजली बिलों की बकाया राशि करीब 625 करोड़ रुपये है. अब हमारी सरकार ने फैसला लिया है कि बकाया बिलों की यह राशि माफ कर दी जाए." उन्होंने कहा कि इस एकमुश्त समाधान योजना के तहत उपभोक्ता केवल 500 रुपये चुकाकर अपने कृषि, घरेलू और वाणिज्यक बिजली कनेक्शन वापस प्राप्त कर सकते हैं. राजकोट जिले की जसदन विधानसभा सीट पर 20 दिसंबर को होने वाले उपचुनाव से पहले गुजरात सरकार की यह घोषणा सामने आई है.

असम में भी होगी किसानों की कर्ज माफी

असम सरकार ने 600 करोड़ रुपये के कृषि कर्ज माफ करने को मंजूरी दे दी है. इससे राज्य में आठ लाख किसानों को लाभ होगा. असम सरकार के प्रवक्ता और संसदीय मामलों के मंत्री चंद्र मोहन पटवारी ने कहा कि योजना के तहत सरकार किसानों के 25 प्रतिशत तक कर्ज बट्टे खाते में डालेगी. इसकी अधिकतम सीमा 25,000 रुपये है। इस माफी में सभी प्रकार के कृषि कर्ज शामिल हैं. यह कृषि कर्ज माफी उन सभी कर्ज पर लागू होंगे जो किसानों ने क्रेडिट कार्ड के जरिये तथा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से लिये हैं. उन्होंने कहा कि सरकार ने ब्याज राहत योजना की भी मंजूरी दी है. इसके तहत करीब 19 लाख किसान अगले वित्त वर्ष से शून्य ब्याज दर पर कर्ज ले सकेंगे. सोमवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय किया गया. कर्ज राहत योजना के तहत किसानों के अबतक लिये गये कर्ज में से 25 प्रतिशत को माफ किया जाएगा. अधिकतम लाभ 25,000 रुपये तक है. इस योजना से करीब आठ लाख किसानों को तत्काल लाभ होगा.
 

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