26 मार्च 2019, मंगलवार | समय 03:51:17 Hrs
Republic Hindi Logo

चुनावी दंगल का रिजल्ट : न कांग्रेस इतराये न बीजेपी शरमाये

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 12/14/2018 4:45:50 PM
चुनावी दंगल का रिजल्ट : न कांग्रेस इतराये न बीजेपी शरमाये

रिपब्लिक डेस्क: पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम आ चुके हैं. स्थिति ऐसी है कि न कांग्रेस इतरा सकती है और न ही बीजेपी को शरमाने की जरूरत है. हालांकि बीजेपी के गढ़ कहे जानेवाले मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस ने बीजेपी को ऐसी पटखनी दी है कि इसका दर्द उसे मिशन 2019 तक कष्ट देगा. जब से विधानसभा के परिणाम आये हैं, हर तरफ मिशन 2019 को लेकर चर्चा शुरू हो गयी है. सभी के दिलो दिमाग पर एक सवाल खड़ा दिखायी दे रहा है. क्या 2019 में मोदी जी सत्ता में वापसी कर पायेंगे. क्या अमित शाह पुराने फ़ॉर्म में लौट पायेंगे. इन सवालों के जवाब पाने के लिए आपको इन राज्यों के परिणामों पर पर नजर डालनी होगी.

एमपी में मात्र 4337 वोट निर्णायक

मध्य प्रदेश में बीजेपी को कांग्रेस के हाथों करीबी अंतर से हार का सामना करना पड़ा है. मात्र 4,337 वोटों का कांग्रेस के पाले में जाना बीजेपी के लिए हार का कारण बना. हर एक असेंबली सीट पर जीत और हार के अंतर का विश्लेषण किया जाए तो सामने आता है कि बीजेपी को सिर्फ 4,337 वोट और मिल जाते तो शिवराज सिंह चौहान चौथी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री होते. भारतीय चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश विधानसभा की 10 सीटें ऐसी रहीं जहां जीत और हार का अंतर 1,000 वोट से भी कम रहा.

सात सीटों पर BJP के हार के अंतर से ज्यादा तो NOTA पड़े

बीजेपी को बेहद ही करीबी मुकाबले वाले इन 10 सीटों में से सिर्फ 3 पर विजय हासिल हुई और बाकी 7 सीटें कांग्रेस के पाले में चली गईं. भाजपा को जिन सीटों पर 1000 से कम वोट के अंतर से कांग्रेस ने हराया उन सभी सीटों पर नोटा को दिए गए वोट भाजपा और कांग्रेस के बीच हार के अंतर से ज्यादा थे. अगर हम उन सभी सीटों पर हार और जीत के आंकड़ों को जोड़ लें तो यह कुल 4,337 वोट बैठता है. यानी बीजेपी को अगर  4,337 वोट और मिल जाते तो उसके खाते में यह 7 सीटें आ जातीं और वह बहुमत के लिए जरूरी 116 के जादुई आंकड़े को छू लेती. हालांकि बीजेपी को 41% और कांग्रेस को 40.9% मत मिले. 

राजस्थान की 10 सीटों पर जीत का अंतर 154

राजस्थान की चुनावी जंग में कम से कम 10 सीटों पर कांटे की टक्कर देखने को मिली. इन सीटों पर जीत का अंतर 200 मतों से भी कम का रहा. इन 10 सीटों में सबसे कम जीत का अंतर 154 वोटों का रहा. राजस्थान में जीत का परचम लहराने वाली कांग्रेस को कुल 1,39.35 लाख वोट मिले, जबकि बीजेपी को 1,37.57 लाख वोट मिले हैं. ऐसे में 1.70 लाख से कुछ ज्यादा वोटों के अंतर से बीजेपी यहां सत्ता से बाहर हो गई. राज्य विधानसभा के 199 निवार्चन क्षेत्रों में कांग्रेस को 39.3 फीसदी वोट मिले और भारतीय जनता पार्टी को 38.8 फीसदी वोट मिले. इस तरह बहुत ही कम अंतर से मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी. यही नहीं 4,67.78 लाख वोट नोटा में पड़े, जो कुल वोटों का 1.3 फीसदी है. 

छत्तीसगढ़ में जोगी हुए महत्वहीन

छत्तीसगढ़ की 90 सदस्यीय विधानसभा में 68 सीटों के बहुमत से जहां कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की है वहीं कभी एकछत्र नेता रहे अजीत जोगी को महत्वहीन बना दिया है. अब तो लोग यह भी कहने लगे हैं कि जोगी का साथ कांग्रेस के लिए नुकसानदेह था. नवंबर, 2000 में अलग राज्य के रूप में छत्तीसगढ़ के गठन के बाद से ही अजीत जोगी की कारगुजारियां कांग्रेस के लिए घातक साबित होती रही हैं. विधानसभा चुनाव से दो साल पहले अजीत जोगी ने छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस-जे बना ली थी. किंगमेकर बनने का दावा करनेवाले जोगी की इस चुनाव में हवा निकल गयी है.

तेलंगाना में केसीआर का कब्जा

कांग्रेस को तेलंगाना में सिर्फ 19 सीटों पर विजय मिली, जबकि तेलंगाना राष्ट्रीय समिति ने 88 सीटें जीतीं. तेलंगाना विधानसभा चुनाव प्रचार से जुड़े नेता भी परिणामों को लेकर हैरान हैं. कांग्रेस का मानना है कि चुनाव में गठबंधन करना पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हुआ. उम्मीद न होने के बावजूद टीआरएस की बड़ी जीत और पार्टी की हार की बड़ी वजह तेलगु देशम पार्टी के साथ समझौता रहा. तेलंगाना के लोगों को कांग्रेस और टीडीपी का साथ पसंद नहीं आया. पांच साल पहले जून 2014 में आंध्र प्रदेश को बांटकर तेलंगाना का गठन किया गया था. उस वक्त टीडीपी ने बंटवारे का विरोध किया था.

मिजोरम में बीजेपी का सीक्रेट प्लान 

मिजोरम विधानसभा में पहली बार एक सीट मिलने के बावजदू प्रदेश बीजेपी ने अपने केंद्रीय नेतृत्व पर एमएनएफ को गुपचुप तरीके से मदद करने’ का आरोप लगाया है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जॉन वी लूना ने दावा किया कि अगर एमएनएफ की गुपचुप तरीके से मदद नहीं की जाती तो, बीजेपी के उम्मीदवार बेहतर प्रदर्शन करते. हालांकि एमएनएफ ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि वह बिना किसी के सहयोग का चुनाव जीता. एमएनएफ बीजेपी की अगुवाई वाले पूर्वोत्तर लोकतांत्रिक गठबंधन (नेडा) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा है. उसे 40 सदस्यीय मिजोरम विधानसभा में 26 सीटें मिली हैं. मिजोरम विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को महज पांच सीटों से संतोष करना पड़ा.

Copyright © 2018 Shailputri Media Private Limited. All Rights Reserved.

Designed by: 4C Plus