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पितृपक्षः जाने कैसे करें पितृपक्ष में श्राद्ध, गया में पितृपक्ष मेले की तैयारी पूरी

By Republichindi desk | Publish Date: 9/12/2019 12:33:03 PM
पितृपक्षः जाने कैसे करें पितृपक्ष में श्राद्ध, गया में पितृपक्ष मेले की तैयारी पूरी

न्यूज डेस्कः पूर्वजों की आत्मा को शांति प्रदान करने हेतु पितरपक्ष  कल यानी  शुक्रवार से शुरु हो रहा है. पूर्णिमा से अमावस्या तक 15 तिथियां पितरों के निमित श्राद्ध कर्म के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. इन 15 तिथियों में सभी अपने-अपने पितरों को याद करते है और उनका तर्पण करते है. इस वर्ष में श्राद्ध पक्ष 13 सितंबर से 28 सितंबर तक रहेगा.

श्राद्ध किसे कहते हैं?

श्राद्ध का अर्थ है श्रद्धा पूर्वक अपने पूर्वजों को जो इस समय जीवित नहीं है उनका आभार प्रकट करना. शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष के दौरान ऐसे परिजन जो अपने शरीर को छोड़कर चले गए हैं, उनकी आत्मा के तृप्ति के लिए उन्हें तर्पण दिया जाता है, इसे ही श्राद्ध कहा जाता है.  ऐसी कहा जाता है कि पितृपक्ष में मृत्यु के देवता यमराज इन जीवो को कुछ समय के लिए मुक्त कर देते हैं, ताकि ये धरती पर जाकर तर्पण ग्रहण कर सकें.

पितृपक्ष में कैसे करें श्राद्ध

श्राद्ध पक्ष के दिनों में पूजा और तर्पण करें.  पितरों के लिए बनाए गए भोजन के चार ग्रास निकालें और उसमें से एक हिस्सा गाय, दूसरा हिस्सा कुत्ते, तीसरा हिस्सा कौए और एक हिस्सा अतिथि के लिए रख दें.  गाय, कुत्ते और कौए को भोजन देने के बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं.

गया में पृतिपक्ष मेले के लिए हो रही विशेष तैयारी

बिहार के गया स्थित विष्णुपद मंदिर परिसर में बने भव्य पंडाल में मंत्रों के उच्चारण के साथ पितृपक्ष मेता का शुभारंभ किया जाएगा. इस बीच पितरों को मोक्ष का कामना को लेकर तीर्थयात्रियों का आगन प्रारंभ हो गया है. इसे लेकर गया में विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला का उद्धाटन गुरुवार यानी आज शांम चार बजे उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी करेंगे.  इस मेले की प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई है. 17 दिनों तक चलने वाले पितृपक्ष मेला में इस साल आठ लाख तीर्थयात्रियों के आने की संभावना है. उनके स्वागत के लिए मोक्ष नगरी तैयार है.यहां देश-विदेश से पिंडदानी कर्मकांड के लिए यहां आते हैं. वे फल्गु के पवित्र जल से पिंडदान एवं तर्पण करेंगे.  इसके साथ ही पिंडवेदियों पर कर्मकांड करेंगे.

माता के श्राद्ध के लिए अष्टमी तिथि वहीं पिता के श्राद्ध के लिए नवमी तिथि को उपयुक्त बताया गया है.

श्राद्ध तिथि का चयन ऐसे करें

पंचमी श्राद्ध- जिन पितरो की मृत्यु पंचमी तिथि को हुई हो या अविवाहित स्थिति में हुई है तो उनके लिए पंचमी तिथि का श्राद्ध किया जाता है.
नवमी श्राद्ध - नवमी तिथि को मातृनवमी के नाम से भी जाना जाता है. इस तिथि पर श्राद्ध करने से कुल की सभी दिवंगत महिलाओं का श्राद्ध हो जाता है.
चतुर्दशी श्राद्ध- इस तिथि उन परिजनों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो.
सर्वपितृ अमावस्या- जिन लोगों के मृत्यु के दिन की सही-सही जानकारी न हो, उनका श्राद्ध अमावस्या को किया जाता है.

12 प्रकार की होती पितृपक्ष में श्राद्ध

1.नित्य श्राद्ध- पितृपक्ष के पूरे दिनों में हर रोज जल, अन्न, दूध और कुश से श्राद्ध करने से पितर प्रसन्न होते हैं.

2.नैमित्तिक श्राद्ध-  माता-पिता की मृत्यु के दिन यह श्राद्ध किया जाता है. इसे एकोदिष्ट कहा जाता है.

3.काम्य श्राद्ध- यह श्राद्ध विशेष सिद्धि की प्राप्ति के लिए किया जाता है.

4.वृद्धि श्राद्ध- सौभाग्य और सुख में कामना कामने के लिए वृद्धि श्राद्ध किया जाता है.

5.सपिंडन श्राद्ध- यह श्राद्ध मृत व्यक्तियों को 12वें दिन किया जाता है। इसे महिलाएं भी कर सकती है.

6.पार्वण श्राद्ध- इस श्राद्ध को पर्व की तिथि पर किया जाता है। इसलिए इसे पार्वण श्राद्ध कहा जाता है.

7.गोष्ठी श्राद्ध- जो श्राद्ध परिवार के सभी सदस्य मिलकर करते हैं उसे गोष्ठी श्राद्ध कहा जाता है.

8.शुद्धयर्थ श्राद्ध- पितृपक्ष में किया जाने वाले यह श्राद्ध परिवार की शुद्धता के लिए किया जाता है.

9.कर्मांग श्राद्ध- किसी संस्कार के मौके पर किया जाने वाले श्राद्ध कर्मांग श्राद्ध कहलाता है.

10.तीर्थ श्राद्ध- किसी तीर्थ पर किये जाने वाला श्राद्ध तीर्थ श्राद्ध कहा जाता है.

11.यात्रार्थ श्राद्ध- जो श्राद्ध यात्रा की सफलता के लिए किया जाता है उसे याश्रार्थ श्राद्ध कहा जाता है.

12.पुष्टयर्थ श्राद्ध- जो  श्राद्ध आर्थिक उन्ननि के लिए किए जाते हो इसे पुष्टयर्थ श्राद्ध कहा जाता है.


 

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