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सोनिया से करिश्मायी उम्मीद लगाये हैं कांग्रेसी, 2004 के दौर की याद आयी

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 9/14/2019 11:18:11 AM
सोनिया से करिश्मायी उम्मीद लगाये हैं कांग्रेसी, 2004 के दौर की याद आयी

रिपब्लिक डेस्क: कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से कांग्रेसियों में उम्मीद जगी है. सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस महासचिवों, प्रदेश प्रभारियों, प्रदेश अध्यक्षों और विधायक दल के नेताओं की बैठक में शामिल नेताओं के अनुसार सोनिया के नेतृत्व को देखकर 2004 के पहले की कांग्रेस की याद आ गयी. बैठक के बाद एक युवा नेता के अनुसार सोनिया गांधी यह संदेश देने में सफल रही कि सफलता हमेशा संघर्ष के बाद ही मिलती है.

इसके बाद कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद सोनिया गांधी ने शुक्रवार को बुलाई कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में भी दिखा दिया कि पार्टी में सीनियर जूनियर के बीच मतभेदों को तरजीह नहीं दी जायेगी. शुक्रवार को बुलाई मुख्यमंत्रियों की बैठक में सचिन पायलट  के शामिल होने के साथ ही राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री पायलट के बीच जारी गतिरोध फिर से सार्वजनिक हो गया है. मिली ख़बरों के मुताबिक मुख्यमंत्रियों की इस बैठक में शामिल होने के लिए गुरुवार शाम को पायलट ने सोनिया से मुलाकात कर विशेष आग्रह किया था.

मध्य प्रदेश, राजस्थान और पंजाब में कांग्रेस नेताओं के बीच आपसी टकराव को दूर करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि चुनावी घोषणापत्र के वादों को त्वरित एवं सुचारू रूप से पूरा करने और इनकी निगरानी के लिए समन्वय समिति जैसी प्रभावी व्यवस्था बनायी जाएगी. पार्टी संगठन और सरकार के बीच बेहतर संतुलन बनाने के मकसद से पंजाब, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और पुडुचेरी में ये प्रभावी व्यवस्था बनाने का फैसला किया है. कांग्रेस महासचिव अविनाश पांडे ने बताया कि पिछले विधानसभा चुनाव में घोषणापत्र में जो भी वादे किए गए थे उसमें क्या प्रगति हुई है, इस बारे में सभी मुख्यमंत्रियों ने जानकारी दी.

उन्होंने कहा कि प्रदेश के अंदर में समन्वय समिति की स्थापना की जाएगी जिससे ये घोषणापत्र के कार्यक्रम को तेजी से और सुचारू रूप से आगे बढ़ाया जा सके. पार्टी की ओर से जारी बयान के मुताबिक सोनिया गांधी ने विधानसभा चुनावों में किए वादों को पूरा करने एवं इनकी निगरानी के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की जरूरत पर जोर दिया.

अर्थव्यवस्था में सुस्ती के कारण पैदा हुए हालात से निपटने के लिए कांग्रेस शासित राज्यों द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में भी इस बैठक में चर्चा की गई. सोनिया के आवास पर हुयी इस बैठक में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी ने भाग लिया.
 

आगामी 3 राज्यों के चुनाव की रणनीति के लिए सोनिया ने वरिष्ठ नेताओं के साथ गुरुवार को भी बैठक की थी. इसके बाद अगले दिन के लिए कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ अपने आवास 10 जनपथ पर बैठक बुलाई. सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर राजस्थान के उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट भी मौजूद थे क्योंकि पायलट ने शुक्रवार शाम सोनिया गांधी से मुलाकात कर खुद को शामिल किए जाने का विशेष आग्रह किया था. हालांकि अशोक गहलोत ऐसा नहीं चाहते थे.

करीब एक साल आठ माह बाद कांग्रेस अध्यक्ष की दोबारा जिम्मेदारी संभालने के बाद सोनिया गांधी की गुरुवार को पार्टी पदाधिकारियों के साथ पहली बैठक थी. करीब चार घंटे तक चली इस बैठक में सोनिया गांधी ने सभी नेताओं की बात सुनी और अपनी राय भी रखी. बैठक के बाद एक पदाधिकारी ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि हम 2004 के चुनाव से पहले के माहौल में हैं. अपनी गलतियों से सबक लेते हुए नई रणनीति बना रहे हैं.

इसके पहले पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी यह संदेश देने में सफल रही कि सड़क पर संघर्ष के बगैर सत्ता तक पहुंचना मुमकिन नहीं है. वहीं, आरएसएस से मुकाबले के लिए अपनी विचारधारा को मजबूत करना होगा. बूथ से प्रदेश तक कार्यकर्ताओं की फौज खड़ी करनी होगी. इसलिए, जिम्मेदारी संभालते ही उन्होंने प्रशिक्षण पर जोर दिया. पार्टी के एक नेता ने कहा कि बैठक में पहले के मुकाबले अधिक सक्रियता थी.

सोनिया गांधी ने बैठक में हर पदाधिकारी की बात सुनने की कोशिश की. चर्चा के दौरान उन्होंने पदाधिकारियों से सवाल भी किए और उनके प्रश्नों के जवाब भी दिए. पार्टी नेता मानते हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष ने जिस तरह अपनी दूसरी पारी की शुरुआत की है, उससे पार्टी नेतृत्व व नेताओं और नेताओं व कार्यकर्ताओं के बीच संवाद बढेगा. इससे संगठन को मजबूती मिलेगी और नेताओं व कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ेगा.

 

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