26 अगस्त 2019, सोमवार | समय 05:48:15 Hrs
Republic Hindi Logo

मिशन कश्मीर:दाद दीजिए मोदी और शाह के हिम्मत की

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 8/7/2019 6:09:43 PM
मिशन कश्मीर:दाद दीजिए मोदी और शाह के हिम्मत की

रिपब्लिक डेस्क: जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा संबंधी अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करने के प्रस्ताव संबंधी संकल्प और जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित करने वाले विधेयक को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंजूरी दे दी. अब इसे कानूनी तौर पर लागू किया जा सकेगा. इससे पहले संसद ने भी इस विधेयक पर अपनी मुहर लगा दी है. लंबे समय से जारी अटकलों को विराम देते हुए केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को दिए विशेष दर्जे को तुरंत समाप्त कर दिया, राज्यसभा में राज्य पुनर्गठन कानून पारित भी हो गया है. इसके साथ राज्य में लागू  35ए समेत विशेष नागरिकता के अन्य अधिकार समाप्त हो गये. केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 से संबंधित राजाज्ञा जारी करने के बाद संविधान के सभी प्रावधान जम्मू-कश्मीर में बराबरी से लागू हो गये हैं.

इसे लागू करने के लिए जो विधि अपनायी गयी उसके लिए पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह  की हिम्मत की दाद देनी होगी. संविधान की जिस धारा को समाप्त किए जाने को लेकर पिछले साठ सालों से जो वाद-विवाद हो रहा था, उसे नरेंद्र मोदी सरकार ने समाप्त कर दिया. गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में आर्टिकल370 ख़तम करने का संकल्प पत्र पेश किया तो विपक्ष हतप्रभ था. हालांकि कुछ विपक्षी दलों ने भी इसे समर्थन देकर मोदी सरकार के हौसले को बढ़ा दिया. इससे पहले राष्ट्रपति ने 1954 के संविधान संशोधन आदेश को खत्म करने से संबंधित अध्यादेश जारी कर दिया. अमित शाह ने धारा 370 समाप्त करने के संकल्प पत्र के साथ-साथ लद्दाख को बिना विधानसभा के अलग केंद्रशासित राज्य बनाने की घोषणा कर दी. वहीं जम्मू कश्मीर को विधानसभा सहित केंद्रशासित राज्य बनाने की घोषणा की गई. 

उसके साथ जम्मू-कश्मीर में भारतीय संसद द्वारा पारित सभी कानून और सर्वोच्च न्यायालय के सभी आदेश भी अब लागू हो सकेंगे. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग केंद्र शासित प्रदेश तभी बनेंगे जब राज्य पुनर्गठन विधेयक को लोकसभा में पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाय. इस कानून के लागू होने के बाद जम्मू-कश्मीर राज्य में पुड्डुचेरी की तर्ज पर विधानसभा होगी और उपराज्यपाल के अधीन मुख्यमंत्री रहेगा.

वहीं लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश की स्थिति चंडीगढ़ की तरह रहेगी, जहां विधानसभा ही नहीं होगी. अनुच्छेद 370 को समाप्त किए बगैर इसके नासूर को खत्म करने से सही अर्थों में कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक हो गया है. संविधान संशोधन विधेयक की प्रति पहले से सांसदों को न दिए जाने और आनन-फानन में इस कानून को पारित कराने के प्रयासों की वजह से इसे संसदीय व्यवस्था के लिए आघात बताया जा रहा है. हालींकि अब ऐसे सवाल बेमानी हो गये हैं, लेकिन वर्ष 1954 में बगैर संविधान संशोधन के जब अनुच्छेद 35ए को लागू किया गया था, तब ऐसे सवाल क्यों नहीं उठाए गए? जो लोग अनुच्छेद 370 को भारत और कश्मीर के बीच पुल बताते हैं, उन्हें संविधान में लिखे वे शब्द क्यों नहीं दिखते, जहां सबसे ऊपर ही इस कानून को अस्थायी बताया गया है? दरअसल 35ए सही अर्थों में कानून नहीं एक राजनीतिक जुगाड़ था, जिसका इस प्रकार की सामरिक और विधिक रणनीति से ही अंत किया जा सकता था.

कश्मीर में विशेष राज्य का दर्जा समाप्त होते ही अलगाववादी शक्तियों की दुकानें अब बंद हो जाएंगी और तुष्टीकरण का अंत होगा. केंद्र शासित प्रदेश बनने से राजनेताओं के सामंती परिवारवाद का कुचक्र भी खत्म होगा. अशांति, आतंकवाद और उग्रवाद की आड़ में सरकारी खजाने की बंदरबांट और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी. इस कदम के बाद कश्मीर में पाकिस्तान के हस्तक्षेप में कमी आएगी और लंबे समय में आतंकवाद पर भी लगाम लगेगी. पलायन करके भागे लाखों हिंदू परिवार यदि पुनर्गठित राज्य में लौट सकें तो उनके मानवाधिकारों का सम्मान होगा. महिलाओं को समान अधिकार मिलने से सामाजिक समानता बढ़ेगी. कट्टरता और अलगाववाद में कमी आने से कश्मीरियत और सूफी संस्कृति का विकास होगा. कश्मीर के पेच को सामरिक और विधिक कुशलता से हल करके अमित शाह ने गृह मंत्री के तौर पर विलक्षणता को साबित किया है.

अनुच्छेद 370 पर नए कानून से भाजपा ने अपने घोषणापत्र में किया वादा पूरा किया है, और इसको लोकतांत्रिक जवाबदेही की सफलता के तौर पर देखे जाने की जरूरत है. पाक अधिकृत कश्मीर को वापस लेने के लिए अब भारत को पाकिस्तान पर और संयुक्त राष्ट्र संघ के मंच पर और ज्यादा जवाबी दबाव बनाने की जरूरत है. नए कानून से देश के सभी हिस्सों के नागरिकों को बराबरी का हक मिलेगा, जो संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत देश के सभी लोगों का सांविधानिक अधिकार भी है. एक देश, एक टैक्स के बाद अब एक देश एक विधान को लागू करने से संविधान में दी गई राष्ट्र की भौगोलिक अवधारणा साकार हो रही है. परंतु ताकतवर केंद्र से उपजे नए भूगोल को अब सशक्त अर्थव्यवस्था और सामजिक समरसता के माध्यम से सशक्त राष्ट्र में बदलने की चुनौती, सरकार के सामने अब भी बाकी है.

कश्मीर का विकास नहीं हुआ, इससे यहां गरीबी और बेरोजगारी खासी है, यह एक सच्चाई रही. यहां के क्षेत्रीय दलों ने कश्मीर के लोगों को भावनाओं को भड़काया, लेकिन उनकी गरीबी दूर नहीं की. उनके घरों के बच्चे विदेशों में पढ़ते हैं, आमजन के बच्चे आतंकी बनते हैं. एक तबके का तर्क यही था कि धारा370 और 35 ए जम्मू कश्मीर के पिछड़ेपन का कारण रही है. इन दो धाराओं के कारण यहां कॉरपोरेट का निवेश नहीं आया, क्योंकि 35 ए के कारण कॉरपोरेट सेक्टर यहां जमीन खरीद नहीं सकता था. कोई बिजनेस खड़ा नहीं कर सकता था. निजी निवेश से  स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता, लेकिन धारा 370 और 35 ए बीच में बाधा थे. अब जम्मू कश्मीर भी अन्य राज्यों के साथ कदम से कदम मिला कर चल पायेगा.
 

Copyright © 2018 Shailputri Media Private Limited. All Rights Reserved.

Designed by: 4C Plus