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देश में 8 जगहों पर होती है रावण की पूजा

By Republichindi desk | Publish Date: 10/7/2019 11:25:18 AM
देश में 8 जगहों पर होती है रावण की पूजा

न्यूज़ डेस्क. दशहरे को रावण दहन के रूप में ही जाना जाता है, लेकिन भारत में ऐसी 8 जगह हैं जहां रावण को जलाने की बजाए उसकी पूजा की जाती है. मंदसौर (मध्यप्रदेश), कोलार (कर्नाटक), जोधपुर (राजस्थान), काकिनाड (आंध्रप्रदेश), कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश), बिसरख (उत्तर प्रदेश), अमरावती (महाराष्ट्र) और उज्जैन (मध्य प्रदेश).

 
मध्यप्रदेश के मंदसौर को कनार्टक का कोलार 
कहा जाता है. मंदसौर का असली नाम दशपुर था और यह रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका था. ऐसे में मंदसौर रावण का ससुराल हुआ. इसलिए यहां दामाद के सम्मान की परंपरा के कारण रावण के पुतले का दहन करने की बजाय उसकी पूजा की जाती है. मध्य प्रदेश के ही उज्जैन जिले के चिखली गांव में भी रावण का दहन नहीं किया जाता है. यहां के बारे में कहा जाता है कि रावण की पूजा नहीं करने पर गांव जलकर राख हो जाएगा. इसलिए इस गांव में दशहरे पर रावण का दहन करने के बजाए पूजा की जाती है. इस गांव में रावण की विशालकाय मूर्ति भी स्थापित है.
 
कनार्टक के कोलार जिले में भी रावण की पूजा की जाती है. यहां की धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, रावण भगवान शिव का भक्त था, जिस कारण यहां के लोग रावण की पूजा करते हैं. इसके अलावा कर्नाटक के मंडया जिले के मालवली नामक स्थान पर रावण का मंदिर बना हुआ है, जहां लोग उसे महान शिव भक्त के रूप में पूजते हैं. दक्षिण भारत के एक और राज्य आंध्रप्रदेश के काकिनाड में रावण का मंदिर बना हुआ है. यहां आने वाले लोग भगवान राम की शक्तियों को मानने से इनकार नहीं करते, लेकिन वे रावण को ही शक्ति सम्राट मानते हैं. इस मंदिर में भगवान शिव के साथ रावण की भी पूजा की जाती है. 
 
राजस्थान के जोधपुर में रावण का मंदिर है. यहां के कुछ समाज विशेष के लोग रावण का पूजन करते हैं और खुद को रावण का वंशज मानते हैं. यही कारण है कि यहां के लोग दशहरा के अवसर पर रावण का दहन करने के बजाए रावण की पूजा करते हैं. हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के बैजनाथ कस्बे में भी रावण की पूजा की जाती है. मान्यता है कि रावण ने यहां पर भगवान शिव की तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे मोक्ष का वरदान दिया था. यहां के लोगों की ये भी मान्यता है कि अगर उन्होंने रावण का दहन किया तो उनकी मौत हो सकती है. इस भय के कारण भी लोग रावण के दहन नहीं करते हैं बल्कि पूजा करते हैं. उत्तर प्रदेश के बिसरख गांव में भी रावण का मंदिर बना हुआ है और यहां पर रावण का पूजन होता है. ऐसा माना जाता है कि बिसरख गांव रावण का ननिहाल था. महाराष्ट्र के अमरावती के गढ़चिरौली नामक स्थान पर आदिवासी समुदाय द्वारा रावण का पूजन होता है. कहा जाता है कि यह समुदाय रावण और उसके पुत्र को अपना देवता मानते हैं.

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