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जीत के बाद TIME मैगजीन ने बदले सुर, मोदी को बताया एकजुटता का सूत्रधार

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 5/29/2019 1:11:14 PM
जीत के बाद TIME मैगजीन ने बदले सुर, मोदी को बताया एकजुटता का सूत्रधार

रिपब्लिक डेस्क: लोकसभा चुनाव 2019 में नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रचंड जीत के बाद अमेरिका की प्रतिष्ठित मैगज़ीन 'टाइम' (TIME) ने अपने सुर बदल लिए हैं. टाइम ने अब मोदी की तारीफों के कसीदें पढ़े हैं. मैग्ज़ीन के हालिया एडिशन में नरेंद्र मोदी पर एक लंबा चौड़ा आर्टिकल लिखा है. इसमें कहा गया है कि मोदी ने भारत को एकजुट किया है. देश में जाति और धर्म की खाई कम कर दी. मोदी ने जिस तरह से देश को संगठित किया है, वह कोई और दशकों में भी नहीं कर सकता. पीएम मोदी की अगुवाई में बीजेपी ने हाल ही में खत्मज हुए लोकसभा चुनावों में 305 सीटें हासिल की हैं. वहीं, एनडीए गठबंधन को चुनावों में 352 सीटें मिली हैं.

विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में 600 मिलियन से ज्याुदा मतदाताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी को विजय दिलायी है. कड़ी आलोचना के बावजूद मोदी ने जिस तरह से भारतीय मतदाताओं को संगठित किया, वह पिछले पांच दशकों में कोई और पीएम नहीं कर पाया. आखिरी बार सन् 1971 में कोई भारतीय पीएम दोबारा प्रचंड बहुमत से निर्वाचित हो सका था. पीएम मोदी के गठबंधन ने 50 प्रतिशत से बस कुछ ही कम राष्ट्री य वोट हासिल करने में सफलता पाई.

मोदी पर लिखा गया ये आर्टिकल 'टाइम' की वेबसाइट पर मंगलवार को प्रकाशित हुआ. इसमें एक सवाल पूछा गया है, "कैसे यह कथित विभाजनकारी शख्सियत न केवल सत्ता में कायम रह पाया है, बल्कि उसके समर्थक और भी ज्यादा बढ़ गए हैं?" इस सवाल जवाब में लेख में कहा गया है, "एक प्रमुख कारक यह रहा है कि मोदी भारत की सबसे बड़ी कमी: जातिगत भेदभाव को पार करने में कामयाब रहे हैं." इस आर्टिकल के लेखक मनोज लाडवा ने मोदी के एकजुटता के सूत्रधार के रूप में उभरने का श्रेय उनके पिछड़ी जाति में पैदा होने को दिया है.

आर्टिकल में क्या लिखा है?

आर्टिकल में लाडवा ने लिखा है कि नरेंद्र मोदी का जन्म भारत के सबसे वंचित सामाजिक समूहों में से एक में हुआ था. बिल्कुल शीर्ष पर पहुंचते हुए, वह आकांक्षापूर्ण कामगार वर्ग को प्रतिबिंबित करते हैं और अपने देश के सबसे गरीब नागरिकों के रूप में अपनी पहचान पेश कर सकते हैं, जैसा कि आजादी के बाद 72 सालों में सबसे ज्यादा समय भारत की सत्ता पर रहने वाला नेहरू-गांधी राजनीतिक वंश कभी नहीं कर सकता.

इंदिरा गांधी से की तुलना

उन्होंने 1971 में इंदिरा गांधी को मिली भारी जीत का जिक्र करते हुए कहा, "लेकिन, फिर भी उनके पहले कार्यकाल के पूरे समय के दौरान और उनकी इस बार की चुनावी दौड़ के दौरान मोदी की नीतियों के खिलाफ कड़ी और अक्सर अनुचित आलोचनाओं के बावजूद, पिछले पांच दशकों में कोई भी प्रधानमंत्री भारत के मतदाताओं को इतना एकजुट नहीं कर पाया, जितना उन्होंने किया है." बता दें कि लाडवा इंडिया ग्लोबल बिजनेस प्रकाशित करने वाली ब्रिटेन की मीडिया कंपनी इंडिया इंक के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) हैं.

आर्टिकल पर हुआ था विवाद

इस आर्टिकल से पहले 'टाइम' में प्रकाशित हुए आतिश तासीर के आर्टिकल पर काफी विवाद हुआ था. चुनाव के दौरान आए इस आर्टिकल में नाव प्रचार के दौरान मोदी के विरोधियों द्वारा खूब इस्तेमाल किया गया. मोदी के आलोचकों ने इसे एक वैश्विक मीडिया पावरहाउस द्वारा उन्हें 'विभाजनकारी' के रूप में आरोपित करना करार दिया.
 

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