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देश में संसदीय परंपरा की पुनर्स्थापना करेंगे कन्हैया

By Republichindi desk | Publish Date: 4/15/2019 5:25:05 PM
देश में संसदीय परंपरा की पुनर्स्थापना करेंगे कन्हैया

रिपब्लिक डेस्क. लोकसभा चुनाव के लिए जेएनयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की तैयारी जोरों पर है. बिहार के बेगूसराय सीट से कन्हैया का मुकाबला केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और राजद के तनवीर हसन से है. कन्हैया सीपीआई के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. कन्हैया कुमार ने कहा कि कई लोगों ने मुझसे पूछा कि सांसद बनने के बाद आप पहला काम क्या करेंगे. कन्हैया कुमार ने कहा कि इस देश में संसदीय परंपरा की पुनर्स्थापना करेंगे. संसदीय परंपरा का मतलब विपक्ष का सम्मान करना होता है. विपक्षी व्यक्तियों को भी हाथ जोड़कर नमस्कार करेंगे. कन्हैया कुमार से जब यह पूछा गया कि महागठबंधन का समर्थन नहीं मिलने से आपको नुकसान होगा.

इसके जवाब में कुमार ने कहा कि जिस तरीके से संघर्षों में एक एकता बनी थी. एक गठबंधन अपने आप तैयार हुआ था. चुनावों में भी अगर यह एकता बनती तो परिणाम बहुत अच्छा होता. कन्हैया ने कहा कि मेरा अपना अनुमान है कि अगर मैं चुनाव जीतकर संसद जाऊंगा तो शायद नरेंद्र मोदी वहां नहीं होंगे, क्योंकि मैं उसी स्थिति में चुनाव जीतूंगा जब भाजपा विरोधी माहौल पूरे देश में बनेगा. अब कुछ लोगों ने बेगूसराय में बोलना शुरू किया है कि देश में क्या होगा नहीं जानते, लेकिन बेगूसराय में तो आपको जिताएंगे. कन्हैया कुमार ने अपनी शादी के बारे में कहा कि परेशानी का साथी ढूंढने में समय लगेगा. कन्हैया ने कहा कि मां पहले से ही परेशान है. कन्हैया ने कहा कि जेएनयू में पीएचडी करने जब गये, तब गांव के लोगों का इस पर क्या रिएक्शन था.

कन्हैया कुमार ने कहा कि जेएनयू के बारे में गांव के लोगों को पता ही नहीं था. लोग पूछते थे क्या करते हो? कब तक पढ़ोगे, अब कमाना चाहिए. कन्हैया की मां ने बताया कि लोग कहते थे कि आप लोग कन्हैया को कमाने के लिए क्यों नहीं बोलते हैं. कन्हैया कुमार ने इस दौरान बताया कि चूंकि घर की माली हालत ठीक नहीं थी, तो उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ कुछ काम भी करना पड़ता था. जब वह स्कूल में थे तो घर-घर जाकर पोलियो ड्रॉप पिलाते थे. तब 50 रुपया मिलता था. उन्होंने कहा कि जब मैं दिल्ली गया तो एमआर की नौकरी भी की. उसके बाद मैंने यूपीएससी की तैयारी भी की, लेकिन सरकार की एक पॉलिसी से जीवन में कितना बड़ा झटका लगता है, तब समझ आया. कन्हैया ने कहा कि मैं पूरी तरह से हिन्दी मीडियम का छात्र हूं. उन्होंने कहा कि जब मैं जेएनयू गया तो मुझे फेलोशिप मिल गई. फिर वहीं से घर वालों को भी पैसा भेजने लगा. मेरे बड़े भाई भी मुझे पैसों से सपोर्ट करते थे. वे चौकीदारी का काम करते थे.

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