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कुछ सीटें चोर बाजार से भी खरीद लें पीएम:शत्रुघ्न सिन्हा

By Republichindi desk | Publish Date: 5/15/2019 5:58:31 PM
कुछ सीटें चोर बाजार से भी खरीद लें पीएम:शत्रुघ्न सिन्हा

रिपब्लिक डेस्क. लोकसभा के आखिरी चरण में 19 मई को वैसे तो देशभर के आठ राज्यों और बिहार की आठ सीटों समेत 59 सीटों पर वोट डाले जाएंगे, लेकिन बिहार में सबसे ज्यादा नजर बीजेपी के रविशंकर प्रसाद बनाम कांग्रेस के शत्रुघ्न सिन्हा की सीट पर लगी है. शत्रुघ्न सिन्हा के लिए चुनावी चिन्ह भले ही बदला है, लेकिन लोकेशन यानी सीट नहीं बदली है. बॉलीवुड के शॉटगन और सबको खामोश कराने वाले शत्रुघ्न सिन्हा जब चुनाव प्रचार में निकलते हैं, पटना साहिब की आम-अवाम उनकी एक झलक पाने को बेताब दिखती है.

भले ही इस बार कमल की जगह कांग्रेस के हाथ छाप पर मैदान में उतरे हैं लेकिन जनसंपर्क के दौरान पटना जिले के लोग उन्हें वही प्यार-सम्मान और स्नेह दे रहे हैं. 19 मई को मतदान में क्या होगा इसकी चिंता न शत्रुघ्न सिन्हा और न ही उनके समर्थकों में दिखती है. हर सभा में शत्रुघ्न सिन्हा के निशाने पर प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से प्रधानमंत्री और बीजेपी अध्यक्ष ही होते हैं. उन्होंने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि 'मुझसे पूछा जाता है कि दो करोड़ रोजगार देने का वायदा किया था, पूरा हुआ क्या. वो कहते हैं कि पुलवामा अटैक पर ये कर दिया. उनसे पूछा जाता है कि किसानों को उचित मूल्य दिया क्या. उनसे पूछा जाता है कि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट संसद में रखी गई क्या.

वो राष्ट्रवाद की बात करते हैं. राष्ट्रवाद है, इसे सब मानते हैं लेकिन आप शूट एंड स्कूट पॉलिसी क्यों करते हो. शत्रुघ्न सिन्हा अपने उसी अंदाज में लोगों से समर्थन मांगने निकलते हैं. सजा-धजा परिधान और हमेशा की तरह लोगों को अपने शानदार अंदाज से लुभाने का तरीका. उन्हें पता है कि लड़ाई तगड़ी है और उन्हें चुनौती देने वाले रविशंकर प्रसाद मैदान के मजबूत खिलाड़ी हैं, वो भी जनसंपर्क में कोई कमी नहीं करना चाहते. शत्रुघ्न सिन्हा महागठबंधन के स्टार प्रचारक हैं. उनसे हाथ मिलाने और उनकी झलक पाने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है. शत्रुघ्न सिन्हा ने मोदी-शाह जोड़ी पर पिछले तीन से चार सालों में जमकर निशाना साधा है, टिकट तो कट गया, लेकिन वे खामोश नहीं हुए लेकिन पटना साहिब चुनाव की खासियत ये है की दोनों उम्मीदवार एक दूसरे के खिलाफ तल्ख भाषा का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं.

रविशंकर प्रसाद कहते हैं कि उन्होंने गलत किया तो पार्टी ने टिकट काट दिया लेकिन उनके खिलाफ न कभी बोला है और न बोलेंगे. लोकेशन नहीं बदली, लेकिन क्या पटना साहिब में सिचुएशन मुश्किल हो गई है. इस सवाल के जवाब में शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, 'बिल्कुल नहीं. अगर ऐसा होता तो मैं कभी नहीं कहता कि लोकेशन वही होगी. लोकेशन वही है, क्योंकि पूरा बिहार परिवार मेरे साथ रहा है. पटना की जनता मुझे प्यार करती है, चाहती है, मानती है. मुझे कोई दिक्कत नहीं है इसीलिए मैंने कहा कि दिक्कत होती तो मैं यहां आता ही नहीं. गौरतलब है कि पटना साहिब अरसे से बीजेपी की परंपरागत सीट रही है, इसलिए बीजेपी को भरोसा है कि 'शत्रु' के हाथ जीत नहीं लगने वाली. बिहार की पटना साहिब लोकसभा सीट पर इस बार राज्य की ही नहीं बल्कि पूरे देश की नजर है. इस चुनाव को लालू प्रसाद यादव के प्रभाव और मोदी फैक्टर की साख की कसौटी के रूप में ले रहा है. बता दें कि सिन्हा को महागठबंधन का भी समर्थन हासिल है.
शत्रुघ्न सिन्हा हमेशा नरेंद्र मोदी को ललकारते रहे हैं. इससे जुड़े सवाल के जवाब में सिन्हा ने कहा कि 'जिन्होंने पार्टी को 200 से ज्यादा सीटों तक पहुंचाया, जिन्होंने पार्टी के मुखिया माननीय नरेंद्र मोदी जी को बनाया और बचाया, ऐसे में हमारे गुरु लाल कृष्ण आडवाणी जी की क्या हालत है. परम विद्वान मुरली मनोहर जोशी जी किस हालत में हैं. अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा की क्या हालत है.

