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एके साधे सब सधै-चुनाव की तारीखों पर यूं ही नहीं उठ रहे सवाल

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 3/11/2019 1:33:33 PM
एके साधे सब सधै-चुनाव की तारीखों पर यूं ही नहीं उठ रहे सवाल

रिपब्लिक डेस्क: लोकसभा चुनाव 2019 की तारीखों की घोषणा के साथ ही तारीखों को लेकर सवाल खड़े किये जा रहे हैं. 11 अप्रैल को चैती छठ के दिन चुनाव की तिथि है तो रमजान के महीने में भी मतदान की तिथि है. इसे लेकर विपक्षी पार्टियों के नेता चुनाव आयोग पर सवाल खड़े कर रहे हैं तो सत्ता पक्ष के लोग विपक्ष की मनसा पर संदेह कर रहे हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में 9 चरणों मंक मतदान हुआ था जबकि इस बार 7 चरणों में मतदान होना है. विपक्ष के साथ राजनीतिक जानकारों का भी मानना है कि इस बार के मतदान की तारीखें सत्ताधारी पार्टी को रास आनेवाली हैं. दबी जुबान में तो यह भी कहा जा रहै कि एके साधे सब सधै का फॉर्मुला अपनाया गया है.

पक्ष-विपक्ष की प्रतिक्रिया

कोलकाता के मेयर और टीएमसी के वरिष्ठ नेता फरहाद हकीम ने कहा कि बिहार, यूपी और बंगाल में सात चरण में चुनाव होने हैं और इन तीनों राज्यों में अल्पसंख्यक आबादी काफी ज्यादा है. उन्होंने कहा कि रमजान के दौरान कैसे वोटिंग कर सकेंगे. चुनाव आयोग को इसका ध्यान रखना चाहिए था. मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि  चुनाव पांच साल में होते हैं और इस बार भी चुनाव समय से हो रहे हैं. इससे खुशी की बात क्या हो सकती है. चुनाव टालने का कोई कारण नहीं है. विपक्ष पहले से ही हार की भूमिका तैयार कर रहा है. वहीं AIMIM नेता असद्दुदीन ओवैसी ने इस पर कहा कि हम रोजे के दौरान अन्य काम कर सकते हैं तो चुनाव में मतदान भी कर सकते हैं. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि चुनाव समय से हो रहे हैं. जनता पीएम नरेंद्र मोदी का अभिनंदन करने के लिए तैयार है. चुनाव आयोग पर सवाल उठानेवालों पर संदेह होता है.

चुनाव विश्लेषकों की राय

उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा 7 चरण में मतदान होगा, जबकि ओडिशा, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में 4 चरण में मतदान होने हैं. विपक्ष का मानना है कि चुनाव की तारीखें भारतीय जनता पार्टी के अनुकूल हैं, क्योंकि जिन राज्यों  में पार्टी को उम्मीद या चुनौती ज्यादा है वहां मतदान कई चरणों में होने हैं. चुनाव विश्लेषक और स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने पश्चिम बंगाल में 5 चरण के बजाए 7 चरण, ओडिशा में 2 चरण की जगह 4 चरण और महाराष्ट्र में 4 चरण में मतदान कराए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं. साथ ही योगेंद्र यादव ने दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के चुनाव मई में कराए जाने को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं. तो वहीं जम्मू-कश्मीर में लोकसभा चुनाव तो हो रहे हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव नहीं कराए जाने पर भी सवाल खड़े किए गए हैं.
योगेंद्र यादव के अलावा आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने ट्वीट में लिखा कि क्या मोदी जी ने अपने चुनाव प्रचार की तारीख़ चुनाव आयोग को भेजी और चुनाव आयोग ने उनके हिसाब से चुनाव की तारीखें घोषित की? कभी सुना है बंगाल में 7 फेज में चुनाव? बीजेपी ने चुनाव आयोग को ही वश में कर लिया है. आरजेडी सांसद मनोज झा ने चुनाव आयोग की आलोचना करते हुए कहा कि जिस तरह से तारीखें घोषित की गई हैं उससे संसाधन संपन्न दल के पक्ष में चुनाव को झुकाने की कोशिश की गई है. संसाधन से संपन्न दल आज के तारीख में कौन हैं, यह समझने के लिए आपको रॉकेट साइंस नहीं चाहिए. प्रधानमंत्री के एक मंच पर करोड़ों रुपए का खर्च होता है.

बीजेपी की रणनीति

लोकसभा चुनाव में यूपी की 71 सीटें जीतने वाली बीजेपी के सामने अपना प्रदर्शन दोहराने की चुनौती है. बीजेपी उत्तर और पश्चिम भारत में होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के राज्यों से करना चाहती है. बिहार में राज्य और केंद्र दोनों के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर एनडीए को ही झेलनी पड़ेगी. वहीं आरजेडी-कांग्रेस-आरएलएसपी, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तान आवाम मोर्चा, शरद यादव की पार्टी के साथ विपक्ष भी मजबूती के साथ चुनौती देने के लिए तैयार बैठा है. महाराष्ट्र में राज्य और केंद्र सरकार का विरोध करने वाली शिवसेना ने आखिरकार बीजेपी से गठबंधन कर लिया है. इस गठबंधन में 25 सीटों पर बीजेपी और 23 सीटों पर शिवसेना का लड़ना तय हुआ है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने इस बार महाराष्ट्र की 45 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है. एक सत्य यह भी है मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सरकार के 4 साल पूरे हो चुके हैं. तो वहीं राज्य का एक हिस्सा भयंकर सूखे की मार झेल रहा है. पिछले कुछ समय में राज्य में कई बड़े किसान आंदोलनों ने फडणवीस सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की है. विपक्ष केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर का फायदा उठाना चाहेगा. उड़ीसा में भी बीजेपी बेहतर करने की आस पाले हुए है.
 

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