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लालू की किताब से गरमाई बिहार की सियासत

By Republichindi desk | Publish Date: 4/5/2019 10:45:43 AM
लालू की किताब से गरमाई बिहार की सियासत

न्यूज़ डेस्क. गोपालगंज टु रायसीना : माइ पॉलिटिकल जर्नी किताब में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने दावा किया है कि नीतीश कुमार महागठबंधन छोड़ने के छह महीने के भीतर ही उसमें वापसी करना चाहते थे. लालू ने यह पुस्तक नलिन वर्मा के साथ मिलकर लिखी है जिसका प्रकाशन रूपा पब्लिकेशंस कर रही है.
नलिन वर्मा के साथ मिलकर लिखी गई इस किताब में लालू ने दावा किया है कि नीतीश ने उस दरम्यान प्रशांत किशोर को उनके पास पांच बार भेजा था,लेकिन मैंने मना कर दिया. इसके खुलासे के बाद से ही सियासत गरमा गई है व बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है. हालांकि प्रशांत किशोर ने लालू से मिलने की बात का न इकरार किया न ही  इनकार किया है. उन्होंने कहा, मैं कुछ नहीं कहूंगा और न ही कुछ कन्फर्म करूंगा. आप जो चाहें लिख सकते हैं.

गोपालगंज टु रायसीना : माइ पॉलिटिकल जर्नी का जल्द ही लोकार्पण होने जा रहा है. लालू ने इस किताब में लिखा है कि नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी जेडी(यू) के उपाध्यक्ष और अपने विश्वासपात्र प्रशांत किशोर को अलग-अलग मौकों पर अपना दूत बनाकर उनके पास पांच बार भेजा. प्रशांत किशोर ने हर बार नीतीश की धर्मनिरपेक्ष धड़े में वापसी पर लालू को राजी करने की कोशिश की. इस किताब में लालू लिखते हैं, किशोर यह जताने की कोशिश कर रहे थे कि अगर मैं जेडी(यू) को लिखित में समर्थन सुनिश्चित कर दूं तो वह बीजेपी से गठबंधन तोड़कर महागठबंधन में दोबारा शामिल हो जाएंगे.हालांकि, नीतीश को लेकर मेरे मन में कोई कड़वाहट नहीं है, लेकिन मेरा उन पर से विश्वास पूरी तरह हट चुका है. प्रस्ताव मान लेता तो क्या होता, पता नहीं. लालू आगे लिखते हैं हालांकि, मुझे नहीं पता कि अगर मैं प्रशांत किशोर का प्रस्ताव स्वीकार कर लेता तो 2015 में महागठबंधन को वोट देने वालों और देशभर में बीजेपी के खिलाफ एकजुट हुए अन्य दलों की क्या प्रतिक्रिया होती.

जेडीयू के महासचिव केसी त्यागी ने लालू यादव के दावे को झूठा बताते हुए कहा है कि मैं जेडी(यू) के एक बड़े पदाधिकारी की हैसियत से कहा सकता हूं कि नीतीश कुमार ने 2017 में रिश्ते बिगड़ने के बाद नीतीश ने महागठबंधन में जाने की इच्छा कभी प्रकट नहीं की. अगर ऐसा इरादा होता तो इस प्रस्ताव को पार्टी में आंतरिक चर्चा के लिए जरूर लाया जाता. जेडी(यू) का आरजेडी से अलगाव बिल्कुल स्थाई है और नीतीश कुमार भ्रष्टाचार पर समझौता करने वाले नहीं हैं. इसलिए, लालू का दावा बिल्कुल झूठा है. वहीं, बिहार के उप मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने लालू के दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि लालू ने बिल्कूल झूठी बात की है.

प्रशांत किशोर ने लिखा, लालूजी द्वारा बताए गए दावे गलत हैं. यह और कुछ नहीं बल्कि एक ऐसे नेता द्वारा अपनी प्रासंगिकता बताने की कोशिश का एक घटिया प्रयास है जिनके अच्छे दिन खत्म हो चुके हैं. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के महागठबंधन में वापसी के लालू यादव के दावे पर बिहार में घमासान मचा है. राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) चीफ लालू ने अपनी बायोग्राफी 'गोपालगंज टु रायसीना: माइ पॉलिटिकल जर्नी' में दावा किया है कि नीतीश ने महागठबंधन में वापसी के लिए कई बार अपने विश्वासपात्र प्रशांत किशोर (PK) को उनके पास दूत बनाकर भेजा था. लालू के इस दावे के बाद जेडीयू के उपाध्यक्ष प्रशांत ने सिरे से खारिज करते हुए उन्हें झूठा करार दिया है.
 

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