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कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बोले- खराब से खराब अपराधी भी कांग्रेसियों से बेहतर

By Republichindi desk | Publish Date: 8/10/2019 9:54:01 AM
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बोले- खराब से खराब अपराधी भी कांग्रेसियों से बेहतर
समाचार डेस्क: लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस पार्टी असमंजस की स्थिति में तो है ही साथ ही अब इसे अंतर्विरोधों का भी सामना करना पड़ रहा है. धारा 370 हटाने के मुद्दे पर अंतर्विरोध सामने भी आया लेकिन सबसे बड़ी फजीहत पार्टी के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार के इस्तीफे के बाद सामने आई है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद पार्टी अभी तक अपना अध्यक्ष चुन नहीं सकी है और ऐसे में झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा यह कह कर इस्तीफा दे दिया गया कि खराब से खराब अपराधी भी कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और नेताओं से बेहतर हैं.
 
अजय कुमार ने इस्तीफे में निकाली भड़ास, खोली नेताओं की पोल पट्टी 
 
झारखंड प्रदेश अध्यक्ष ने अपने इस्तीफे में मन की भड़ास तो निकाली ही है, साथ ही नेताओं और उनके कार्यशैली की पोलपट्टी खोलकर रख दी है. उन्होंने बेबाकी से कहा है कि खराब से खराब अपराधी भी कांग्रेसी नेताओं से बेहतर हैं और पार्टी में स्वार्थ वाले नेताओं की लंबी सूची है. उन्होने कहा कि कुछ नेताओं का उद्देश्य किसी तरह सत्ता हथियाना, टिकट बेचना और चुनाव के नाम पर धन जमा करना है. उन्होंने कई नेताओं पर आरोप लगाया और कहा कि झारखंड के अधिकतर नेता सिर्फ अपने परिवार के लिए राजनीति करते हैं और लोगों को अपने परिवार के लोगों को ही टिकट दिलाने में रुचि रहती है.
 
बड़े नेताओं पर भी लगाए कई आरोप
 
उन्होंने झारखंड कांग्रेस के बड़े चेहरों पर भी पार्टी हित से अनदेखी करने, पार्टी हित को ताक पर रखकर काम करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि सुबोध कांत सहाय, रामेश्वर उरांव, प्रदीप बालमुचु, फुरकान अंसारी, ददई दुबे जैसे नेता व्यक्तिगत लाभ के लिए पार्टी को हित को ताक पर रख देते हैं और इसी कारण से पार्टी को हार का सामना करना पड़ा. उन्होंने कहा कि इन नेताओं के निजी हित साधने पर ज्यादा ध्यान दिया गया.

नेताओं पर लगाया परिवारवाद फैलाने का आरोप
 
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे डॉ अजय कुमार ने यह भी कहा कि ददई दुबे खुद बोकारो से और बेटे को पलामू से टिकट चाहते हैं. सुबोध कांत सहाय भाई को चुनाव लड़ना चाहते हैं. प्रदीप बालू घाटशिला से बेटी को चुनाव लड़ना चाहते हैं. फुरकान अंसारी जामताड़ा से बेटा, मधुपुर से बेटी और महागामा से खुद के लिए सीट चाहते हैं और वे इनकी हसरतों की राह में बाधा बने हुए थे. झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के इस्तीफे में गिनाए गए कारणों के बाद कांग्रेस का अंतर्कलह खुलकर सामने आया ही है साथ ही नेताओं की कार्य संस्कृति भी उजागर हो गई है.
 
चर्चित अधिकारी रहे हैं अजय कुमार
 
अजय कुमार कर्नाटक के मूल निवासी हैं. भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी रहे थे. बिहार कैडर के आईपीएस रहे डॉ अजय कुमार पटना सिटी एसपी थे तो कई अपराधियों को मुठभेड़ में इन्होने मार गिराया था. आलम यह था कि उनके नाम से अपराधी कांपते थे. कई अपराधी मार गिराए गए थे और कई जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिए गए थे. झारखंड विभाजन के पहले ही अजय कुमार झारखंड चले गए और जमशेदपुर एसपी के तौर पर भी इनका कार्य काफी सराहनीय रहा था. टाटा में सक्रिय माफिया गिरोहों की इन्होंने कमर तोड़ कर रख दी थी. जमशेदपुर से लेकर रांची तक के अंडरवर्ल्ड को हिला कर इन्होने रख दिया था. बाद में नौकरी से उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. कुछ दिन इन्होंने टाटा ग्रुप में नौकरी की थी. हालांकि उसके बाद वे राजनीति में उतर आए. बाबूलाल मरांडी की पार्टी से जुड़कर ये सांसद भी बने थे. इसके बाद अजय कुमार कांग्रेस में शामिल हो गए.  कांग्रेस में जब ये शामिल हुए थे तब झारखंड में कांग्रेस की हालत काफी पतली थी. लगातार कार्यकर्ताओं के बीच रहकर और मेहनत कर इन्होंने पार्टी को मजबूती दिलाने की काफी कोशिश भी की थी. बहुत हद तक इन्हें सफलता भी मिली थी लेकिन कांग्रेस के स्थापित नेताओं के अंतर्कलह के कारण अजय कुमार परेशान भी रहा करते थे.
 

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