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मुस्लिम लड़की 18 वर्ष से पहले बालिग मानी जायेगी, सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवायी

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 9/11/2019 4:58:35 PM
मुस्लिम लड़की 18 वर्ष से पहले बालिग मानी जायेगी, सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवायी

रिपब्लिक डेस्क: सुप्रीम कोर्ट जल्द ही अध्ययन करेगा कि कैसे कोई मुस्लिम लड़की 18 साल से पहले बालिग मानी जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है, जिसमें एक नाबालिग मुस्लिम लड़की ने कहा है कि उसने मुस्लिम कानून के हिसाब से निकाह किया है. वह प्यूबर्टी (रजस्वला) की उम्र पा चुकी है और अपनी जिंदगी जीने को आजाद है. इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को लड़की ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. हाई कोर्ट ने लड़की की शादी को शून्य करार देते हुए उसे शेल्टर होम में भेजने का आदेश दिया था.

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा गया कि वह शादीशुदा है और ऐसे में उसे दांपत्य जीवन बसर करने की इजाजत दी जाए. इस केस में सुप्रीम कोर्ट इस बात पर भी विचार करेगा कि मुस्लिम लड़की कब बालिग होती है? और क्या वह 18 साल से पहले शादी कर सकती है? ये पूरा मामला अयोध्या का है. पहले डिस्ट्रिक्ट कोर्ट और फिर हाईकोर्ट ने एक नाबालिग की शादी को रद्द कर दिया और उसे शेल्टर होम भेजने का आदेश दिया.

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को इस लड़की ने चुनौती दी है और कहा है कि उसने शादी अपनी मर्जी से की है न कि किसी दबाव में आकर. वह शादीशुदा है और ऐसे में उसे दांपत्य जीवन गुजारने की इजाजत दी जाए. अब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस अजय रस्तोगी की बेंच ने याचिका पर सुनवाई की सहमति देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस भेजकर जवाब दाखिल करने को कहा है.

मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक लड़की की उम्र 16 वर्ष है. इससे पहले लड़की के पिता ने एक केस दायर कर बेटी के अपहरण की शिकायत की थी. लेकिन लड़की ने मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए अपने बयान में कहा कि उसने युवक से अपनी मर्जी से शादी की है. वह अपने पति के साथ ही रहना चाहती है. हालांकि, मामला हाईकोर्ट में जाने के बाद लड़की को 18 बरस होने तक उसे आश्रय गृह भेजने का आदेश दिया गया.

लड़की के वकील दुष्यंत पाराशर ने शफीन जहां केस का हवाला देते हुए कहा कि कानून सबके लिए बराबर है. सभी को अपनी पसंद के पार्टनर के साथ रहने का हक है. उसने बालिग होने के बाद खुद ये निर्णय लिया है और मुस्लिम कानून के मुताबिक निकाह किया है. ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट भी ये देखेगा कि क्या मुस्लिमों में बालिग होने की उम्र 18 साल से पहले है?

 

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