मेरे साथ जो हुआ उसके बारे में ज्यादा वर्णन करने की जरूरत नहीं है. अटल बिहारी वाजपेयी के जमाने में लोकशाही थी, आज के जमाने में तानाशाही है. वन मैन शो है, किसी मंत्री की नहीं चल रही है. सारा काम पीएमओ कर रहा है. ज्यादातर मंत्रियों को आप जानते नहीं हैं, जानते हैं तो मानते नहीं हैं, मानते हैं तो पहचानते नहीं हैं. उनके पास जाएं तो वे किसी काम के नहीं हैं. ऐसी हालत में जरूरी हो गया एक नई दिशा में जाना, सही दिशा में जाना.' पटना साहिब सीट का गठन साल 2008 में नए परिसीमन के तहत हुआ था. इसके बाद से यहां पर दो लोकसभा चुनाव हुए हैं. दोनों ही बार बीजेपी के टिकट पर शत्रुघ्न सिन्हा सांसद चुने गए. जातीय समीकरण के आधार पर कायस्थों का दबदबा रहा है. लगभग पांच लाख से ज्यादा कायस्थों के अलावा यहां यादव और राजपूत मतदाताओं की भी खासी संख्या है. इस बार चुनाव मैदान में कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही तरफ बड़े कायस्थ चेहरे खड़े होने की वजह से वोट बंटने का खतरा पैदा हो गया है.

शत्रुघ्न सिन्हा पिछले कई साल में जिस तरह से मोदी के खिलाफ बगावत करते नजर आए हैं, उन्हीं तेवर के चलते शत्रुघ्न सिन्हा का बीजेपी से टिकट कटा तो कांग्रेस से इन्हीं तेवर के चलते टिकट मिला भी. नरेंद्र मोदी का दावा है कि इस बार चुनाव में 300 से ज्यादा सीटें आएंगी. इसके जवाब में शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, 'मैं जानता हूं आजकल धनशक्ति और प्रचारतंत्र का बड़ा जोर चल रहा है. धनशक्ति को जनशक्ति पर भी हावी होते देख रहा हूं और इन दिनों मीडिया पर भी हावी होते देख रहा हूं. प्रधानमंत्री का नाम आजकल प्रचारमंत्री पड़ा हुआ है. 300 सीटें जीत रहे हैं. क्या बाजार से सीटें खरीदेंगे, क्या महागठबंधन का जोर और पूरे देश में मोदी सरकार के प्रति हाहाकार है, जो डर है, जो किसानों की मांग है, जो हमारे नौजवानों की मांग है, जो इतने सारे काम अधूरे रह गए, कोई वायदे पूरे नहीं हुए, न पूरा करने की कोशिश की. उसके बावजूद उनका दावा 300 सीटें जीतने का है, तो वे कह दें कि 600 सीटें जीतेंगे. कुछ सीटें चोर बाजार और चांदनी चौक से खरीद लें, बढ़िया रहेगा उनके लिए.' प्रचार के दौरान शत्रुघ्न सिन्हा न रविशंकर प्रसाद का नाम लेते हैं और न रविशंकर प्रसाद अपने प्रतिद्वंद्वी शत्रुघ्न सिन्हा का नाम लेते हैं. इस सवाल पर शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, 'राजनीति की यही शालीनता है.

लोगों को इससे सबक लेना चाहिए. रविशंकर जी शरीफ और हमारे पारिवारिक मित्र हैं. अगर हम एक दूसरे का नाम नहीं लेते हैं तो ये सम्मान है, आदर है. ये विचारधारा की लड़ाई है, मुद्दों की लड़ाई है, इस पर मैं रविशंकर जी से सहमत हूं.' पिछले दो लोकसभा चुनावों से पटना साहिब सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार नंबर दो रहे हैं. ऐसे में महागठबंधन के तहत ये सीट कांग्रेस के खाते में गई है और कांग्रेस ने इसीलिए शत्रुघ्न सिन्हा को उम्मीदवार बनाया है. दिलचस्प बात ये है कि पटना साहिब सीट पर कायस्थ मतदाताओं का झुकाव बीजेपी के पक्ष में रहता है. ऐसे में शत्रुघ्न सिन्हा के कांग्रेस के टिकट पर उतरने से यहां मुकाबला दिलचस्प हो गया है. अब सवाल ये है कि बीजेपी के टिकट पर दो बार चुनाव जीत चुके शत्रुघ्न सिन्हा इस बार कांग्रेस के सहारे अपनी चुनावी हैट्रिक लगा पाते हैं या नहीं.

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